जागरण संवाददाता, लखनऊ : कानपुर मेट्रो का भविष्य केंद्र सरकार पर टिका हुआ है। शहरी विकास मंत्रालय से क्लीयरेंस मिलते ही कानपुर मेट्रो की फाइनेंशियल बिड खुल जाएगी और आइआइटी कानपुर से मोतीझील के बीच मेट्रो का काम शुरू हो सकेगा। नौ किमी ट्रैक पर मेट्रो के संचालन को लेकर टेंडर प्रकिया शुरू हो चुकी है। 30 अप्रैल को दो कंपनियों ने टेंडर प्रकिया में शिरकत भी की थी। 734 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन के अफसरों ने अभी से रूपरेखा बना ली है।

लखनऊ मेट्रो के अधिकारियों ने बताया दो कंपनियों ने टेंडर में भाग लिया है। इनमें जो कंपनी मानकों पर खरी उतरेगी, उसे कानपुर मेट्रो के पहले फेस के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए लखनऊ में टेक्निकल बिड से संबंधित काम पूरा कर लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआइबी) का क्लीयरेंस मिलते ही फाइनेंशियल बिड खोल दी जाएगी। इसलिए अब कानपुर में मेट्रो का संचालन पूरी तरह से केंद्र पर निर्भर करता है। विदेशी बैंक से लोन, केंद्र व राज्य सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता की रफ्तार इस पीआइबी क्लीयरेंस के बाद तेज हो जाएगी। मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि आइआइटी कानपुर से मोतीझील के बीच मेट्रो 734 करोड़ से काम कराने जा रहा है। सभी स्टेशन एलीवेटेड रहेंगे। कानपुर में मेट्रो का विस्तार 32.4 किलोमीटर होना है। डीपीआर में बजट 16,975 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।

एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने बताया कि कानपुर मेट्रो शुरू होने जा रही है, लेकिन केंद्र से पीआइबी क्लीयरेंस मिलना अभी बाकी है। यह क्लीयरेंस मिलते ही मेट्रो का काम शुरू कर दिया जाएगा। पहले चरण में नौ स्टेशन बनाए जाएंगे जिनमें आइआइटी कानपुर स्टेशन, कल्याण पुर रेलवे स्टेशन, एसपीएम हास्पिटल स्टेशन, कानपुर विवि स्टेशन, गुरुद्वारा चौराहा स्टेशन, गीता नगर स्टेशन, रावतपुर रेलवे स्टेशन, लाला राजपत राय हास्पिटल स्टेशन और मोतीझील स्टेशन बनाए जाएंगे। पहले कॉरिडोर में कोई भी भूमिगत स्टेशन नहीं होगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि सितंबर 2020 से पहले कानपुर मेट्रो का पहला फेस जनता के लिए शुरू कर दिया जाएगा।

एलएमआरसी के एमडी ने बताया कि कानपुर में मेट्रो के 32.38 किलोमीटर काम को खत्म करने का समय वर्ष 2024 निर्धारित किया गया है। एलएमआरसी ने डिटेल डिजाइन कंसल्टेंट को भी फाइनल कर दिया गया है, जो कानपुर के नौ स्टेशनों की डिजाइन बनाने का काम तेजी से कर रहा है।

क्या है पीआइबी

पब्लिक इंवेस्टमेंट बोर्ड (पीआइबी) मेट्रो कार्य के लिए जरूरी है। इसकी स्वीकृति शहरी विकास मंत्रालय देता है। इस स्वीकृति के बाद ही कोई विदेशी कंपनी बड़े टेंडरों में रुचि लेती है और कोई विदेशी बैंक अपना सर्वे कराने के बाद लोन देता है। यह स्वीकृति न मिलने से उक्त प्रक्रिया में रुकावट आती है। इस प्रक्रिया को उन सभी शहरों में अपनाया गया है जहां जहां मेट्रो चल रही है।

Posted By: Jagran