स्कूल फीस के लिए छात्रा ने छोड़ा घर, मजबूरी सुनकर पसीजा पुलिस का दिल, फिर चंदा जुटाकर की मदद
फीस की चिंता में घर से निकली कासगंज की छात्रा को पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत स्वजनों से मिलाया। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
फीस न भर पाने से छात्रा ने घर छोड़ा, पुलिस ने मदद की।
पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर 60,200 रुपये की आर्थिक सहायता दी।
ऑपरेशन मुस्कान के तहत बालिका को सफलतापूर्वक उसके स्वजन से मिलाया गया।
जागरण संवाददाता, कासगंज। पिता की सीमित कमाई, घर की आर्थिक तंगी और पढ़ाई की फीस भरने की चिंता एक बेटी के मन पर इतनी भारी पड़ी कि वह नाराज होकर घर से निकल गई, लेकिन किस्मत ने उसे ऐसे लोगों से मिलाया, जिन्होंने खाकी वर्दी के साथ-साथ इंसानियत को जिंदा रखा। पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत बालिका को उसके स्वजन से मिलाया और उसकी पढ़ाई न रुके, इसके लिए पुलिसकर्मियों व स्थानीय लोगों ने मिलकर 60 हजार 200 रुपये की आर्थिक सहायता जुटाई।
यह है पूरा मामला
शनिवार रात करीब साढ़े आठ बजे पुलिस को सूचना मिली कि एक बालिका क्षेत्र में घूम रही है। इस पर पीआरवी, कोतवाली प्रभारी जगदीश चंद्र और मिशन शक्ति की टीम मौके पर पहुंची। बातचीत में पता चला कि बालिका कक्षा 11 की छात्रा है और फीस जमा न हो पाने से नाराज होकर घर छोड़ आई है।
पुलिस ने उसे वन स्टाप सेंटर भेजा और थाना दुल्लापुर, गाजीपुर के माध्यम से उसके स्वजन को सूचना दी। रविवार को बालिका की मां और भाई कासगंज कोतवाली पहुंचे। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बालिका को उनके सिपुर्द कर दिया गया। बातचीत में पता चला कि उसके पिता ट्रैक्टर पर मजदूरी करते हैं और प्रतिदिन करीब 200 रुपये कमाते हैं। परिवार के पास खेती की जमीन भी नहीं है। ऐसे में बेटी की पढ़ाई की फीस जुटाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था।
स्थानीय लोगों ने स्वेच्छा से बढ़ाए हाथ
परिवार की आर्थिक स्थिति जानकर कोतवाली पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने स्वेच्छा से मदद के लिए हाथ बढ़ाए। सभी ने मिलकर 60 हजार 200 रुपये एकत्र किए और स्वजन को सौंपे, ताकि बेटी की पढ़ाई जारी रह सके। यह मदद केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि एक बेटी के सपनों को टूटने से बचाने की कोशिश भी है।
प्रभारी निरीक्षक जगदीश सिंह ने बताया कि पुलिस का दायित्व केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि जरूरत के समय पीड़ित और असहाय लोगों की मदद करना भी है। बालिका की शिक्षा बाधित न हो, इसी भावना से पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने सहयोग किया।
