कानपुर, जेएनएन। यह सच ही है कि सेवा संसाधन से नहीं, भावनाओं से होती है। बड़े-बड़े औद्योगिक समूह तो अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्‍पॉन्‍सबिलिटी (सीएसआर) फंड से समाज सेवा कर रहे हैं, लेकिन इनमें व्यापारिक संस्था 'किराना मर्चेंट एसोसिएशन' अपने आप में बेहतरीन मिसाल है। यह संस्था इसलिए भी खास है, क्योंकि यह सेवा कार्य की 88 साल पुरानी परंपरा है। इस संस्था ने भी शिक्षा और स्वास्थ्य को ही समाज के लिए बेहद जरूरी मानते हुए इस दिशा में कदम बढ़ाया।

 

इनके द्वारा संचालित अस्पताल में मरीजों का उपचार होता है तो शहर के जाने-माने स्कूलों में शामिल किराना व्यापारियों का विद्यालय रियायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया करा रहा है। इसके लिए किसी कंपनी या सरकार से आर्थिक सहयोग नहीं लिया जाता, बल्कि व्यापार में होने वाले मुनाफे में से ही सेवार्थ धनराशि निकाली जाती है।

1930 से चल रहा धर्मादा किराना अस्पताल
किराना मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश बाजपेयी ने बताया कि सेवा कार्यों की नींव हम व्यापारियों के पुरखों ने डाली थी। 1930 में कैनाल रोड पर धर्मादा किराना अस्पताल की स्थापना की। यहां एलोपैथिक और आयुर्वेद इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इतने वर्षों से नियमित रूप में चिकित्सक यहां बैठ रहे हैं। संस्था उन्हें सहयोग राशि देती है, लेकिन गरीबों से किसी प्रकार का पैसा नहीं लिया जाता। सभी दवाएं फ्री दी जाती हैं। अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी धर्मादा किराना समिति उठाती है, जिसके अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार गुप्ता और महामंत्री मोतीलाल अग्रवाल हैं। इसी तरह संस्था ने समाज को एक अंतिम यात्रा वाहन भी उपलब्ध कराया है। शहर में कोई भी जरूरतमंद इसकी सेवाएं रियायती दरों पर ले सकता है।

कम फीस पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

एसोसिएशन के सदस्यों की ही उत्‍तर प्रदेश किराना सेवा समिति है। यह समिति दो स्कूल संचालित कर रही है। किदवई नगर में यूपी किराना स्कूल और तात्या टोपे नगर में बालिकाओं का स्कूल चल रहा है। उन्होंने बताया कि यह कॉन्वेंट स्कूल है, लेकिन किसी भी अन्य कॉन्वेंट स्कूल के मुकाबले सबसे कम फीस पर हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया करा रहे हैं।

By Krishan Kumar