चित्रकूट, जेएनएन। Mahant Narendra Giri Death अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) का अकस्मात परलोक सिधार जाना सभी के लिए कष्टप्रद है। लेकिन अभी हाल की बात करें तो दो माह पूर्व ही वे चित्रकूट आए थे। दो दिवसीय प्रवास में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य समेत कई संत महंतों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की थी। उस समय चित्रकूट में संघ के प्रांत प्रचारकों की बैठक चल रही थी। यहां चले मंथन में उन्होंने बढ़ती हुई जनता पर भी चिंता व्यक्त की थी।

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जनसंख्या कानून को बताया था जरूरी: जगद्गुरु व अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के बीच दो माह पूर्व घंटों मंत्रणा हुई थी। उनका मानना था कि सरकार को जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए सख्त कानून बनाना चाहिए। जो देश और प्रदेश में रहने वाले हर नागरिक को मानना बाध्यकारी हो। उन्होंने जनसंख्या विस्फोट को लेकर अपनी गहरी चिंता भी जाहिर की थी। कहा था कि देश और प्रदेश में हो रहा तेजी से जनसंख्या विस्फोट कई प्रमुख समस्याओं का कारण भी हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि लगातार बढ़ रही जनसंख्या पर तत्काल रोक लगाई जाए। जनसंख्या बढ़ने का सीधा प्रभाव अच्छी शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। नई जनसंख्या नीति का मुस्लिम धर्मगुरुओं के विरोध पर महंत नरेंद्र गिरि ने कड़ा विरोध जताया था। 

संघ प्रमुख से भी जनसंख्या नियंत्रण पर की थी चर्चा: अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक में आए संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने भी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि आरोग्यधाम में मिले थे। 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से समान नागरिकता को लेकर टिप्पणी आई थी। उसी दिन उनकी संघ प्रमुख से मुलाकात हुई थी। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने संघ प्रमुख से भी समान नागरिकता और जनसंख्या नियंत्रण पर चर्चा की थी। 

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चित्रकूट से उनका रहा बेहद नजदीकी संबंध : महंत नरेंद्र गिरि का चित्रकूट से बेहद नजदीकी संबंध था। वह अक्सर चित्रकूट आते थे। 11 व 12 जुलाई 21 को   दो दिन चित्रकूट में रहे थे उसके पहले चार नवंबर 2020 को आए थे। तब निर्मोही अखाड़ा के शिवरामदास व दीनदयाल दास की महंती कराई थी। वहीं राष्ट्रीय रामायण मेला में भी वह तीन बार आए थे। चित्रकूट के बरगढ़ में उनका एक शिष्य रहते हैं उनसे भी मुलाकात के लिए भी महंत नरेंद्र गिरि का कई बार चित्रकूट आना हुआ था। 

Edited By: Shaswat Gupta