एसआइटी अध्यक्ष मुख्यमंत्री से मिले, जल्द शुरू होगी गिरफ्तारी

जासं, कानपुर: पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों की जांच बीते दो साल से अधिक समय से विशेष जांच दल (एसआइटी) सिख विरोधी दंगा कर रही है। 27 मई को एसआइटी के तीन साल पूरे हो जाएंगे। हालांकि अब तक एक भी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एसआइटी अध्यक्ष मुख्यमंत्री से मिले और अब तक की कार्रवाई से उन्हें अवगत कराया। जल्द ही एसआइटी अब गिरफ्तारी शुरू करेगी। पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के बाद शहर में 1984 में दंगे हुए थे। जिसमें 127 लोग मारे गए और घरों में लूटपाट व आगजनी की गई थी। मामले में नौबस्ता, बर्रा, काकादेव, गोविंद नगर, पनकी, अर्मापुर, फजलगंज, नजीराबाद, कल्याणपुर व चकेरी आदि थानों में गंभीर मामलों के 40 मुकदमे दर्ज हुए थे, लेकिन उस दौरान पुलिस ने 11 मामलों में चार्जशीट और 29 मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। अंतिम रिपोर्ट वाले मामलों की पुर्नजांच के लिए वर्ष 2018 में प्रदेश सरकार ने स्पेशल इंवेस्टीगेटिव टीम (एसआइटी) का गठन किया था। जिसका अध्यक्ष रिटायर्ड डीजी अतुल कुमार को बनाया गया था। अब तक करीब 14 मामलों में सुबूत व गवाह जुटाए जा चुके हैं। साथ ही टीम में सौ से ज्यादा दंगाइयों को चिन्हित भी कर लिया है, लेकिन अब तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। डीआइजी सिख विरोधी दंगा बालेंदु भूषण ने बताया कि जल्द गिरफ्तारियां की जाएंगी। फिलहाल एसआइटी के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।

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