नौकरी वाली दुल्हनियां सात फेरों के लिए कानपुर के युवाओं की ख्वाहिश, कुंडली से पहले मैच करा रहे आदत और विचार
कानपुर में युवा अब शादी से पहले कुंडली के बजाय आदतों और विचारों का मिलान करा रहे हैं। बढ़ती महंगाई ...और पढ़ें

HighLights
कानपुर में युवा महंगाई के चलते नौकरी वाली दुल्हनियां चाहते हैं
शादी से पहले आदतों और विचारों का मिलान प्री मैरिज काउंसिलिंग से
सखी वन स्टॉप सेंटर में विवाद रोकने को प्री मैरिज काउंसिलिंग
जागरण संवाददाता, कानपुर। किदवई नगर निवासी एक युवक और कैंट निवासी युवती की शादी तय हो गई है। युवक एक कंपनी में मैनेजर और युवती निजी विद्यालय में शिक्षिका है। दोनों ने शादी से पहले मैरिज काउंसिलिंग का फैसला लिया। गोल चौराहा स्थित सखी वन स्टाप सेंटर में दोनों ने काउंसिलिंग कराई।
काउंसिलिंग रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ही एक बात से सहमत थे कि महंगाई के इस दौर में पति और पत्नी दोनों का कमाना जरूरी है। युवती यह भी चाहती थी कि घर का कामकाज भी दोनों मिलकर संभाले। दोनों के आदत और विचार 76 प्रतिशत तक मैच करते मिले। युवती संयुक्त परिवार में रहना तो चाहती थी, लेकिन बिना रोक-टोक के।
सुखी दांपत्य जीवन के लिए महिला आयोग की पहल पर गोल चौराहा स्थित सखी वन स्टाप सेंटर में ‘तेरे-मेरे सपने’ के तहत सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शुक्रवार को प्री मैरिज काउंसिलिंग की जा रही है। इसकी शुरुआत 10 अगस्त से की गई थी। अभी तक 54 युवक-युवतियां प्री मैरिज काउंसिलिंग करा चुके हैं।
शादी का रिश्ता तय होने के बाद युवक और युवतियों की काउंसिलिंग कर उनकी आदतें और विचार जाने जाते हैं। इसके पीछे शादी के बाद दंपतियों में झगड़े रोकने की मंशा है। काउंसिलिंग के दौरान समझा जाता है कि युवक और युवती के विचार आपस में कितने मिल रहे हैं। किसे क्या पसंद हैं और किसे क्या नहीं। इसी आधार पर काउंसिलिंग रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है।
काउंसलर दिशा अरोड़ा का कहना है कि प्रश्नोत्तरी के आधार पर युवक और युवतियों से सवाल किए जाते हैं। इससे दोनों के आचार और विचार मिलने या न मिलने का निष्कर्ष निकालते हुए रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है। इसके बाद दोनों फैसले के लिए स्वतंत्र रहते हैं कि शादी करें या न करें।
अभी तक की गई काउंसिलिंग के निष्कर्ष यह है कि ज्यादातर युवाओं की पसंद नौकरी वाली दुल्हनियां है। उनका मानना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में पति और पत्नी के कंधे से कंधा मिलाकर घर और बाहर दोनों जगह काम करना होगा। तभी परिवार सुखी रह सकेगा।
पत्नी दफ्तर संभाले तो पति भी रसोई में उसका हाथ बटाएं। कुछ ही युवा ऐसे हैं जो चाहते हैं कि शादी होने के बाद उनकी पत्नी घर-गृहस्थी संभाले। दोनों संयुक्त परिवार में रहें। जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने बताया कि अभी सप्ताह में दो दिन काउंसिलिंग की जा रही है। इसे सप्ताह में चार या पांच दिन किया जाएगा।
