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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 18, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कानपुर पुलिस को भी सताता है डर, कमिश्नरेट दफ्तर में जगह-जगह पेड़ों पर लगाए गए लंगूर के पोस्टर

By Abhishek AgnihotriEdited By:
Published: Fri, 18 Nov 2022 05:56 PM (IST)

कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय में जगह जगह लंगूर के पोस्टर लगाए गए हैं यहां पर पुलिस कर्मी बंदरों के आतंक ...और पढ़ें

कानपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में लगाया गया लंगूर का पोस्टर।
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में लगाया गया लंगूर का पोस्टर।

कानपुर, जागरण संवाददाता। जनता को सुरक्षा का भरोसा देने वाली कानपुर पुलिस भी किसी से डरने लगी है, आलम यह है कि कमिश्नरेट दफ्तर में कर्मचारी खुले में बाहर निकलने से कतराते हैं। इस डर से बचने और अपनी रक्षा के लिए दफ्तर में जगह जगह लंगूर के पोस्टर लगवाए गए हैं। क्योंकि पुलिस अब बंदरों से हार मान चुकी है और उनसे बचने के लिए लंगूर की तस्वीर का सहारा लेने को मजबूर है। पुलिस का यह अनोखा तरीका कार्यालय में बंदरों की धमाचौकड़ी को कम कर पाता या नहीं, अब यह तो आगे ही पता चलेगा।

कानपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय में बंदरों की दहशत कायम है। यहां करीब दो दर्जन बंदरों का झुंड सुबह होते ही धमाचौकड़ी करना शुरू कर देता है। कार्यालय में बाहर गमले और गाड़ियों में तोड़फोड़ करना रोज का काम है और मौका पाकर किसी भी कमरे को खाली देखकर घुस जाते हैं।

कार्यालय के कमरे में रखे दस्तावेज फाड़ देना,  दोपहिया वाहनों का सीट कवर फाड़ना उनका रोज का काम हो गया है। पुलिस कार्यालय आने वाले फरियादियों के हाथ से भी बंदर सामान छीनकर भाग जाते हैं। कोई पुलिस कर्मी भगाने का प्रयास करता है तो झुंड बनाकर हमलावर हो जाते हैं। इससे पुलिस वालों में भी दहशत का आलम बना है। 

बताते हैं कि पिछले दिनों नया पुलिस आयुक्त कार्यालय बनने पर सौंदर्यीकरण के लिए लगाई महंगी लाइट भी चंद घंटों बाद ही बंदरों ने उखाड़ फेंकी थी। सौंदर्यीकरण के लिए लगाए जाने वाले फूल के पौधों को भी बंदर नष्ट कर देते हैं। ऐसे में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए कमिश्नरेट पुलिस ने अब लंगूर की फोटो का सहारा लिया है।

ऐसा माना जाता है कि काले मुंह वाले लंगूर से बंदर डरते हैं और पास नहीं आते हैं। इस सोच के चलते अब पुलिस आयुक्त कार्यालय में लंगूर के पोस्टर जगह जगह पेड़ों पर लगाए गए हैं और दीवारों पर भी चस्पा किए हैं। अब देखना यह है कि कमिश्नरेट पुलिस की यह तरकीब शैतान बंदरों पर असर कर पाती है या नहीं। 

पुलिस आयुक्त कार्यालय में बंदरों की धमाचौकड़ी काफी बढ़ गई थी। बंदरों को रोकने के लिए ये प्रयोग किया गया है। - आनंद प्रकाश तिवारी, संयुक्त पुलिस आयुक्त