आस्था का केंद्र है अकबरपुर का काली माता मंदिर
नमो देब्यै महा देब्यै ... (मास्टहैड के लिए) हर अंधकार के पीछे एक उजाले की किरण छिपी होती है
नमो देब्यै महा देब्यै ...
(मास्टहैड के लिए)
हर अंधकार के पीछे एक उजाले की किरण छिपी होती है। नाम के अनुसार ही माता महाकाली का वर्ण गहन अंधकार की तरह है। उनके गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है। उनके ब्रह्मांड की तरह गोल तीन नेत्रों से ज्योति निकलती है। यह स्वरूप हमें अपने जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने को प्रेरित करता है। उनके श्वांस प्रश्वांस से निकलने वाली ज्वालाएं हमें अपने अंदर दुर्गुणों को भस्म करने की प्रेरणा देती हैं। मां के इस स्वरूप से संदेश मिलता है कि जीवन के अंधकार को प्रकाश में बदलने की चेष्टा जारी रहनी चाहिए।
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(कामन इंट्रो)
अकबरपुर कस्बे में रूरा रोड पर स्थित अति प्राचीन कालिका देवी मंदिर मुगल कालीन वास्तु कला का नायाब नमूना है। मान्यता है कि इस मंदिर में पूजन अर्चन कर मत्था टेकने से लोगों के कष्ट खुद ब खुद दूर हो जाते हैं।
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इतिहास
मुगल बादशाह अकबर के शासन काल के पहले यह कस्बा शाहपुर के नाम से जाना जाता था। अकबरपुर के इतिहासकार श्रीधर शास्त्री के अनुसार सन 1474 में बहादुर शाह जफर के सेनापति मुबारक शाह ने इस नगर पर हमला करने के बाद इसका नाम शाहपुर रख दिया था। इसके बाद यहां स्वामी स्वरूप शाह का साम्राज्य हो गया।
माना जाता है कि शाहपुर की रानी ने यहां विजयी होने के लिए मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। इसी के तहत उन्होंने काली देवी के मंदिर का निर्माण कराया था।
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तैयारियां
नवरात्रि के सातवें दिन यहां मां के विशेष पूजन की तैयारी की गई है। मान्यता है कि नवरात्र में होने वाले इस विशेष पूजन में भाग लेने से भक्त को वैभव व अभय के साथ ही हर मनोकामना पूरी होती है। दूरस्थ स्थानों से यहां आने वाले भक्त हवन पूजन में भाग लेकर मनौतियां मानते हैं। मनौती पूरी होने पर लोग नवरात्र में घंटे व ध्वज भी अर्पित करते है।
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आकर्षण (साइड बाक्स)
नवरात्र के मौके पर इस मंदिर में पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसके साथ ही यहां चैत्र नवरात्र में जवारों का जुलूस विशेष आकर्षण रहता है। सप्तमी के दिन यहां विशेष पूजन के साथ ही बच्चों के मुंडन संस्कार होते हैं। मन्नत पूरी होने पर प्रतिवर्ष नवरात्र में भक्त विशेष पूजन व चढ़ावा के लिए आते हैं।
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ऐसे पहुंचे मंदिर
दिल्ली हावड़ा रेलमार्ग से आने वाले श्रद्धालु रूरा स्टेशन पर उतरकर अकबरपुर पहुंचते हैं। जबकि झांसी की ओर से आने वाले लालपुर स्टेशन उतरकर टेंपो से अकबरपुर आते हैं। वहीं सिकंदरा-कानपुर हाइवे पर स्थित अकबरपुर के लिए सड़क मार्ग भी सुलभ है।
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नवरात्र के मौके पर यहां कस्बे के साथ ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पूजन करने के साथ यहां मनौतियां मानते हैं। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में संकल्पित होकर पूजन अर्चन करने वाले भक्त की हर कामना पूरी होती है।
आदित्य पांडेय, पुजारी कालिका देवी मंदिर अकबरपुर
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