UPSIDA Chief GM Forcibly Retired: अरुण मिश्रा का विवादों से है पुराना नाता, पहले भी कई बार हो चुका निलंबित
अरुण मिश्रा पर विभिन्न लोगों के नाम से फर्जी बैंक खाते खोलने और उसका संचालन करने का आरोप था। सीबीआइ ने अरुण को उसे 2011 में देहरादून से गिरफ्तार किया था। बाद में अरुण को जेल में होने की जानकारी छिपाने के आरोप में निलंबित किया गया था।

कानपुर, जेएनएन। उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के निलंबित प्रधान महाप्रबंधक अरुण मिश्रा का दामन दागदार रहा है। अरुण मिश्रा इससे पहले कई बार निलंबित हो चुका है और उसे हाईस्कूल की फर्जी मार्कशीट के मामले में अगस्त 2014 में हाईकोर्ट के आदेश पर बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी। इसलिए बहाल कर दिया गया था। अरुण मिश्रा पर गाजियाबाद जिले की ट्रोनिका सीटी औद्योगिक क्षेत्र में मनमाने तरीके से ठेकेदारों को 22 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आरोप लगा था। तब अरुण पर दो मुकदमे दर्ज किए थे बाद में उसे कोर्ट से राहत मिली। इस मामले में भी अरुण निलंबित किया गया था। बता दें कि अरुण मिश्रा 1986 में सहायक अभियंता के पद पर तैनात हुआ था। 2003 में मुख्य अभियंता के पद पर प्रोन्नति मिली थी।
2011 में सीबीआइ ने किया था गिरफ्तार: अरुण मिश्रा पर विभिन्न लोगों के नाम से फर्जी बैंक खाते खोलने और उसका संचालन करने का आरोप था। सीबीआइ ने अरुण को उसे 2011 में देहरादून से गिरफ्तार किया था। बाद में अरुण को जेल में होने की जानकारी छिपाने के आरोप में निलंबित किया गया था। आय से अधिक संपत्ति के मामले और मनी लांड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी अरुण पर कार्रवाई कर चुका है और संपत्तियां जब्त कर चुका है। इन मामलों में कोर्ट से अरुण को राहत मिली। संपत्तियां भी अरुण के पक्ष में रिलीज करने का आदेश हुआ।
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2018 में भी निलंबित किया गया था: अरुण मिश्रा को तत्कालीन प्रबंध निदेशक रणवीर प्रसाद ने मनमाने तरीके से भू उपयोग परिवर्तन करने के मामले में निलंबित किया था। अरुण पर गौतमबुद्ध नगर के सूरजपुर, गाजियाबाद के साहिबाबाद और लोनी रोड औद्योगिक क्षेत्र में मनमाने तरीके से भूखंडों का भू उपयोग परिवर्तन करने का आरोप था जांच में आरोप सही पाए गए थे। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर बहाल किया गया। अक्टूबर 2020 में गिरफ्तारी से पहले तक अरुण मिश्रा को बिना काम के ही वेतन दिया जा रहा था।
बिना भू उपयोग परिवर्तन के बना दिया था टाउनशिप का प्लान: अरुण मिश्रा पर मनमाने ढंग से कार्य करने के भी आरोप खूब लगे। अरुण ने चार साल पहले गाजियाबाद की ट्रोनिका सिटी में औद्योगिक भूखंड का भू उपयोग परिवर्तन किए बिना ही इंटीग्रेटेड टाउनशिप का प्लान बना दिया था। अरुण पर आरोप थे कि उसने प्रोजेक्ट का प्लान बनाने वाले कंसल्टेंट को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया था।
इस नियम के तहत किया जबरिया रिटायर: फाइनेंशियल हैंडबुक खंड 2 भाग 2 से चार तक दिए गए अद्यावधिक संशोधित फंडामेंटल रूल 56 के खंड ( सी) के अधीन अधिकारों का प्रयोग करते हुए नियुक्ति प्राधिकारी ने अरुण को बर्खास्त किया है। अरुण को तीन माह का वेतन भी दिया जाएगा।
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