Shobhan Sarkar: संत यूं ही नहीं कहलाए शोभन सरकार, भक्तों के लिए हठधर्मिता को बनाया हथियार
Shobhan Sarkar death ब्रह्मलीन श्री 1008 स्वामी विरक्तानंद जी महाराज ने उन्नाव के बक्सर फतेहपुर चित्रकूट और औरैया में भी मंदिर पुल और झील का निर्माण कराया।
कानपुर, जेएनएन। शोभन आश्रम में ब्रह्मलीन हुए श्री 1008 स्वामी विरक्तानंद जी महाराज को कानपुर ही नहीं आसपास के जिलों में शोभन सरकार के नाम से भक्त पुकारते थे। उनके तमाम भक्तों ने अपने वाहनों पर शोभन सरकार भी लिखवा रखा है। भक्त उन्हें सरकार का रूप मानते रहे तो स्वामी जी ने भी भक्तों के लिए अपनी हठधर्मिता को हथियार बनाया था। शोभन ही नहीं बल्कि उन्नाव, फतेहपुर और चित्रकूट में स्वामी जी ने न केवल मंदिरों की स्थापना की बल्कि समाज के उत्थान के लिए अनेकों कार्य किए।
पब्लिक पंप कैनाल से दूर किया जल संकट
कानपुर नगर से करीब 35 किमी. दूर टाऊन एरिया शिवली से पांडु नदी बहती है। करीब 15 साल पहले तक हालात यह थे तटवर्ती गांवों में नदी का पानी भी काम नहीं आ रहा था। कारण था कि नदी की गहराई अधिक थी और किसानों के खेत ऊंचाई पर थे। किनारे स्थित खेतों के किसान तो पंपिंग सेट लगाकर सिंचाई कर लेते थे, पर दूरस्थ गांवों के लोग बारिश पर ही निर्भर थे। पानी की कमी से धीरे-धीरे खेत बंजर होते जा रहे थे। शोभन सरकार से समस्या देखी नहीं गई और उनके भगीरथ प्रयास से क्षेत्र में मानों गंगा ही उतर आईं। उन्होंने पब्लिक कैनाल परियोजना को साकार करके बंजर भूमि को नवजीवन दिया।
पब्लिक कैनाल का निर्माण शुरू कराया, यह देख आसपास के गांवों के ग्रामीण भी श्रमदान के लिए साथ आने लगे। बिनी किसी सरकारी मदद से करीब 30 ट्रैक्टर, दो जेसीबी व 250 मजदूर काम पर लग गए। तीन माह में ही एक पब्लिक कैनाल व तीन झीलों का निर्माण हो गया। कैनाल में पानी की कमी न रहे इसके लिए शोभन सरकार के निर्देश पर तली से 10 फीट और मुहाने से 15 फीट चौड़ाई वाली नहर के लिए पांडु नदी में लगाए पंपिग सेट से ढाई किमी पर पांच मीटर गहरी झील बनाई गई।
शोभन गांव निवासी मुनीम शुक्ला व बैरी दरियाव के रामजी व शोभन के मनोज बताते हैं कि कैनाल निर्माण में न तो इंजीनियर और न ही किसी विशेषज्ञ की मदद ली गई। कैनाल के लिए शोभन सरकार ने प्रदेश सरकार को विद्युत कनेक्शन के लिए कई प्रस्ताव भेजे। काफी समय तक सुनवाई न हुई तो उन्होंने अपनी हठधर्मिता का पैगाम जैसे भेजा तो अफसर और नेता दौड़े आए। तत्कालीन सरकार के वरिष्ठ नेताओं के अनुमोदन में पर अफसरों ने तत्काल पंप कैनाल के लिए विद्युत कनेक्शन कराया। कैनाल शुरू हो जाने के बाद 40 से अधिक गांवों को राहत मिली। आज शोभन, बैरी दरियाव, जुगराजपुर, कल्यानपुर, हृदयपुर, रुदापुर, असई, अनूपपुर, बैरी बस्ता, सिंहपुर, ललऊपुरवा, ढाकनपुरवा, गंभीरपुर, पर्वतपुरवा व दुंदपुर समेत 40 से अधिक गांवों के किसानों को हर समय पानी उपलब्ध रहता है।
गौरी गांव में पुल बनवाया
शोभन आश्रम से करीब दो किमी स्थित पांडु नदी को पार करने के लिए नौका ही साधन थी। उस पार से ओर इस पार से आवागमन में लोगों को परेशानी हो रही थी। शोभन सरकार ने लोगों की समस्या को समझा और श्रमदान से नदी पर पुल बनाने की ठान ली। पुल का निर्माण शुरू हुआ तो अफसरों और नेताओं ने संज्ञान लिया। शोभन सरकार ने श्रमदान से पांडु नदी पर गौरी पुल का निर्माण कराया।
स्कूल, कॉलेज और अस्पताल खुलवाया
शोभन सरकार ने आश्रम संभालने के बाद सबसे पहले शिक्षा का अंधियारा दूर करने की ठानी। पांडु नदी किनारे के गांवों में बच्चों की शिक्षा को जरूरी बताया। शोभन गांव में जूनियर और इंटर कॉलेज बनवाया, जहां आज हजारों बच्चे शिक्षित हो रहे हैं। इसके साथ आश्रम से संभरपुर रोड पर आरोग्य धाम अस्पताल बनवाया, जहां अपने एक शिष्य डॉक्टर को नियमित बैठने का निर्देश दिया। वह काफी दिनों तक अस्पताल की बागडोर संभालते रहे। बाद में उनका निधन होने पर दूसरे शिष्य डॉक्टर अब अस्पताल को संचालित कर रहे हैं।
शोभन सरकार की हठ के आगे झुकी सपा सरकार
संत शोभन सरकार के हठ के आगे तत्कालीन सपा सरकार को झुकना पड़ा था और उन्नाव के बक्सर में गंगा पुल बनवाने में सहायक होना पड़ा था। संतशोभन सरकार ने बक्सर में गोखला कुटी के नाम से आश्रम बनवाया था। कहते हैं यह आश्रम उनके गुरु जी का है। कुछ भक्तों ने गंगा पर पुल न होने की समस्या बताई तो उन्होंने सपा सरकार को प्रस्ताव भेजा। सुनवाई न होने से आहत शोभन सरकार ने खुद पुल बनवाने का निर्णय लिया। निर्माण सामग्री इकट्ठा की और 2006 में पुल निर्माण का ऐलान कर दिया।
संत के हठ के आगे सरकार हिल गई और लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने आश्रम पहुंचकर भरोसा दिया कि पुल सरकार बनवाएगी। शोभन सरकार ने उनसे कह दिया था कि निर्माण शुरू हो चुका है, सहायक बनना हो तो शिलान्यास करो। तब शिवपाल ने शिलान्यास किया। 34 करोड़ 60 लाख की लागत से बने 900 मीटर लंबे पुल से बीघापुर क्षेत्र के सो से अधिक गांवों के विकास का रास्ता खुल गया। उन्होंने चंडिका देवी धाम का भी जीर्णोद्धार कराकर उसे भव्यता प्रदान की और पास ही पवन तनय मंदिर का भी निर्माण कराया।
फतेहपुर के दूधीकगार में बरसती थी कृपा
संतश्री शोभन सरकार का फतेहपुर में गंगा किनारे स्थित गुरु के आश्रम दूधीकगार से बेहद लगाव था। चौडगरा के समीप बक्सर पुल के इस पार गंगा किनारे स्थित दूधीकगार गांव गुरुओं की तपोस्थली है और गुरु समाधिस्थ हैं। उन्होंने आश्रम में गुरु स्वामी परमानंद जी महाराज अौर उनके गुरु स्वामी सतसंग की मूर्ति स्थापित कराई और हनुमानजी का भव्य मंदिर बनवाया। सदगुरु आश्रम जूनियर हाईस्कूल की स्थापना कराकर निश्शुल्क शिक्षा की व्यवस्था कराई। बक्सर में पुल बनने के बाद उन्नाव का बक्सर इलाका फतेहपुर से हाईवे से सीधे जुड़ गया। संतश्री ने दूधीकगार में झील का निर्माण कराया। प्रत्येक वर्ष यहां कार्तिक पूर्णिमा से आठ दिवसीय धार्मिक मेला लगता है और अटूट भंडारे में हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।
चित्रकूट में दिया सामूहिक खेती का मंत्र
बहुत कम ही लोग जानते हैं कि शोभन सरकार चित्रकूट में भी रहे। एक समय में वह शोभन आश्रम से चित्रकूट आकर रम गए थे लेकिन, बाद में उनके शिष्य प्रतिदिन उन्हें मनाने आने लगे। इसपर उन्होंने यह कह कर उन्हें समझाया कि कुछ काम अधूरे हैं, जिन्हें पूरा करके लौट आएंगे। इस दरमियान उन्होंने यहां किसानों को जैविक विधि से सामूहिक खेती का मंत्र दिया था। वह कामदगिरि मंदिर ट्रस्ट के मार्गदर्शक मंडल में भी रहे।
उन्होंने 2001 में मानिकपुर के ऐंचवारा में करीब तीन एकड़ में आश्रम बनवाया था और उसका संचालन ओम बाबा को सौंपा था। वह बताते हैं कि तीन दिन के प्रवास में संतश्री ने गोशाला में एक हजार गोवंश रखने के साथ गांव और गाय पर अभियान चलाया था। गोशाला में पंचगव्य उत्पाद बनते हैं। वेद पाठशाला में करीब तीन सौ छात्र अध्ययनरत हैं।
औरैया में बनवाया था रघुनाथ मंदिर
शोभन सरकार के भक्त औरैया में भी है। शोभन सरकार ने साल 1991 में भाग्यनगर ब्लॉक के इटहा गांव के पास मंदिर की आधार शिला रखी थी। तीन एकड़ में बने मंदिर का नाम रघुनाथ मंदिर शोभन सरकार रखा गया था। आसपास के गांवों के लोग मंदिर निर्माण में चंदा देने पहुंचे तो शोभन सरकार ने उन्हें मना कर दिया था।
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