कानपुर, योगेन्द्र यादव। शौचालय न होने से सबसे अधिक समस्या आधी आबादी को उठानी पड़ती है। इसी तरह की समस्या मंगलपुर क्षेत्र में बाजार आने जाने वाली महिलाओं और कालेज जाने वाली छात्राओं को होती थी। शर्म और परेशानी में इधर-उधर भटकती महिलाओं का यह दर्द ज्योति पाठक से देखा नहीं गया। उन्होंने घर के बाहरी हिस्से में निश्शुल्क सामुदायिक शौचालय बनाने की ठानी और उनकी इस पहल पर परिवार ने भी साथ दिया। इससे महिलाओं और छात्राओं को काफी राहत मिली।

आधी आबादी की तकलीफ को समझा

मंगलपुर की रहने वालीं प्राथमिक विद्यालय सबलपुर में शिक्षिका ज्योति पाठक का मानना है कि खुले में शौच समाज का अभिशाप है और सबसे ज्यादा तकलीफ आधी आबादी को होती है। वर्ष 2017 में मंगलपुर में स्कूल-कालेज जाने वाली छात्राओं को कभी शौचालय की जरूरत पड़ती थी तो यहां सुविधा न होने से वह परेशान हो जाती थीं। यही हाल बाजार आने वाली महिलाओं का भी होता था। कभी मजबूरी में खुले में भी जाना पड़ जाता था तो स्थिति असहज हो जाती थी। एक दो बार उनके घर में छात्राएं परेशान होकर पूछते हुए आईं।

पति ने बढ़ाई हिम्मत तो दूर की जनसमस्या

इसके बाद उन्होंने ठाना कि अब कुछ करना है। काफी दिन तक मन में उधेड़बुन चलती रही और आखिरी में पति आदर्श से चर्चा की तो उन्होंने हिम्मत बढ़ाई और परिवार के लोग भी राजी हो गए। इसके बाद घर के बाहरी हिस्से में सामुदायिक शौचालय बनवाया, जिससे लोग आने लगे तो उनकी समस्या दूर हुई और उन्हें भी खुशी हुई। जरूरत पर लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।

नौकरी करने के बाद भी मुहिम जारी

शौचालय में उन्होंने महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड भी रखना शुरू कर दिया, जिसे जरूरत होती वह ले जाता था। इसके अलावा भी वह सेनेटरी पैड का निश्शुल्क वितरण भी करतीं हैं। वर्ष 2020 में उनकी नौकरी लग गई। इसके बाद समय कम मिलने लगा, लेकिन फिर भी मुहिम जारी है। इसके अलावा वह लोगों को जागरूक करतीं हैं कि दहेज न लें और न दें। बहू आपकी बेटी है जो आपके परिवार को संवारती है।

Edited By: Abhishek Agnihotri

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