कानपुर, जेएनएन। कई अंतरराष्ट्रीय मैचों के गवाह बन चुके ग्रीनपार्क स्टेडियम में जल्द ही खिलाड़ी लाल मिट्टी से बनी पिच पर मैच खेलते नजर जाएंगे। अभी तक यहां काली मिट्टी की पिच पर मैच होते हैं। अब स्टेडियम में लाल मिट्टी से चार पिच तैयार की जाएंगी। इसके बाद अधिकांश अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए मेजबानी की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।

दो तरह से मिलेगा फायदा

अधिकांश अंतरराष्ट्रीय मुकाबले अब लाल मिïट्टी की पिच पर ही खेले जाते हैं। ऐसे में लाल मिट्टी की पिच बनने से दो फायदे होंगे, पहला ये कि उप्र के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैचों के लिए तैयार हो सकेंगे। वहीं दूसरा लाभ ये होगा कि ग्र्रीनपार्क को भी अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच मिलने संभावना रहेगी। यही नहीं कमला क्लब में भी लाल मिट्टी की एक पिच तैयार होगी। यूपीसीए निदेशक राजीव शुक्ल ने इन पिचों को तैयार करने की अनुमति प्रदान कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक ग्रीनपार्क में लाल मिट्टी की जो चार पिच बनेंगी, इसमें दो मुख्य और दो अभ्यास के लिए होंगी। इसका प्रस्ताव बीसीसीआइ के कंसल्टेंट क्यूरेटर शिव कुमार ने दिया है।

लाल मिट्टी वाली पिच की खूबियां

आमतौर पर महाराष्ट्र के मैदानों में लाल मिट्टी से पिच बनती है। इस पिच पर थोड़ी सी घास रहती है जो गेंदबाजों के साथ बल्लेबाजों के लिए भी मददगार होती है। लाल मिट्टी की पिच का क्ले कंटेंट ज्यादा होता, जिससे दरार पडऩे की संभावना कम होती है, जिससे ये पिच स्पिन गेंदबाजों को ज्यादा मदद देती है। इस समय वनडे व टी-20 के ज्यादातर मुकाबले लाल मिट्टी की पिच पर ही होते हैं। देश मुख्यत: तीन तरह की पिच तैयार की जाती हैं, इसमें लाल, पीली व काली मिट्टी से बनी होती हैं। यूपीसीए निदेशक राजीव शुक्ला का कहना है कि खिलाडिय़ों के हित को देखते हुए ग्रीनपार्क में चार और कमला क्लब में एक लाल मिट्टी की पिच को हरी झंडी दे दी गई है। इससे उप्र की प्रतिभाएं और निखर कर सामने आएंगीं।

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Posted By: Abhishek