UP में राज्य अनुदानित मदरसों में उगाही का खेल, सरकार उठा रही शिक्षा का खर्च फिर भी चंदा वसूली
उत्तर प्रदेश के राज्य अनुदानित मदरसों में शिक्षा का खर्च सरकार उठाने के बावजूद चंदा उगाही का खेल चल रहा ...और पढ़ें

यह तस्वीर प्रतीकात्मक है।
HighLights
राज्य अनुदानित मदरसों में सरकारी खर्च के बावजूद चंदा उगाही जारी
छात्रों की पढ़ाई, रहने-खाने के नाम पर हो रही है वसूली
सरकार मदरसा संचालकों से जवाब तलब कर कार्रवाई करेगी
मोहम्मद दाऊद खान, कानपुर। राज्य अनुदानित मदरसों में चंदा उगाही का खेल चल रहा है। इन मदरसों में फितरा व जकात व चंदे के लिए होड़ लगी रहती है। यह वसूली छात्रों की पढ़ाई के नाम पर की जाती हैं। मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई सहित, उनके रहने व खाने के खर्च के रूप में यह रकम वसूली जाती है। अब सरकार इन मदरसों में पढाई के नाम पर होने वाली चंदा उगाही पर लगाम लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए मदरसा संचालकों से जवाब तलब किया जाएगा। उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से संचालित मान्यता प्राप्त मदरसों में राज्य अनुदानित मदरसे भी हैं। इनमें शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षकों को राज्य सरकार की ओर से वेतन मिलता है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित होने वाले विद्यालयों की तरह ही बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से मदरसों के छात्रों को निश्शुल्क किताबें भी दी जाती हैं। सरकार मदरसों में पढाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद यहां चंदाखोरी भी धड़ल्ले से हो रही है।
रमजान में निकलने वाले फितरा व जकात (संपन्न मुस्लिमों की ओर से गरीबों व जरूरतमंदों को दान की जाने वाली धनराशि) व बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी के बाद निकलने वाले कच्चे चमड़े को बेचकर होने वाली आय पर भी मदरसा संचालकों की नजर रहती है। इसके लिए शिक्षकों की ड्यूटी भी लगाई जाती है। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से जिले में 152 मदरसों को मान्यता मिली हुई है। इनमें 24 मदरसे राज्य अनुदानित हैं।
राज्य अनुदानित मदरसों में शिक्षकों के वेतन से लेकर अन्य मदों में होने वाले खर्च का वहन सरकार करती है। इन मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षकों की तरह ही वेतन मिलता है। रमजान हो या बकरीद गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की तरह इन मदरसं के मदरसा संचालक भी चंदा, फितरा व जकात की धनराशि हासिल करने के लिए सक्रिय हो जाते हैं। वे मदरसों के बाहर धनराशि एकत्र करने के लिए शिविर लगाने के साथ शिक्षकों को भी इस कार्य में लगाया जाता है। वे फितरा व जकात देने वाले मुस्लिमों से मिलकर धनराशि एकत्र करते हैं।
इस मद में मिलने वाली धनराशि को मदरसा छात्रों की पढाई के साथ मदरसों में उनके रहने व खान-पान पर खर्च दिखाया जाता है। सवाल यह है कि जब सरकार इन मदरसों के संचालन, शिक्षकों के वेतन का खर्च स्वयं दे रही है तो आखिर चंदा वसूली किस वजह से की जा रही है। इसकी शिकायत अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय से की गई है। इसके बाद मदरसों में इस तरह के कार्यों पर नकेल लगाने की तैयारी की जा रही है।
होस्टल व खान-पान का दिखाया जाता खर्च
मदरसों में शहर के अतिरिक्त दूसरे शहरों व बिहार, बंगाल आदि दूसरे प्रदेशों से आने वाले छात्र भी पढ़ते हैं। मदरसों में इनके रहने व खान-पान की व्यवस्था की जाती है। इन छात्रों के रहन-सहन व खान-पान का खर्च दिखाने के साथ ही धार्मिक शिक्षा के नाम पर फितरा, जकात व चंदा की धनराशि मांगी जाती है।
जिले में यह है मदरसों की स्थिति
- राज्य अनुदानित मदरसों की संख्या : 24
- शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की संख्या: 338
- पंजीकृत छात्र-छात्राओं की संख्या: 9409
- मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या: 152
- पंजीकृत छात्र-छात्राओं की संख्या: 19787
निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण की ओर से राज्य अनुदानित मदरसों में चंदा, फितरा व जकात की जानकारी के लिए अभी कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। निदेशालय से जो भी निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार कार्रवाई का जाएगी। राज्य अनुदानित मदरसों से जवाब तलब किया जाएगा। उनसे चंदे का लेखा-जोखा मांगा जाएगा।
-अमित प्रताप सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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