बीज से बाजार तक का सफर हुआ आसान, ‘प्राविधान’ ने बदली कुशीनगर के 1200 किसानों की तकदीर
नागेंद्र साहनी ने 'प्राविधान' के माध्यम से किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाया है, जिससे उन्हें सही दाम मिल ...और पढ़ें

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HighLights
प्राविधान किसानों की उपज को घर से खरीदकर बाजार पहुंचाता है।
कालानमक धान और खपली गेहूं को डेढ़ गुना अधिक दाम मिल रहे।
नागेंद्र साहनी की पहल से 1200 से अधिक किसान जुड़े।
सुनील सिंह, गोरखपुर। फसल तैयार है तो खरीदार कहां मिलेगा और सही कीमत मिलेगी या नहीं...। किसान की इसी चिंता का समाधान नागेंद्र साहनी ने ‘प्राविधान’ के जरिये तलाशा। बीज उपलब्ध कराने के साथ उपज खरीदने का अनुबंध किया और फसल तैयार हुई तो किसान के घर से ही उसे उठाकर बाजार तक पहुंचाया। कुशीनगर के हरपुर मछागर से शुरू हुआ फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी) प्राविधान का उनका यह सफर तीन वर्षों में 1200 किसानों तक पहुंच चुका है।
किसान अब उपज बेचने के लिए बाजार नहीं तलाशते, बल्कि कालानमक धान 45 से 50 रुपये और खपली गेहूं 40 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उनके घर से ही खरीद लिया जाता है। प्राविधान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नागेंद्र ने इसकी शुरुआत सीधे कंपनी बनाने से नहीं की। नाबार्ड से जुड़कर पहले तीन वर्षों तक जीरो बजट फार्मिंग के तहत काम किया।
किसानों को कालानमक धान का बीज निश्शुल्क उपलब्ध कराया और तैयार उपज खरीदी। इस प्रयोग से मिले अनुभव के बाद किसानों को संगठित करने और उनकी उपज के बेहतर मूल्य की व्यवस्था विकसित करने के लिए वर्ष 2023 में कंपनी बनाकर काम शुरू किया।
नागेंद्र ने बीज से बाजार तक की कड़ी तैयार की। बीज उपलब्ध कराते समय ही किसान से उपज खरीदने का अनुबंध कर लिया जाता है। कंपनी सरकारी मूल्य से डेढ़ से दो गुना या इससे भी अधिक मूल्य पर उपज खरीदती है।
कालानमक धान के साथ खपली गेहूं को भी इस व्यवस्था से जोड़ा गया है। किसान के घर से उपज खरीदने के बाद पैकेजिंग कर देशभर में बेचा जाता है। इससे छोटे व सीमांत किसानों के सामने उपज का उचित मूल्य पाने व बाजार तक पहुंचने की चुनौती कम हुई है।
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शुरुआत में सीमित संख्या में किसान जुड़े। दूसरे वर्ष सदस्य संख्या बढ़कर 700 और तीसरे वर्ष 1200 तक पहुंच गई। किसानों को एक मंच पर आने से सामूहिक रूप से खेती से जुड़े अवसर भी मिल रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता के साथ कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उनका पंजीकरण भी कराया जाता है।
प्राविधान से जुड़ने के लिए किसान को दो हजार रुपये सदस्यता शुल्क देना होता है। कंपनी छोड़ने पर यह राशि वापस कर दी जाती है। नागेंद्र बताते हैं कि उद्देश्य केवल उपज का खरीदार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बीज से लेकर बाजार तक ऐसी व्यवस्था से जोड़ना है, जिससे खेती अधिक लाभकारी हो सके।
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