कानपुर, जेएनएन। Mahant Narendra Giri Death News पनकी स्थित पंखमुखी हनुमान मंदिर के बड़े महंत बाबा रमाकांत दास के ब्रह्मलीन होने के बाद महंत पद को लेकर विवाद शुरू हो गया था। मंदिर की गरिमा पर सवाल उठते देख अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि काफी दुखी हो चुके थे। इसके बाद उन्होंने महंत एवं महामंडलेश्वर स्वामी श्रीकृष्ण दास व शहर के कई अन्य प्रतिष्ठित संतों को बुलाकर घटनाक्रम को समझा था और विवाद को निपटाने के लिए वे खुद मंदिर आने को तैयार थे। बाबा रमाकांत दास के षोडशी के कार्यक्रम को लेकर विवाद पर भी उन्होंने तत्कालीन आइजी और डीएम को फोन कर विवाद सुलझाने के लिए हस्तक्षेप करने के लिए कहा था। 

शहर के मंदिरों में विवाद को लेकर रहते थे चिंतित: महंत नरेंद्र गिरि का कानपुर से कोई सीधा जुड़ाव तो नहीं था, लेकिन यहां के धार्मिक स्थलों को लेकर होने वाले विवादों का मामला जब भी उन तक पहुंचा वे सक्रिय हुए और उसके समाधान का प्रयास किया। 

यह भी पढ़ें: महंत नरेंद्र गिरि की रहस्यमयी मौत पर संतों ने जताया दुख, सीएम याेगी से उच्चस्तरीय जांच की मांग

आनंदेश्वर मंदिर विवाद का भी लिया संज्ञान: आनंदेश्वर मंदिर में जब पहली बार 2011 में विवाद हुआ था तब भी उन्होंने इसे शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने को लेकर पंचदशनाम जूना अखाड़ा और तत्कालीन महंत श्याम गिरि के शिष्यों से बात की थी। इसी तरह दो साल पहले जब पनकी मंदिर में महंत एवं महामंडलेश्वर जितेंद्र दास और श्रीकृष्ण दास के बीच विवाद शुरू हुआ तो उन्हाेंने बालयोगी अरुण पुरी चैतन्य, उदिता नंद ब्रह्मचारी, महंत श्रीकृष्ण दास को बुलाया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गाेपाल दास जी महाराज के पास भी उन्होंने संतों को भेजा था। जब दोनों महंतों के बीच 2020 में नवंबर जब समझौता हुआ तो वे खुश हुए थे और इसके लिए श्रीकृष्ण दास को बुलाकर आशीर्वाद भी दिया था, लेकिन इसके बाद फिर जब विवाद हुआ तो उन्हाेंने उन्हें फोन कर कहा था कि मैं जल्द आऊंगा। हालांकि वे अा नहीं पाए।

यह भी पढ़ें: आरएसएस के चिंतन शिविर में चित्रकूट आए थे नरेंद्र गिरि, बढ़ती जनसंख्या पर जताई थी चिंता

इन्हाेंने भी जताया दुख: 

  • महंत नरेंद्र गिरि जी की हत्या हुई है। इसकी जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हैं उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। महंत नरेंद्र गिरि के हत्या के मामले की सीबीआइ से जांच कराई जानी चाहिए। -  श्रीकृष्ण दास महामंडलेश्वर, पनकी मंदिर 
  • पनकी मंदिर के विवाद को लेकर वे दुखी थे। वे मंदिर नहीं आ सके। उनकी हत्या की गई है। वे कभी आत्महत्या कर ही नहीं सकते हैं। इसकी उच्च स्तरीय जांच की जाए ताकि दोषी सामने आएं।  - बालयोगी अरुण पुरी चैतन्य, सिद्धनाथ मंदिर, जाजमऊ 

Edited By: Shaswat Gupta