विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 : 10 लाख तक ब्याजमुक्त ऋण, प्रशिक्षण के दौरान मानदेय के साथ मिलेगी टूलकिट
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में युवाओं को 10 लाख तक ब्याजमुक्त ऋण, 15% मार्जिन मनी सब्सिडी और प्रशिक्षण के ...और पढ़ें

HighLights
युवाओं को 10 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त बैंक ऋण
प्रशिक्षण के दौरान 5000 रुपये मानदेय और 15000 की टूलकिट
मोबाइल-कंप्यूटर मरम्मत जैसे 14 नए आधुनिक ट्रेड शामिल
जागरण संवाददाता, कानपुर। हुनर सिखाकर युवाओं को रोजगार दिलाने वाली विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना अब पूरी तरह से बदल गई है। पारंपरिक कारीगरी सिखाने के बजाय अब युवाओं को मोबाइल फोन और कंप्यूटर मरम्मत, सोलर इंस्टालेशन जैसे आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया जाएगा।
इसके लिए प्रशिक्षित युवाओं को बैंक से 10 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण भी सरकार दिलाएगी और प्रशिक्षण के दौरान मानदेय के साथ ही आधुनिक टूलकिट भी देगी। विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री इस योजना के नए संस्करण का शुभारंभ करते हुए लाभार्थियों की घोषणा करेंगे।
सरकार ने योजना के दूसरे चरण में 14 नए ट्रेड शामिल कर इसका दायरा काफी बढ़ा दिया है। पहले बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी समेत 11 ट्रेड शामिल थे। अब मूर्तिकार, मालाकार, दूधवाला, भरभूजा और मछुआरा के साथ ही आधुनिक जरूरतों से जुड़े पेशों को भी शामिल किया गया है जिसमें मोबाइल फोन मरम्मत, आटोमोबाइल मरम्मत, इलेक्ट्रानिक सामान मरम्मत, विद्युत सामान मरम्मत, प्लम्बर, कंप्यूटर मरम्मत, सोलर इंस्टालेशन, डिजिटल फोटोग्राफी तथा सौंदर्य एवं वेलनेस शामिल है।
अभी तक योजना के लाभार्थियों को प्रशिक्षण मानदेय और टूल किट दी जाती रही है लेकिन नए संस्करण के तहत प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये तक का बैंक ऋण भी बगैर किसी गारंटी के उपलब्ध कराया जाएगा। ऋण पर 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी सब्सिडी यानी बैंक ब्याज का लाभ मिलेगा। सामान्य श्रेणी के पुरुष लाभार्थियों को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत स्वयं लगाना होगा, जबकि महिलाओं, दिव्यांगजनों, भूतपूर्व सैनिकों और अन्य आरक्षित वर्ग के लाभार्थियों के लिए स्वयं का अंशदान पांच प्रतिशत रखा गया है।
सिर्फ ऋण देकर छोड़ने के बजाय योजना में कारीगरों को हुनर निखारने का अवसर भी दिया जाएगा। चयनित लाभार्थियों को 10 दिन का निश्शुल्क कौशल उन्नयन प्रशिक्षण मिलेगा। प्रशिक्षण अवधि में प्रतिदिन 500 रुपये के हिसाब से कुल पांच हजार रुपये मानदेय सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजा जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लाभार्थियों को अपने काम को आधुनिक और बेहतर तरीके से करने के लिए 15 हजार रुपये तक की उन्नत टूलकिट निश्शुल्क दी जाएगी। इससे पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक उपकरणों से काम करने और उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत युवाओं को कारीगर बनने का मौका मिल रहा था लेकिन अब इसके बदले स्वरूप में अत्याधुनिक ट्रेड का प्रशिक्षण दिया जाएगा और स्वावलंबी बनने के लिए बैंक से आसान ऋण भी मिलेगा।
- के. विजयेंद्र पांडियन, आयुक्त एवं निदेशक उद्योग
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