जागरण संवाददाता, कानपुर देहात : डेंगू के डंक से भले ही मरीज कराह रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य महकमा रवैया नहीं सुधार रहा है। डीएम की सख्ती के बाद सीएचसी पीएचसी में भले ही बुखार पीड़ितों के लिए हेल्प डेस्क खुल गईं हैं लेकिन यहां इलाज के नाम पर केवल काउंसिलिग मिलती है। अब बिना जांच इंतजाम के सिर्फ काउंसलिग से तो बुखार काबू में होने से रहा।

जिले में लगातार डेंगू पीड़ित बढ़ रहे हैं। मेडिकल कालेज कानपुर से 63 डेंगू मरीज चिह्नित हो चुके हैं। जबकि 13 से अधिक डेंगू पीड़ितों की मौत हो चुकी है। डीएम की सख्ती के बाद सरकारी अस्पतालों यानी सीएचसी व पीएचसी में फीवर हेल्प डेस्क खोलने की पहल हुई, लेकिन सीएचसी, पीएचसी में बनाई गई हेल्प डेस्क में केवल बुखार पीड़ितों की काउंसलिग होती है। हालात ये हैं कि जिला अस्पताल में बनाए गए फीवर हेल्प डेस्क में किसी कर्मी की तैनाती तक नहीं हो सकी है। डेंगू परीक्षण का कोई इंतजाम जिला अस्पताल में नहीं है। ऐसे में सीएचसी या पीएचसी की हेल्प डेस्क मरीजों की किस तरह से मदद कर पाएंगी यह बड़ा सवाल है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य अफसरों की ओर से जो कदम उठाए जा रहे वे नाकाफी हैं। लोग समझ नहीं पा रहे कि हेल्प डेस्क बनाई गई है या फिर रेफरल डेस्क। डेंगू परीक्षण का इंतजाम किए जाने की ओर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। इसका नतीजा ये हो रहा है कि बुखार आने पर लोग वायरल या फिर बुखार का इलाज कराते रहते हैं। तेजी से प्लेटलेट्स गिरने पर हालत बिगड़ जाती है तब कानपुर शहर के अस्पताल विकल्प बचते हैं। जिला संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. एपी वर्मा ने बताया कि डेंगू की जांच के इंतजाम सीएमओ या फिर सीएमएस के जरिए हो सकते हैं। उनके स्तर से ही प्रयास किया जाना चाहिए। अब तक मिले 575 मलेरिया रोगी

जिले की सीएचसी व जिला अस्पताल में जनवरी से 10 नवंबर तक रक्त परीक्षण के अनुसार कुल 575 मलेरिया रोगी मिल चुके हैं। जबकि फैल्सीपेरम का एक मरीज पाया गया। साल की दूसरी छमाही में ही अधिकांश मलेरिया रोगी परीक्षण में पाए गए। जबकि निजी प्रयोगशाला में हुई जांच का कोई आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।

Posted By: Jagran

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