अंग्रेजो के जमाने का 122 साल पुराने मुकदमों का AI खोलेगा राज, नर्वल थाने में आज भी सुरक्षित हैं 1904 के दस्तावेज
नर्वल थाने के नवीन भवन का भूमि पूजन हुआ, जिससे पुलिस और जनता दोनों को सुविधा मिलेगी। साथ ही, 1904 ...और पढ़ें

नर्वल थाने में आजादी से पहले दर्ज मुकदमों का रिकार्ड जो कि उर्दू भाषा में अंकित है। जागरण
HighLights
नर्वल थाने के नवीन भवन का भूमि पूजन संपन्न
16.50 करोड़ की लागत से बनेगा नया थाना भवन
AI से 1904 के पुराने अभिलेखों का डिजिटलीकरण
संवाद सहयोगी, महाराजपुर(कानपुर)। कानपुर के नर्वल थाने में 1904 के मुकदमों समेत एक सदी से अधिक पुराने अभिलेख सुरक्षित हैं। आजादी से पहले के कई रिकॉर्ड अरबी और उर्दू में लिखे गए हैं। अब एआई की मदद से इनका हिंदी अनुवाद कर डिजिटल डाटा तैयार किया जाएगा, ताकि ऐतिहासिक दस्तावेजों को संरक्षित रखा जा सके।
नर्वल थाने को 120 से अधिक वर्षों के बाद नया भवन मिलेगा। पिछले 88 सालों से नर्वल थाना ब्रिटिश शासन काल में निर्मित तहसील की प्राचीन इमारत में चल रहा है। खास बात यह है कि नर्वल थाने में अपराध से जुड़े रजिस्टरों में 122 साल पुराने सन् 1904 में लिखे गए मुकदमे रिकार्ड में सुरक्षित हें।
इनमें एक घटना ऊंट से जुड़ी व दूसरी में एक मामले पर 100 रुपये जुर्माना लगाए जाने का उल्लेख है।आजादी से पहले के सभी मुकदमे अरबी व उर्दू भाषा में लिखे गए हैं।पुलिस आयुक्त ने एआइ की मदद से इनका हिंदी अनुवाद कराकर डिजिटल डाटा तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इन रिकार्डों को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा सके।
प्राचीन भवन में सन् 1939 से थाना संचालित किया जा रहा
अंग्रेजों के समय बनी तहसील के प्राचीन भवन में सन् 1939 से थाना संचालित किया जा रहा है। यह इमारत अब जर्जर व जीर्णशीर्ण हो चुकी है। सन् 1938 तक इसी इमारत में नर्वल तहसील अंग्रेजी हुकूमत के दौरान संचालित होती थी। 1939 से पहले नर्वल थाना कस्बा में ही स्थित नार्मल स्कूल ( वर्तमान जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान-डाइट) के पुराने भवन में चलता था। 1938 में नर्वल तहसील समाप्त कर दी गई थी और इसको सदर तहसील में समाहित कर दिया गया था। उसी के बाद थाना तहसील भवन में स्थानांतरित कर दिया गया था।
1904 में दर्ज मुकदमे का उल्लेख
बुधवार को पुलिस आयुक्त ने जब थाने के पुराने रिकार्ड देखे तो सन् 1904 में दर्ज मुकदमे का उल्लेख मिला। आजादी के पहले तक दर्ज मुकदमे अरबी और उर्दू भाषा में लिखे मिले। उन्होंने गूगल व एआइ की मदद से अनुवाद के द्वारा कुछ मुकदमों की जानकारी ली। सन् 1906 में दर्ज एक मुकदमे में ऊंट के साथ पकड़े गए आरोपित के पास से रुपयों की बरामदगी का जिक्र मिला।
100 रुपये का जुर्माने का मामला
1904 के एक मामले में 100 रुपये का जुर्माना व अदायगी न होने पर 20 दिनों के कारावास का उल्लेख मिला। इसी तरह 29 जुलाई 1934 को दर्ज मुकदमे में लाल रंग की स्याही का प्रयोग हुआ दिखा।1939 में थाने में 47 गांव आते थे। हालांकि कुछ जानकार इस इमारत को मुगलकालीन बताते हैं। उनके मुताबिक यह इमारत शेरशाह सूरी ने बनवाई थी।
थाने में आजादी से बहुत पहले के रिकार्ड मौजूद हैं। 1904 व 1906 में दर्ज मुकदमों का जिक्र रिकार्ड में है। आजादी के पहले के मुकदमे उर्दू भाषा में दर्ज हैं। इनका हिंदी अनुवाद कराया जाएगा। प्राचीन रिकार्डों का डिजिटलीकरण कराकर संरक्षित कराया जाएगा। ये रिकार्ड ऐतिहासिक अनमोल धरोहरें हैं। जिन्हे संरक्षित कराया जाएगा।
रघुबीर लाल, पुलिस आयुक्त
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