कानपुर नगर निगम में बड़ी धांधली, वसूली के लिए बना पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन, कमीशन दिए बिना नहीं होता ये काम
कानपुर नगर निगम टेंडर धांधली मामले में आरोपित गोविंद शर्मा ने एसआईटी के सामने बयान दर्ज कराया, लेकिन आवश्यक दस्तावेज ...और पढ़ें

कानपुर नगर निगम।
HighLights
गोविंद शर्मा ने एसआईटी के सामने बयान दर्ज कराया, दस्तावेज नहीं दिए
नगर निगम टेंडर में 40% कमीशन और वसूली का आरोप लगाया
पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन पर वसूली के लिए बनने का आरोप
जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर नगर निगम के टेंडर प्रक्रिया में धांधली और वसूली के आरोपित ठेकेदारों के सिंडिकेट के सरगना गोविंद शर्मा ने रविवार को स्वरूप नगर थाने में दूसरी बार बयान दर्ज कराया। इस बार भी वह टेंडर और बैंक खातों से जुड़े अभिलेख नहीं लाया। उसने कहा कि पत्नी बीमार है। वह परेशान है। हालांकि, एसआइटी ने उससे डेढ़ घंटे में 20 से अधिक सवाल पूछे।
कुछ सवालों के जवाब में उसने पहले दिए के बयान से अलग बताया। गोविंद ने यह भी कहा कि नगर निगम में पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन वसूली के लिए बना है। बिना कमीशन दिए अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलता, जिससे बिल नहीं पास होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगस्त में जबरन टैक्स वसूलने और रजिस्ट्रेशन न कराने पर नगर आयुक्त को फटकार लगाई थी। इसके बाद नगर निगम ने मानक के अनुरूप न मिलने वाले सात बड़े ठेकेदारों के हाटमिक्स प्लांट को ब्लैकलिस्ट कर दिया। इनमें गोविंद शर्मा, रज्जन बाजपेई, संदीप जैन, अजय कुमार बाजपेई, दिलीप बाजपेई और प्रार्थना शामिल हैं। इन पर अधिशासी अभियंताओं ने स्वरूप नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने रज्जन और संदीप को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जबकि गोविंद को हाईकोर्ट से अरेस्ट स्टे मिल गया था। 20 सितंबर को एसआइटी ने गोविंद को नोटिस देकर सभी अभिलेखों के साथ बयान के लिए बुलाया था, पर वह बिना अभिलेख के ही बयान देने पहुंचा था।
पूछताछ में उसने बताया कि वह राजस्थान के धौलपुर, आगरा और कानपुर में ठेकेदारी कर चुका है। उसने कहा कि नगर निगम में टेंडर मिलने से बिल पास कराने तक सभी में 40 प्रतिशत धनराशि का बंदरबांट होता है। पार्षदों को बिना हिस्सा दिए न तो टेंडर मिल सकता है और न ही निर्माण कार्य के बाद बिल पास हो सकता है। इसके बाद दोबारा उसे सभी अभिलेख लेकर बयान के लिए बुलाया गया।
रविवार को गोविंद फिर बिना अभिलेख पहुंच गया। उससे नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों की संलिप्तता के बारे में जानकारी ली गई। उसने कहा कि वह पहले ही सब बता चुका है। उसके सभी दस्तावेज सही हैं। फर्म के नाम पर खाते में भी लेनदेन का विवरण साफ मिल जाएगा।
इस पर एसआईटी ने उसे फर्म व टेंडर से जुड़े अभिलेख और बैंक खाते के विवरण के साथ तीन दिन के भीतर लेकर आने को कहा गया। इस दौरान एसआइटी ने करीब डेढ़ घंटे तक उसके बयान दर्ज किए। इस बीच उसने कई बार पत्नी की तबीयत खराब होने व जल्दी घर जाने की बात कही, जिस पर उसे जाने दिया गया।
गोविंद शर्मा पर दर्ज मुकदमे से जुड़े सवाल पूछे गए। वह नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अभिलेख लेकर नहीं आया था। अब फिर उसे नोटिस भेजकर अभिलेख के साथ बयान दर्ज कराने को बुलाया जाएगा। अगर वह जांच में सहयोग नहीं करेगा तो अगो की कार्रवाई की जाएगी।
डा. अर्चना सिंह, प्रभारी एसआईटी, एडीसीपी सेंट्रल
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