कुशीनगर : सेवरही ब्लाक के गौरीश्रीराम गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के समापन के अवसर पर कथावाचक पं. अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भामासुर की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने भामासुर राक्षस द्वारा अपहृत की गई सोलह हजार एक सौ कन्याओं को युद्ध करके छुड़ाया। समाज द्वारा उनका तिरस्कार न हो, इसीलिए स्वयं उनसे विवाह किया। कहा कि जिनको दुनिया त्याग देती है भगवान की शरण में जाना चाहिए।

कहा कि सुदामा ब्राह्मण हैं परन्तु दरिद्र नहीं। गरीब व दरिद्र अलग है। धनवान भी दरिद्र हो सकता है। ब्राह्मण दान लेने का अधिकारी तो है, परंतु भीख मांगने का नहीं। ऐसे में सुदामा को गरीब कहा जा सकता है पर दरिद्र नहीं। मुख्य यजमान प्रधान विदा देवी, पूर्व प्रधान विश्वनाथ तिवारी, ई. प्रदीप तिवारी, ई. मनोज तिवारी, ई. रंजीव आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया।

भक्ति व ज्ञान से होता है जीव का कल्याण: पंडित आकाश

भक्ति व ज्ञान के माध्यम से जीव का कल्याण होता है। जब तक जीव सांसारिक माया में फंसा रहता, तब तक उसे सही राह नहीं दिखती है। यह बातें पंडित आकाश त्रिपाठी ने कही। वह कप्तानगंज कस्बा के किसान चौक पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करा रहे थे।

उन्होंने कहा कि संसार में प्राणी जिह्वा और जनेंद्रियों के आनंद को श्रेष्ठ मानता है। रेशम के कीट की तरह जिस जाल को बुनता है, उसी में फंस जाता है और अपना उद्धार नहीं कर पाता है। सच्चिदानंद मिश्र, प्रेमलता, अच्युतानंद मिश्र, विवेकानंद, रामगोपाल, जयगोपाल, कृष्णा, श्याम, राजन, ओंकारनाथ मिश्र, राहुल मिश्रा आदि मौजूद रहे।

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