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कुशीनगर में युवा सपनों की उड़ान, नारायणी के तट पर चमके 76 छात्र दलों के रॉकेट और कैनसैट

Published: Sun, 01 Nov 2026 09:50 AM (IST)

कुशीनगर में नारायणी के तट पर राकेट्री कप 2026 के तहत देशभर के छात्र दल अपने बनाए राकेट और कैनसैट ...और पढ़ें

देशभर के 76 छात्र दलों के नवाचार का परीक्षण। जागरण

देशभर के 76 छात्र दलों के नवाचार का परीक्षण। जागरण

अजय कुमार शुक्ल, कुशीनगर। नारायणी के तट पर अंतरिक्ष के सपनों को साकार करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंचने लगी है। कहीं राकेट के ढांचे को अंतिम रूप दिया जा रहा है तो कहीं पेलोड में लगे सेंसर और इलेक्ट्रानिक उपकरणों की जांच हो रही है। छोटे उपग्रह की तरह तैयार कैनसैट के मिशन का परीक्षण चल रहा है तो दूसरी ओर प्रक्षेपण से पहले राकेट की तकनीकी खामियां दूर की जा रही हैं।

गौरीश्रीराम स्थित जगदीश पब्लिक स्कूल परिसर और जंगली पटी के जीरो बंधे के समीप बने लांच पैड पर शनिवार को देशभर से पहुंचे विद्यार्थियों की यह सक्रियता विज्ञान के एक बड़े प्रयोग की गवाही दे रही थी। यहां तैयार 74 राकेट अधिकतम एक किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरेंगे। इनके साथ भेजे जाने वाले पेलोड के सेंसर वातावरण और मौसम से जुड़े आंकड़े जुटाएंगे। उड़ान के बाद पेलोड की रिकवरी कर प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा।

चार दिवसीय राकेट्री कप 2026 के तहत शनिवार को प्रक्षेपण से पहले तकनीकी तैयारियों और परीक्षण का दौर चला। इन-स्पेस के चेयरमैन पवन गोयनका की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम ने विद्यार्थियों के बनाए राकेट और पेलोड का तकनीकी रिव्यू किया। इसमें डिजाइन, संरचना, इलेक्ट्रानिक उपकरणों की कार्यक्षमता और निर्धारित मिशन से जुड़े पहलुओं को परखा गया।

प्रतियोगिता में देशभर से 48 कैनसैट और 28 माडल राकेट्री टीमों समेत कुल 76 छात्र दल भाग ले रहे हैं। इनके बनाए उपकरणों के परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के साथ 74 रॉकेट के प्रक्षेपण की तैयारी है। आयोजन में 120 से अधिक वैज्ञानिक, शिक्षक और मेंटर्स भी हिस्सा ले रहे हैं।

राकेट अधिकतम एक किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचेंगे। इनके साथ लगे सेंसर और इलेक्ट्रानिक उपकरण वातावरण तथा मौसम से संबंधित जानकारियां एकत्र करेंगे। उड़ान के दौरान जुटाए गए आंकड़ों को प्राप्त करने के साथ पेलोड को सुरक्षित वापस हासिल करना भी मिशन का अहम हिस्सा होगा। रिकवरी के बाद विद्यार्थी एकत्रित डेटा का विश्लेषण करेंगे। इस तरह राकेट की उड़ान से लेकर आंकड़ों के संग्रह, संचार और पेलोड की वापसी तक की पूरी प्रक्रिया उनके प्रयोग का हिस्सा बनेगी।

कैनसैट में छोटे उपग्रह जैसा प्रयोग
प्रतियोगिता की दो प्रमुख श्रेणियों में विद्यार्थियों की तकनीकी प्रतिभा सामने आएगी। माडल राकेट्री में राकेट की संरचना, उड़ान के सिद्धांत और प्रक्षेपण की प्रक्रिया को व्यवहार में परखा जाएगा। वहीं कैनसैट श्रेणी में छोटे उपग्रह के आकार में तैयार उपकरणों के माध्यम से निर्धारित वैज्ञानिक मिशन पूरा करने की चुनौती होगी। इसमें पेलोड के भीतर लगे सेंसर और इलेक्ट्रानिक सिस्टम के जरिए आंकड़े जुटाना, उनका संचार करना और मिशन के उद्देश्य के अनुरूप परिणाम हासिल करना शामिल है।

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सांसद शशांक मणि ने आयोजन स्थलों का लिया जायजा, युवा वैज्ञानिकों से की बातचीत
इन-स्पेस नारायणी राकेट्री कप 2026 की तैयारियों के बीच लोकसभा क्षेत्र देवरिया के सांसद शशांक मणि ने आयोजन से जुड़े विभिन्न स्थलों का दौरा कर व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने लांच पैड, द प्रेसिडेंट स्कूल और जगदीश पब्लिक स्कूल सहित अन्य स्थलों पर पहुंचकर तैयारियों का निरीक्षण किया।

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