कानपुर की पराग डेयरी में दोबारा शुरू होगा उत्पादन, NDDB करेगा संचालन; एक हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
कानपुर का पराग डेयरी प्लांट अब फिर से दूध उत्पादों का उत्पादन और वितरण शुरू करेगा। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) 10 साल के लिए पराग के 4 लाख लीटर क्षमता वाले आधुनिक प्लांट का संचालन करेगा, जिसके लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। वित्तीय देनदारियों के कारण रुका यह प्लांट अब चालू होगा, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे और विभिन्न दुग्ध उत्पाद उपलब्ध होंगे।

जागरण संवाददाता, कानपुर। पराग डेयरी प्लांट निराला नगर में एक बार फिर से दूध से जुड़े उत्पादों का उत्पादन और वितरण शुरू हो जाएगा। लखनऊ में बुधवार को पराग दुग्ध डेयरी को लेकर एमओयू (समझौता ज्ञापन) हुआ है, जिसके तहत नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) 10 साल के लिए पराग के चार लाख लीटर क्षमता वाले आधुनिक प्लांट को चलाएगा। इसी हफ्ते से काम शुरू होने की संभावना है।
निराला नगर स्थित पराग डेयरी परिसर में 12 अप्रैल 2016 को आधुनिक प्लांट का शिलान्यास हुआ था। वर्ष 2020 में करीब 166 करोड़ की लागत से दो लाख लीटर दूध और दो लाख लीटर पाउडर बनाने की क्षमता का प्लांट बनकर तैयार हो गया था, लेकिन कर्मचारियों से लेकर विभिन्न विभागों की करीब 26 करोड़ रुपये की देनदारी की वजह से आधुनिक प्लांट चालू नहीं हो पा रहा था।
22 अगस्त 2023 को प्रदेश सरकार ने पराग प्लांट को 10 साल के लिए लीज पर देने की स्वीकृति दी थी। अक्टूबर 2023 में निजी क्षेत्र के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। मदर डेयरी और सुधा समेत कंपनियां आगे आईं, लेकिन पराग पर देनदारी ज्यादा होने से सभी ने कदम पीछे हटा लिए थे। बाद में शासन से पराग प्लांट को नेशनल डेयरी द्वारा संचालित कराने का फैसला लिया गया था, जिस पर बुधवार को मुहर भी लग गई।
पराग दुग्ध डेयरी के प्रबंधक सुनील कुमार वत्स ने बताया कि अब आधुनिक प्लांट को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड चलाएगा, जिसको लेकर बुधवार को एमओयू हो गया है। ट्रायल कब होगा, इसके बारे में अभी नहीं बता सकते हैं। आधुनिक प्लांट की क्षमता चार लाख लीटर है। प्लांट चलेगा तो दो लाख लीटर पाउडर दूध, डेढ़ लाख लीटर पैकेट और एक टन पनीर और आठ टन घी का उत्पादन होगा।
1962 में 56 एकड़ जमीन पर बना था प्लांट
निरालानगर की लगभग 56 एकड़ जमीन पर 1962 में पराग डेयरी का 50 हजार लीटर क्षमता का प्लांट बना था। उस समय कानपुर और कानपुर देहात से दूध आता था।
20 हजार लीटर की होती थी बिक्री
प्लांट से 20 हजार लीटर पराग के दूध की बिक्री होती थी, लेकिन धीरे-धीरे समय बीता और मशीनें खराब होने लगीं। वर्ष 2013 में प्लांट बंद कर दिया गया, जिससे पराग की बिक्री भी ठप हो गई थी। इसके बाद निजी कंपनियों ने अपने पैर पसार दिए थे।
एक हजार से अधिक को मिलेगा रोजगार प्लांट में दूध के साथ दही, मक्खन, दूध पाउडर, पनीर, मट्ठा आदि का उत्पादन होगा। डेयरी के संचालन से शहरवासियों को भी लाभ होगा। करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। पुराने कर्मचारियों को भी काम मिलने की उम्मीद है। बकायेदारों और कर्मचारियों की देनदारी पर मंथन हो रहा है।
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