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UP Police का गजब कारनामा! कानपुर में बिना FIR 31 साल तक फैक्ट्रीकर्मी को बना रखा हिस्ट्रीशीटर, पीएम-सीएम से लगाई गुहार

Published: Tue, 29 Sep 2026 07:45 PM (IST)

कानपुर के एक फैक्ट्रीकर्मी विनोद कुमार द्विवेदी को बिना किसी मुकदमे के 31 साल तक हिस्ट्रीशीटर का दाग झेलना पड़ा। ...और पढ़ें

बिना मुकदमे के 31 साल तक हिस्ट्रीशीटर बने रहे विनोद कुमार द्विवेदी। स्वयं

बिना मुकदमे के 31 साल तक हिस्ट्रीशीटर बने रहे विनोद कुमार द्विवेदी। स्वयं

HighLights

  1. पीड़ित ने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को भेजा था पत्र, पूर्व में आत्मदाह की भी दे चुके चेतावनी

  2. 1995 में ककवन पुलिस ने खाेली थी हिस्ट्रीशीट, पहले रसूलाबाद, फिर बर्रा थाने हुई थी ट्रांसफर

जागरण संवाददाता, कानपुर। यूपी पुलिस का एक गजब का कारनामा सामने आया है। बिना मुकदमे के 31 साल से फैक्ट्रीकर्मी हिस्ट्रीशीटर है। सीएम से लेकर पीएम और राष्ट्रपति तक को पत्र भेजकर गुहार लगाई। अब

इस दाग को मिटाने के लिए उन्होंने जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त से लेकर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी पत्र भेजा। यहां तक उन्होंने आत्मदाह करने की भी चेतावनी दे दी थी। तक जाकर हिस्ट्रीशीटर होने का दाग लेकर घूम रहे बर्रा के फैक्ट्रीकर्मी विनोद कुमार द्विवेदी का दाग अब धुला है।

मूलरूप से कानपुर देहात के रसूलाबाद थाना क्षेत्र के इकघरा निवासी फैक्ट्री कर्मी विनोद द्विवेदी उर्फ प्रमोद ने बताया कि पहले उनका गांव बिल्हौर तहसील के ककवन थाना क्षेत्र में आता था। पिता गंगाराम साधन सहकारी समिति में प्रशासक थे।

दो फरवरी 1984 की रात ककवन बाबापुर के कनपटियापुर गांव निवासी बाबूलाल के घर में घुसकर लूटपाट और हत्या के मामले में दिवंगत बाबूलाल की पत्नी ने शशिकांत, पप्पू उर्फ महेश, उनके पिता गंगाराम और उन्हें नामजद मुकदमा कराया था, जिस समय मुकदमा हुआ वह 16 साल के थे, लेकिन जांच के दौरान पुलिस ने जब दिवंगत की पत्नी से शिनाख्त परेड कराई तो उन्होंने उन्हें नहीं पहचाना।

इसी आधार पर पुलिस ने वर्ष 1987 में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की तो उनका (विनोद) का नाम नहीं था। बाद में कोर्ट ने सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया था। इसके बावजूद ककवन पुलिस ने उनकी 1995 में ए श्रेणी में हिस्ट्रीशीट खोल दी थी, जिसे पहले रसूलाबाद ट्रांसफर किया गया, लेकिन जब वे लोग बर्रा छह के गुंजन विहार में रहने आ गए तो हिस्ट्रीशीट बर्रा थाने ट्रांसफर हो गई।

विनोद ने बताया कि तब से उनके घर पुलिस निगरानी करने आती और परिवार व रिश्तेदारों में बेइज्जती होती थी। धीरे-धीरे रिश्तेदारों ने भी घर आना कम कर दिया। कई पुलिसकर्मियों से जानकारी की तो वे बोले कि हिस्ट्रीशीट का खाका तभी नष्ट होता है जब वह इंसान खत्म होता है। इसके बाद उन्होंने थाने से लेकर पुलिस अधिकारियों तक गुहार लगाई।

इसके बाद जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री, मानवाधिकारी, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति तक पत्र भेजा। आत्मदाह की चेतावनी दी। इसके बाद 26 जनवरी 2022 को चेतावनी दी थी। तब तत्कालीन डीसीपी दक्षिण रवीना त्यागी ने निगरानी बंद कराई थी, लेकिन हिस्ट्रीशीटर का दाग नहीं धुला, पर वह हिम्मत नहीं हारे और मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को पत्राचार करते रहे।

अगस्त 2026 को उन्हें बर्रा थाने बुलाया गया और उन्हें आश्वस्त किया गया कि अब बर्रा थाने से वह हिस्ट्रीशीटर नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने राहत महसूस की और परिवार व रिश्तेदारों में मिठाइयां बांट अपने ऊपर लगे दाग के धुलने की जानकारी दी। बर्रा थाना प्रभारी क्ष्रितिज सिंह ने बताया कि विनोद कुमार द्विवेदी की उनके थाने में अब हिस्ट्रीशीट नहीं है।

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