UP News: अब पुलिस के पालने में पलेंगे अनचाहे नवजात, गोद लेने के लिए जागरूक किए जाएंगे जवान; बचेगी नन्हीं जिंदगी
पुलिस अनचाहे नवजातों और उनकी परवरिश का जिम्मा लेगी। माना जा रहा है कि इस कोशिश के बाद कई नवजात काल के गाल में समाने से बचेंगे। दोआबा के विभिन्न स्थानों पर अक्सर देखा जाता है कि लोग अनचाहे नवजातों को चुपके से कहीं भी छोड़कर चले जाते हैं। ऐसे ही बच्चों का जीवन बचाने के लिए अपर एसपी समर बहादुर ने ऑपरेशन पालना शुरू किया है।

हिमांशु भट्ट, कौशांबी। सड़क किनारे, झाड़ियों या फिर अन्य निर्जन स्थान पर फेंके जाने वाले नवजातों का जीवन बचाने को कौशांबी पुलिस ने अनूठी पहल की है। अपर पुलिस अधीक्षक ने अपनी इस व्यक्तिगत पहल को नाम आपरेशन पालना दिया है। अनचाही संतान को फेंकने के बजाए अब लोग ब्लाक मुख्यालयों पर रखवाए जाने वाले पुलिस के पालने में छोड़ सकते हैं।
कई नवजात काल के गाल में समाने से बचेंगे
सीडब्ल्यूसी की मदद से पुलिस उसकी परवरिश का जिम्मा लेगी। माना जा रहा है कि इस कोशिश के बाद कई नवजात काल के गाल में समाने से बचेंगे। दोआबा के विभिन्न स्थानों पर अक्सर देखा जाता है कि लोग अनचाहे नवजातों को चुपके से कहीं भी छोड़कर चले जाते हैं। इससे उनकी जान तक चली जाती है। ऐसे ही बच्चों का जीवन बचाने के लिए अपर पुलिस अधीक्षक समर बहादुर ने आपरेशन पालना शुरू किया है।
शिशु गृह प्रयागराज भेज दिया जाएगा
उन्होंने बताया कि जल्द ही ब्लाक मुख्यालयों में पालना रखवा दिया जाएगा। पालना वहीं पर रखा जाएगा, जहां कम से कम भोर व रात के वक्त आवागमन न के बराबर हो। अवैध संबंध या फिर अन्य कारणों से जन्म लेने वाले संतान को लोग इसी पालने में छोड़कर जा सकते हैं। संबंधित थाना अथवा चौकी की पुलिस प्रतिदिन सुबह पालना देखेगी। यदि कोई नवजात उसमें मिला तो सीडब्ल्यूसी की मदद से उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। स्वास्थ्य ठीक होते ही शिशु गृह प्रयागराज भेज दिया जाएगा। वहां पर दो महीने तक बच्चे की परवरिश कराई जाएगी। इसके बाद जिलाधिकारी की इजाजत लेकर बच्चा किसी यशोदा को गोद दे दिया जाएगा।
पूरी तरह से सुरक्षित होगा पालना
अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पालना पूरी तरह से सुरक्षित होगा। इसे लोहे के एंगल से बनवाकर सीमेंट-बालू से जाम करा दिया जाएगा। ताकि, काेई उठाकर नहीं ले जा सके। पालना इस तरह से कवर्ड भी होगा कि बंदर-कुत्ता अथवा अन्य कोई जानवर उसमें रखे गए नवजात को नुकसान नहीं पहुंचा पाए। इतना ही नहीं, पालने में मौसम के हिसाब से बिस्तर तक लगा रहेगा। सर्किल अफसरों के साथ थानेदारों को भी इस बाबत जरुरी दिशा-निर्देश दे दिया गया है।
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गोद लेने के लिए जागरूक किए जाएंगे जवान
शिशु गृह में दो महीने तक देखभाल के बाद डीएम की अनुमति लेकर ही बच्चे को गोद दिया जा सकता है। इन दो महीनों तक सीडब्ल्यूसी बच्चे के माता-पिता की खोजबीन करती है। एएसपी के मुताबिक बच्चा गोद लेने के लिए दारोगा-सिपाहियों को भी जागरूक किया जाएगा। जिसे जरुरत होगी, उसे बच्चा लिखापढ़ी के साथ दे दिया जाएगा। इसके अलावा बीट के दारोगा-सिपाही समाज के अन्य जरुरतमंदों को भी बच्चा गोद लेने के लिए प्रेरित करेंगे।
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