चेन्नई में पकड़ा जाए माल तो अब वहीं करनी होगी अपील
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि जीएसटी में न्याय पाना व्यापारियों के लिए बहुत कठिन है।

चेन्नई में पकड़ा जाए माल तो अब वहीं करनी होगी अपील
जागरण संवाददाता, कौशांबी : केंद्र सरकार ने एक देश एक कर की अवधारणा को आधार बनाते हुए पांच साल पहले वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू किया। पांच साल बीतने के बावजूद इसकी तमाम विसंगतियां अब तक दूर नहीं हो सकीं। अगर किसी व्यापारी का माल चेन्नई, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता जैसे शहरों में सचल दल द्वारा पकड़ लिया गया तो उसे अपील वहीं के अधिकारी के पास करनी होगी। इसके लिए उसे वहां अधिवक्ता खोजना पड़ेगा और जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती है, तब तक ठहरना भी पड़ेगा। इससे उसका आर्थिक और समय (दोनों) का नुकसान होगा।
व्यापारी अपना माल सूबे के अलावा दूसरे प्रांतों से भी मंगाते हैं। ऐसे में अगर माल आते समय किन्हीं कारणों से रास्ते में ई-वे बिल की वैधता खत्म हो गई अथवा उसमें किसी तरह की गड़बड़ी होने पर संबंधित विभाग के सचल दल द्वारा माल पकड़ लिया गया तो उस पर भारी भरकम टैक्स के अलावा जुर्माना लगा दिया जाता है। व्यापारी उस टैक्स और जुर्माना को देने के लिए यदि तैयार नहीं हुआ तो उसके पास सक्षम अधिकारी के यहां अपील का विकल्प बचता है। इसके लिए उसे उस शहर में जाकर पहले अधिवक्ता को तलाश करना पड़ेगा। उसकी फीस देने के अलावा उसे होटल में ठहरना भी पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा और तिल्हापुर व्यापार मंडल के अध्यक्ष शिवबाबू केसरवानी का कहना है कि जीएसटी में न्याय पाना व्यापारियों के लिए बहुत कठिन है। अपील की सुनवाई और उसके निस्तारण में कम से कम 10-15 दिन तक लग जाते हैं। ऐसी दशा में तब तक व्यापारी को वहीं रुकना पड़ता है। इससे उसका व्यापार भी प्रभावित होता है। लिहाजा, सरकार को चाहिए कि कानून में संशोधन करके ऐसी व्यवस्था करे कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे शहरों में माल पकड़े जाने पर भी व्यापारी अपने जोन कार्यालय में अपील कर सके और वहीं उसकी सुनवाई व केस का निस्तारण किया जाए।
ट्रिब्यूनल का गठन अब तक नहीं हो सका
इन व्यापारी पदाधिकारियों का कहना है कि व्यापारियों को द्वितीय अपील की सुविधा सरकार अब तक उपलब्ध नहीं करा सकी है। जीएसटी ट्रिब्यूनल का गठन प्रदेश में न हो पाने के कारण प्रथम अपील के खिलाफ व्यापारी हाईकोर्ट ही जा सकता है। सस्ते न्याय के लिए जीएसटी ट्रिब्यूनल का गठन सरकार से जल्द करने की भी मांग की गई।
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