ब्रह्मरूप दिखाने के लिए माता कौशल्या के सामने प्रगट हुए भगवान राम
कप्तानगंज विकास खंड के भिस्वा स्थित मां चंडी कुटी परिसर में सोमवार से शुरू हुए नौ दिवसीय श्रीशतचंडी महायज्ञ की श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा निकाली। यज्ञस्थल से लक्ष्मीपुर शाहपुर घुरहूपुर मंसूरगंज कुंदूर अगया पड़खोरी समेत अन्य गांवों का भ्रमण करते हुए कन्याएं व श्रद्धालु कठहिया टोला में पहुंचे।

कुशीनगर: अपने ब्रह्म रूप को दिखाने के लिए भगवान राम सबसे पहले माता कौशल्या के सामने प्रगट हुए। दर्शन देख माता भाव-विभोर हो उठीं और भगवान राम का हाथ पकड़ खड़ी हो गई। यह बातें कथावाचक त्रियुगी नारायण मणि ने कही। वह कोइन्दी बुजुर्ग स्थित पंचायत भवन के परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा का रसपान करा रहे थे। कहा कि इसके पूर्व राक्षसों के अत्याचार से विश्वामित्र ऋषि परेशान होकर राजा दशरथ के दरबार में गए और राजा दशरथ से वरदान स्वरूप राम सहित चारों भाइयों को मांग लिया। दशरथ थोड़े समय के लिए विचलित हो गए और वृद्धा अवस्था में प्राप्त पुत्रों को देने से मना करने लगे, लेकिन इसी बीच दशरथ के कुलगुरु वशिष्ठ पहुंचे और समझा-बुझाकर विश्वामित्र के साथ चारों राजकुमारों को जाने की अनुमति प्रदान करवा दिए। रास्ते में विविध बाधाओं को पार करते हुए राम गुरु विश्वामित्र के आश्रम गए और गुरु के निर्देश पर ताड़का का वध किया। आयोजक पूर्व प्रधान रामेश्वर राय, जितेंद्र कुमार मिश्र, बैजनाथ यादव, सुरेंद्र कुशवाहा, बीबी राय, ब्रजनारायन मिश्र आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे ।
शतचंडी महायज्ञ की निकाली कलश यात्रा
कप्तानगंज विकास खंड के भिस्वा स्थित मां चंडी कुटी परिसर में सोमवार से शुरू हुए नौ दिवसीय श्रीशतचंडी महायज्ञ की श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा निकाली। यज्ञस्थल से लक्ष्मीपुर, शाहपुर, घुरहूपुर, मंसूरगंज, कुंदूर, अगया, पड़खोरी समेत अन्य गांवों का भ्रमण करते हुए कन्याएं व श्रद्धालु कठहिया टोला में पहुंचे। वहां यज्ञाचार्य प्रद्युम्न तिवारी व अन्य आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच बसंतपुर नहर में मुख्य यजमान रामउग्रह साहनी और कन्याओं ने कलश में जल भरा। यात्रा हरपुर मछागर होते हुए यज्ञस्थल पर पहुंची तो मंडप में कलश स्थापना के साथ महायज्ञ शुरू हुआ। कुटी के महंत रंगीलाल गिरि ने बताया कि दिन में पंडित वीरेंद्र तिवारी कथा का रसपान कराएंगे और रात में मंडली के कलाकार रामलीला का मंचन करेंगे। महायज्ञ की पूर्णाहुति 16 मार्च को होगी। यात्रा में प्रधान प्रतिनिधि विक्की साहनी, देवेंद्र, अविनाश, बासुरी, सदानंद, विनोद, महेश भारती, रामजीत, राजदेव यादव, रामहित, प्रहलाद, ब्रहमा यादव आदि शामिल रहे।
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सती रूपी आत्मा के माता-पिता हैं शिव-पार्वती
मोतीचक: सती रूपी आत्मा के माता-पिता शिव-पार्वती हैं। इनकी सेवा करने वाली बालिका को पति के रूप नारायण की प्राप्ति होती है। यह बातें पंडित वीरेंद्र तिवारी ने कही। वह मुहम्मदा जमीन सिकटिया गांव के रामजानकी मंदिर में चल रहे श्रीराम महायज्ञ में शिव पुराण कथा का रसपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि शिव विश्वास और माता पार्वती श्रद्धा हैं। जीवन में जब श्रद्धा और विश्वास का गठजोड़ होता है तो पुरुषार्थ कार्तिकेय और विवेक श्रीगणेश की उत्पति होती है। यज्ञाचार्य पंडित शुभम तिवारी, पंडित दीपक तिवारी, कृष्ण कुमार नाथ तिवारी के देखरेख में यज्ञ चल रहा है। यजमान रामरूप, कैलाश मिश्र, प्रधान विजय कुशवाहा, विनय कुशवाहा, राजू सिंह, सीपीएन सिंह आदि मौजूद रहे।
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साधु व ज्ञानी कराते हैं सत्य का बोध
कोटवा बाजार: नेबुआ नौरंगिया विकास खंड के लक्ष्मीपुर उर्फ कुर्मीपट्टी गांव स्थित अंहरी देवी स्थान परिसर में चल रहे श्रीशतचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को कथा का रसपान कराते हुए पंडित बैकुंठ दुबे ने सत्संग की विशेषता बतायी। कहा कि साधु व ज्ञानी के निकट रहने से अध्यात्म व सत्य का बोध होता है। सत्संग का उदेश्य अध्यात्म व सद्मार्ग प्रदान कर मनुष्य का कल्याण करना है। रविवार की रात में मंडली के कलाकारों ने नारद मोह प्रसंग का मंचन किया। आयोजक वैद्य शेषनाथ राय, रितेश राय, जंगी विश्वकर्मा, मलख भारती, रामकिशुन, जोगी साहनी, भुल्ली पाल आदि मौजूद रहे।
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