उन्नाव में मौत बनकर दौड़ रही थी बच्चों से भरी बस.... बाइक सवार ने 'देवदूत' बनकर बचाई 49 मासूमों की जान
उन्नाव में बच्चों से भरी एक टूरिस्ट बस में आग लग गई, लेकिन एक बाइक सवार की सूझबूझ से 49 ...और पढ़ें

गदन खेड़ा चौराहा पर बस में आग लगने की घटना के बाद जांच करते सीएफओ अनूप सिंह व एआरटीओ प्रवर्तन संजीव कुमार सिंह। जागरण
HighLights
बाइक सवार ने बस में आग लगने की सूचना दी
49 बच्चों सहित सभी 54 लोग सुरक्षित बचाए गए
कानपुर में हजारों अनफिट वाहन सड़कों पर दौड़ रहे
जागरण संवाददाता, कानपुर। आनंदी वाटर पार्क सोहरामऊ से मस्ती कर 49 बच्चों समेत 54 लोग टूरिस्ट बस से गुरु नानक मार्डन स्कूल लौट रहे थे। इनके लिए वह बाइक सवार 'देवदूत' ही साबित हुआ और बस में सवार सभी लोगों की जान बच गई।
फिर दूसरी बस से रात 10 बजे बच्चे सीधे स्कूल पहुंचे थे, जहां अभिभावक पहले से ही बेसब्री से अपने 'लाल' के आने का इंतजार कर रहे थे। सुरक्षित घर पहुंचने के बाद भी इस घटना से डरे-सहमे बच्चों और शिक्षकों की पूरी रात नींद उड़ी रही। वैसे, ये बस संगम ट्रैवल्स से 15,000 रुपये की बुकिंग पर थी।
बच्चों को वाटर पार्क से लेकर बस से लौट रहे गुरु नानक मार्डन स्कूल के एकेडमिक कोआर्डिनेटर विवेक अवस्थी बताते हैं कि गनीमत रही कि जब घटना हुई तो अंधेरा नहीं था, शाम के सात-सवा सात ही बजे थे। यदि कहीं रात होती तो बड़ी अनहोनी हो जाती।
खैर, वह बाइक सवार उन सभी के लिए देवदूत बन गया, जिसने बाइक की स्पीड बढ़ाई और बस के विपरीत साइड में आकर तेज आवाज देकर उन्हें बस के पिछले पहिया में आग लग जाना बताया। विवेक ने बताया कि उन्होंने बिना देर किए बस रोकवाई, चूंकि चौराहे के पास से बस निकलकर अंडरपास पर पहुंची थी, इसलिए उसकी गति भी कम थी।
बस के रुकते ही सभी बच्चों को उतारकर सुरक्षित कर लिया गया था। चालक बस से उतरकर पिछले पहिया पर मिट्टी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया, पर वह सफल नहीं हुआ। तुरंत मौके पर पुलिस भी आ गई थी और फोन करने के 15-20 मिनट में ही फायरब्रिगेड आ गई थी।
सात-आठ मिनट में आग पर काबू पा लिया था। वहीं, इस बस में सवार कल्याणपुर निवासी कक्षा-नौ के छात्र यूनिट कुमार ने बताया कि जब वह लोग बस से उतरकर दूर खड़े हो गए थे तो उसी पल एक बड़ा धमाका हुआ और पूरी बस में आग लग गई थी।
छात्रों के साथ कई छात्राएं भी वाटर पार्क में पिकनिक मनाकर लौट रही थीं। छात्रों ने बताया कि खबर पाकर स्कूल प्रबंधन ने उन लोगों को वापस लाने के लिए दूसरी बस भेजी थी। फिर वह लोग सरैंया रेलवे क्रासिंग पर आधे घंटे जाम में फंस गए थे। रात 10 बजे स्कूल पहुंचे थे, जहां उनके अभिभावक पहले से आ गए थे।
घटना के प्रत्यक्षदर्शी छात्र और शिक्षकों ने बताया कि इस घटना के कारण पूरी रात उन लोगों को नींद नहीं आई, जरा सा आंख बंद कर सोने का प्रयास करते तो वही दृश्य आंखों के सामने आ जा रहा था।
आठ हजार रुपये के लंबित हैं पांच चालान
बस (यूपी-78-एचटी-3367) माडल टाउन पांडु नगर निवासी हर्षदीप मेहरोत्रा के नाम से आरटीओ में पंजीकृत है। इस पर आठ हजार रुपये के पांच चालान लंबित हैं। 24 जुलाई को ही पर्यटकों को लेकर गई इसी बस का अयोध्या में ओवरस्पीड में चालान हुआ था। इसके अलावा उस पर नो-पार्किंग और सीटबेल्ट के चालान हैं। इसे आल यूपी का परमिट है। 17 फरवरी को ही इसका फिटनेस हुआ था, जो 16 फरवरी 2027 तक मान्य है।
वाहनों की फिटनेस का खेल
वाहनों की फिटनेस में खेल होना ही हर्ष मेहरोत्रा की बस का फिटनेस एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। वैसे, भी आटोमैटेड टेस्टिंग स्टेशन में व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच के नाम पर बड़े खेल हो रहे हैं। वाहन मालिकों और विभिन्न ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों का आरोप है कि एटीएस सेंटरों पर जानबूझकर गाड़ियों को पहली बार में अनफिट (फेल) कर दिया जाता है।
फिटनेस के नाम पर 8-10 हजार रुपये की होती वसूली
इसके बाद, दलालों और एटीएस कर्मियों के संगठित सिंडिकेट के माध्यम से आठ से 10 हजार रुपये लेकर अगले ही दिन उसी अनफिट गाड़ी को आसानी से 'फिट' सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। वाहन स्वामियों से खुलेआम अवैध वसूली की शिकायतें आम हैं। उधर, परिवहन विभाग के अधिकारी आटोमैटेड टेस्टिंग सेंटरों को प्रावइेट बताकर कार्रवाई से पल्ला झाड़ते हैं।
बिना फिटनेस के दौड़ रहे 63,964 वाहन, इसमें 402 बसें भी ढो रहीं सवारी
सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों की फिटनेस के मामले में आरटीओ के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। आरटीओ में 20 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इसमें 63,964 वाहन अनफिट हैं और ये सभी सड़कों पर दौड़ रहे हैं। बड़ी बात ये है कि इन अनफिट वाहनों में 402 बसें भी हैं, जो सवारियों का परिवहन कर उनकी जान जोखिम में डाल रही हैं। इसके अलावा 36,978 ई-रिक्शा भी बिना फिटनेस के ही सवारी ढो रहे हैं। 630 मैक्सी कैब, 1818 मौटर कैब, 2858 थ्री-व्हीलर भी बिना फिटनेस के फर्राटा भर रहे हैं। एआरटीओ प्रवर्तन कहकशां खातून का कहना है कि जो भी वाहन बिना फिटनेस के हैं, उनको नाेटिस जारी की गई है। इसके अलावा ये वाहन यदि सड़क पर चलते मिलते हैं तो पकड़े जाने पर जुर्माना आदि की कार्रवाई भी की जा रही है।
आरटीओ से केवल ई-रिक्शा व बैटरी वाले वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र जारी होता है। अन्य सभी वाहनों की फिटनेस आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) से होती है। आनलाइन शुल्क जमा होने से वाहनों में तकनीकी जांच और फिर प्रमाण पत्र जारी करने आदि संपूर्ण कार्य एटीएस के अधिकार क्षेत्र में है। फिर भी सोहरामऊ वाटर पार्क में बच्चों को लेकर जाने वाली बस की फिटनेस के बारे में जांच की जाएगी।
- संतोष कुमार, संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक)-परिवहन विभाग
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