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    सीवेज शोधन में लापरवाही पर कानपुर जल निगम और कंपनी पर 98 लाख जुर्माना, यूपीपीसीबी ने 77 दिनों तक कराई निगरानी

    By Abhishek AgnihotriEdited By:
    Updated: Tue, 06 Sep 2022 11:35 AM (IST)

    उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 77 दिनों तक निगरानी कराने के बाद सीवेज शोधन में लापरवाही पर कानपुर जल निगम और कंपनी पर जुर्माना लगाया है। साथ ही क्षतिपूर्ति अधिरोपित कर वसूली के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा है।

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    सीवेज शोधन में लापरवाही पर कार्रवाई की गई है।

    कानपुर, [अनुराग मिश्र]। UPPCB News: घरों से निकलने वाले सीवेज के शोधन में घोर लापरवाही सामने आई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। बिनगवां और जाजमऊ में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की 77 दिनों तक निगरानी के बाद बोर्ड ने जल निगम और एसटीपी संचालन करने वाली अलग-अलग कंपनियों पर कुल 98.24 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इससे जल निगम और कंपनी संचालकों में खलबली मची हुई है।

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    बिनगवां और जाजमऊ में बने सीवेज शोधन प्लांट में शहर के घरों से निकलने वाले सीवेज का शोधन किया जाता है। इसके माध्यम से दूषित पानी को दोबारा प्रयोग में लाने लायक बनाया जाता है। यहां दूषित पानी में मिली अशुद्धियों और कचरे को प्रारंभिक स्तर पर छानकर अलग किया जाता है। इसके बाद, रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म किया जाता है।

    इसको साफ करने के लिए भौतिक, रासायनिक और जैविक विधि का प्रयोग किया जाता है। बाद में इस शोधित जल को गंगा और पांडु जैसी नदियों में डाल दिया जाता है। इस तरह सीवेज शोधन में लापरवाही के चलते नदियों में दूषित पानी पहुंच रहा है।

    यूपीपीसीबी के अधिकारी ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई जल निगम के अनिरबन मुखर्जी के साथ हाल ही में बिनगवां में बने एसटीपी का निरीक्षण किया था। यहां सीवेज शोधन में घोर लापरवाही सामने आई थी, जिसके बाद एसटीपी का संचालन करने वाले जल निगम और अन्य कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया है।

    एसटीपी ऐसे करता है काम

    एसटीपी को ऐसी जगह बनाया जाता है जहां विभिन्न स्थानों से दूषित पानी वहां लाया जा सके। इसे साफ करने की प्रक्रिया तीन चरणों में संपन्न होती है। पहले चरण में ठोस पदार्थ को अलग किया जता है। दूसरे चरण में जैविक पदार्थ को एक ठोस समूह एवं वातावरण के अनुकूल बनाकर इसका प्रयोग खाद एवं लाभदायक उर्वरक के रूप में किया जाता है। तीसरे चरण में पानी को प्रयोग में लाने के लिए नदी, तालाबों आदि में छोड़ दिया जाता है।

    ये कंपनियां कर रहीं एसटीपी का संचालन, इतना लगा जुर्माना

    स्थान सीटीपी की क्षमता संचालक कंपनी जुर्माना

    बिनगवां 210 एमएलडी शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी 28,87,500 रुपये

    जाजमऊ 130 व 43 एमएलडी शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी 21,00,000 रुपये

    जाजमऊ 36 एमएलडी जल निगम 48,37,500 रुपये

    ये मिली लापरवाही

    -एसटीपी पर स्थापित कई पंप बंद मिले।

    -पानी में मिली बड़ी अशुद्धियों (कचरे) को ठीक ढंग से फिल्टर नहीं किया जा रहा था।

    -पानी के प्रवाह को बताने वाला फ्लोमीटर भी नहीं लगाया है। इसे जनवरी 2020 में ही स्थापित किया जाना था।

    -कई रिएक्टरों से स्लज निकासी/सफाई का कार्य प्रारम्भ ही नहीं किया गया है।

    -टैंक में स्लज भरी पाई गई, इससे शोधन क्षमता प्रभावित हो रही थी।

    -स्लज निकासी वाले वाल्व एवं चेंबर जाम पाए गए।

    -अंतिम शुद्धिकरण के बाद निस्तारित किए जा रहे उत्प्रवाह के जल नमूने जांच में संतोषजनक नहीं मिले।

    -सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की जांच में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इसमें जल निगम और कानपुर रिवर मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की लापरवाही है। दोनों पर अर्थदंड अधिरोपित कर मुख्यालय से संस्तुति की गई है। -अमित मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड