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लार से होगी हेपेटाइटिस की यूनिवर्सल स्क्रीनिंग, चंद सेकंड में मिलेगी रिपोर्ट

Published: Sun, 02 Nov 2025 06:31 PM (IST)

जीएसवीएम मेडिकल कालेज में यूपीएपीकान का 42वां अधिवेशन हुआ। इसमें SGPGI के निदेशक पद्मश्री डा. आरके धीमान ने कहा कि ...और पढ़ें

अधिवेशन में एसजीपीजीआई के निदेशक डा. आरके धीमान (मध्य में) साथ में (बाएं ) जीएसवीएम के प्राचार्य प्रो. संजय काला और आयोजन सचिव डा. एसके गौतम। जागरण

अधिवेशन में एसजीपीजीआई के निदेशक डा. आरके धीमान (मध्य में) साथ में (बाएं ) जीएसवीएम के प्राचार्य प्रो. संजय काला और आयोजन सचिव डा. एसके गौतम। जागरण

HighLights

  1. कानपुर के GSVM मेडिकल कालेज के आडिटोरियम में यूपीएपीकान का 42वां अधिवेशन

  2. SGPGI के निदेशक पद्मश्री डा. आरके धीमान ने कहा कि बच्चों में खान-पान और असंतुलित दिनचर्या से फैटी लिवर का खतरा बढ़ा

  3. हेपेटाइटिस बी संक्रमित मां की गर्भ में पल रहे शिशु का जीवन टेस्ट, ट्रीटमेंट व वैक्सीनेशन से बचाया जा रहा, नार्थ ईस्ट में सबसे ज्यादा मामले

जागरण संवाददाता, कानपुर। एड्स, मलेरिया व क्षय रोग की तरह ही अब हेपेटाइटिस ए, बी, सी और ई की चुनौती विकराल होती जा रही है। इसमें सबसे ज्यादा खतरा वायरल हेपेटाइटिस बी व सी से हो रहा है। जो संक्रमित सुई या सिरिंज के साझा करने, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित मां से बच्चे को जन्म के दौरान होता है। देश में करीब चार करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हैं। जबकि करीब 11 करोड़ भारतीयों की हेपेटाइटिस बी स्क्रीनिंग हो चुकी है। विकराल समस्या के रूप में सामने आ रही इस चुनौती से निपटने के लिए अब यूनिवर्सल स्क्रीनिंग की तैयारी चल रही है। जिसे विशेष प्रकार की किट की मदद से लार से किया जा सकेगा और चंद सेकंड में रिपोर्ट प्राप्त की जा सकेगी। यह बातें यूपीएपीकान के 42वें अधिवेशन में संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइ) के निदेशक पद्मश्री डा. आरके धीमान ने कही।

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के आडिटोरियम में बतौर मुख्य वक्ता पद्मश्री डा. धीमान ने कहा कि वायरल हेपेटाइटिस सी 70 प्रतिशत लिवर खराब होने के मामले में मुख्य समस्या बन रहा है। इसकी गंभीरता को देखते हुए वर्ष 2018 में भारत सरकार की ओर से हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम संचालित किया था। इसमें टेस्ट, ट्रीटमेंट व वैक्सीनेशन से जीवन रक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान हर हेपेटाइटिस बी व सी की जांच जरूर करानी चाहिए। संक्रमित गर्भवती से गर्भ में पल रहे शिशु में 20 प्रतिशत संक्रमण की संभावना रहती है। लेकिन सही समय पर जांच में पुष्टि होने के बाद छठवें महीने से विशेषज्ञ की देखरेख में उपचार से शिशु को संक्रमण से बचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि नार्थ ईस्ट व पंजाब में देश के सबसे ज्यादा हेपेटाइटिस के मामले सामने आते हैं। इसकी रोकथाम के लिए देश के 700 से ज्यादा डिस्ट्रिक में 1100 से ज्यादा सेंटर संचालित कर हेपेटाइटिस की रोकथाम की जा रही है। अधिवेशन के अंतिम दिन आयोजन अध्यक्ष डा. रिचा गिरि, सचिव डा. एसके गौतम, डा. सौरभ अग्रवाल, डा. जेएस कुशवाहा आदि उपस्थित रहे।

बच्चों में बढ़ा फैटी लिवर का खतरा, डा. गूगल की सलाह खतरनाक

डा. धीमान ने कहा कि असंतुलित हो रही दिनचर्या और खान-पान के कारण 35 से 40 आयुवर्ग में होने वाली फैटी लिवर की समस्या अब 12 से 15 वर्ष तक के बच्चों में हो रही है। फैटी लिवर आगे चलकर हृदय, लिवर और अन्य गंभीरता का कारण बनता रहा है। यूपीएपीआइ के चेयरमैन डा. संजय टंडन ने कहा कि डाक्टरों को जांच से ज्यादा मरीज की हिस्ट्री देखकर इलाज करना चाहिए। डा. गूगल की सलाह पर दवा लेना खतरनाक है। जो जानलेवा साबित हो सकता है। हृदय, लिवर, किडनी सहित क्रोनिक डिसीज में बिना डाक्टरी सलाह के इलाज गंभीरता को बढ़ा रहा है। वहीं, लखनऊ के डा. विकास अग्रवाल और डा. अनुपम ने कहा कि रूमेटाइड अर्थराइटिस स्माल ज्वांइट्स की बीमारी है। इसकी समय पर पहचान ही इसका इलाज है।

10 में एक व्यक्ति गुर्दे की समस्या से ग्रसित

लखनऊ के वरिष्ठ नेफ्रोलाजिस्ट डा. अमित गुप्ता ने कहा कि 10 में एक व्यक्ति को गुर्दे की समस्या है। डायबिटिक, मोटापा व बीपी की बीमारी में खुद से दवा खाने की आदत गुर्दे को नुकसान पहुंचा रही है। पिछले 10 वर्ष में 20 प्रतिशत गुर्दे मरीज बढ़े हैं। बिगड़ती दिनचर्या, खान-पान गुर्दे की बीमारी बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि कुपोषित बच्चों में गुर्दे का आकार छोटा होने से वे गुर्दा रोगी बन रहे हैं। डा. आनंद चेल्लपन ने कहा कि 30 से 40 प्रतिशत डायबिटिक रोगियों में किडनी फेल होने का खतरा बना रहता है। अगर किसी की यूरिन में झाग आ रहा है तो उसे तत्काल विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

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