एनएचएआई कराएगा गंगा लिंक एक्सप्रेस वे का निर्माण, बदल सकता है डिजाइन का प्रारूप
कानपुर शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए फोरलेन गंगा लिंक एक्सप्रेस वे के प्रोजेक्ट पर मंडलायुक्त ने गंभीरता दिखाई है। उच्च स्तरीय समग्र विकास समिति के समन्वयक से वार्ता के बाद अपर सचिव ने एनएचएआइ से वित्त पोषण की सहमति दी है।

कानपुर, जेएनएन। शहर के भीतर का ट्रैफिक सुगम बनाने और जाम से मुक्ति दिलाने के लिए फोरलेन गंगा लिंक एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट पर अब काम शुरू हो सकेगा। ङ्क्षलक एक्सप्रेस वे का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) कराएगा। जल्द ही डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने को कंसलटेंट का चयन किया जाएगा। मंडलायुक्त डा. राजशेखर ने उच्च स्तरीय समग्र विकास समिति के समन्वयक नीरज श्रीवास्तव को राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय के अपर सचिव अमित घोष के पास भेजा। नीरज ने अपर सचिव के समक्ष प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन किया तो उन्होंने एनएचएआइ से ही इसके वित्त पोषण की सहमति दी।
जून 2018 में नीरज श्रीवास्तव ने तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव कुमार के समक्ष एक्सप्रेस वे का प्रस्ताव रखा था। मुख्य सचिव ने प्रोजेक्ट मंजूर कर दिया था और उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) को नोडल विभाग बनाते हुए डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन आज तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। दैनिक जागरण द्वारा प्रोजेक्ट पर काम न होने का मुद्दा उठाया तब मंडलायुक्त् ने संज्ञान लिया। पिछले हफ्ते कंसलटेंट नामित करने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन भविष्य की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मंडलायुक्त ने पिछले दिनों मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट की महत्त बताते हुए नीरज को राष्ट्रीय राजमार्ग एवं सड़क परिवहन मंत्रालय के अपर सचिव अमित घोष के पास भेजा।
दिल्ली में उनके कार्यालय में हुई बैठक में नीरज ने उन्हें प्रोजेक्ट के फायदे गिनाए और आइआइटी द्वारा पूर्व में किए गए सर्वे और प्राथमिक डिजाइन का प्रस्तुतीकरण किया। अपर सचिव ने प्रोजेक्ट को उपयुक्त माना और प्रोजेक्ट के वित्त पोषण पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य स्तर पर विभिन्न विभागों से एनओसी लेनी होगी। वह समिति को उपलब्ध करानी होगी। नीरज श्रीवास्तव ने उनसे जल्द डीपीआर बनवाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अलाइनमेंट का पुन: परीक्षण कराते हुए डीपीआर बनाई जाएगी। ऐसे में अब यूपीसीडा की डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी खत्म हो गई।
कमेटी में शामिल अफसर : 20 जून 2018 को मुख्य सचिव द्वारा गठित कमेटी में मंडलायुक्त को अध्यक्ष, यूपीसीडा के सीईओ, आइजी, डीएम, उपाध्यक्ष केडीए, नगर आयुक्त, प्रबंध निदेशक केस्को, समग्र विकास विकास समिति के समन्वयक, आइआइटी कानपुर के प्रोफेसर ओंकार दीक्षित, सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को शामिल किया गया था।
एक्सप्रेस वे की बदलेगी डिजाइन : 32 किमी लंबे एक्सप्रेस वे को छत्रपति शाहू जी महाराज विवि के पहले से राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेज की ओर जाने वाली सड़क से शुरू होकर मैनावती मार्ग, गंगा बैराज, मालरोड, घंटाघर, डिप्टी पड़ाव, जरीब चौकी, विजय नगर, नमक फैक्ट्री चौराहा होते हुए दलहन अनुसंधान संस्थान के पीछे से शुरुआती स्थल पर जोडऩे की योजना पूर्व में बनी थी। अब गंगा में कम से कम पिलर बनें इसके लिए इसकी डिजाइन को कुछ कम किया जाएगा। इस पर चढऩे और उतरने के लिए विजय नगर, जरीब चौकी, गंगा बैराज, घंटाघर, माल रोड, झाड़ीबाबा पड़ाव पुल और विवि के पास रैंप बनाना था। अब नई डिजाइन में कुछ परिवर्तन किया जाएगा। वीआइपी रोड से भी इस लिंक एक्सप्रेस वे को जोड़ा जा सकता है।
प्रोजेक्ट से मिलेगा लाभ : शहर के आउटर में 93 किमी लंबी आउटर रिंग रोड का निर्माण होने जा रहा है। इससे हाइवे और जीटी रोड पर लगने वाले जाम की समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन आंतरिक जाम पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। अनवरगंज-फर्रुखाबाद रेललाइन की वजह से शहर दो हिस्सों में बंटा हुआ है। ऐसे में रेलवे क्रासिंगों पर जाम लगता है। गोविंदनगर, नौबस्ता, किदवई नगर, दादानगर आदि दक्षिण इलाके के लोग अगर कल्याणपुर, गंगा बैराज, बिठूर, मालरोड, घंटाघर आदि जगहों पर जाना चाहें तो उन्हें कई जगहों पर जाम में फंसना पड़ता है। ङ्क्षलक एक्सप्रेस वे उनकी समस्या का समाधान करेगा। उत्तर के लोग दक्षिण और दक्षिण के लोग उत्तर क्षेत्र में आसानी से आ जा सकेंगे।
प्रोजक्ट एक नजर में
31 किमी है इस एक्सप्रेस वे की प्रस्तावित लंबाई।
16 सौ करोड़ रुपये है इसकी अनुमानित लागत।
04 लेन का सिंगल पिलर पर बनाया जाना है।
-शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए गंगा ङ्क्षलक एक्सप्रेस वे बहुत ही जरूरी है। राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय के अपर सचिव ने एक्सप्रेस-वे के लिए वित्त पोषण पर सहमति दे दी है। -डा. राजशेखर, मंडलायुक्त
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