चित्रकूट, जेएनएन। Mahant Narendra Giri Death अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की संदिग्ध  परिस्थिति में मौत से चित्रकूट का संत समाज स्तब्ध है। संत महंतों का कहना है कि वे आत्महत्या नहीं कर सकते हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। सोमवार की शाम जैसे ही चित्रकूट में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के मौत की खबर  पहुंची तो मठ, मंदिर और अखाड़ों में शोक की लहर दौड़ गई। लगभग सभी मंदिरों में उनकी मौत रहस्यमयी मौत की ही चर्चा थी।

 दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्यजीवन दास ने कहा कि संत समाज को बड़ी क्षति हुई है। फंदे में शव लटा मिलने की सूचना है। उन्होंने खुद फंदा लगाया या किसी ने लटकाया। इसकी जांच पुलिस को करना चाहिए। निर्वाणी अखाड़ा के महंत सत्यप्रकाश दास का कहना है कि जिसके कंधे में 13 अखाड़ों के संत महंतों को जिम्मेदारी थी वे इतना कमजोर नहीं हो सकते हैं कि आत्महत्या कर लें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद संत है उनको इसकी उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए। 

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जगद्गुरु ने भी जताया शोक: तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महराज ने उनकी मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया। कहा कि महंत नरेंद्र गिरि ,से उनके  बहुत अच्छे संबंध थेे। वे प्रेम के साथ उन पर श्रद्धा भी करते थे। वे बहुत अच्छे संत थे प्रयाग में गए शिवसत्त मिला। मैं उनको श्रद्धांजलि देता हूं। वहीं उनके उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि घटना को लेकर कुछ बोलना अच्छा नहीं है। पुलिस जांच कर रही है। धीरे-धीरे सब सामने आएगा। खाकी अखाड़ा के महंत रामजन्म दास ने कहा कि षडयंत्र के तहत हत्या हुई है। निष्पक्ष जांच के साथ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 

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इनकी भी सुनिए: वाल्मीकि आश्रम के पीठाधीश्वर महंत भरतदास का कहना है कि अखाड़ा परिषद की बड़ी हानि हुई है। उनकी मौत से संतों में आक्रोश है। मुख्यमंत्री से मांग है कि सीबीआइ से जांच कराएं। बड़े मठ के मंहत वरुण प्रपन्नाचार्य बोले कि उनकी मौत का जो भी दोषी हो उसको कड़ी सजा मिले। 

Edited By: Shaswat Gupta