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    शेर के जोड़े, गेंडा व बाघ को मिली स्नेह छाया

    By JagranEdited By:
    Updated: Wed, 26 Aug 2020 06:38 AM (IST)

    बिन बजट बदहाली के दौर से गुजर रहे चिड़ियाघर के वन्यजीवों को अब स्नेह छाया मिली है।

    शेर के जोड़े, गेंडा व बाघ को मिली स्नेह छाया

    जागरण संवाददाता, कानपुर : बिन बजट बदहाली के दौर से गुजर रहे चिड़ियाघर के वन्यजीवों को स्नेह छाया मिलने लगी है। उनके पालन-पोषण व खाने-पीने का खर्च उठाने के लिए विभिन्न संस्थानों ने मदद के हाथ आगे बढ़ाए हैं। नंदिनी व अजय बब्बर शेर के जोड़े को सेंट्रल यूपी गैस लिमिटेड (सीयूजीएल), तीन गेंडों और दो बाघों को हिदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने गोद लिया है। अब अन्य जीव भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

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    सीयूजीएल ने बब्बर शेर के जोड़े को 31 मार्च 2021 तक के लिए गोद लिया है। उनके खान-पान व देखरेख के लिए सीयूजीएल ने 13 लाख रुपये दिए हैं। इस बब्बर शेर के जोड़े के तीन बच्चे हैं। उमा व शंकर की उम्र तीन वर्ष व सुंदरी की उम्र चार वर्ष है। इन बच्चों के पालन-पोषण के लिए इंडिया र्थिमट कंपनी ने चिड़ियाघर प्रशासन को अनुदान देने का आश्वासन दिया है। तीन गेंडों व दो बाघ को गोद लेने वाले एचएएल ने चिडि़याघर प्रशासन को 14 लाख 85 हजार रुपये दिए हैं। चिडि़याघर के सहायक निदेशक अरविद कुमार सिंह ने बताया कि मांसाहारी, शाकाहारी व दाना खाने वाले वन्यजीवों की खुराक के लिए तीन करोड़ 25 लाख सालाना की जरूरत होती है। लॉकडाउन के बाद जू प्रशासन ने शासन से छह करोड़ 92 लाख रुपये का बजट मांगा था। इसमें से एक करोड़ 10 लाख रुपये शासन ने हाल ही में दिए हैं।

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    उद्यमियों से मदद की आस

    कानपुर प्राणि उद्यान प्रबंध एवं विकास समिति की बैठक में प्रमुख सचिव वन सुधीर गर्ग ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से कहा था कि उद्यमियों के साथ बैठक करके चिडि़याघर की जरूरतें पूरी करने का रास्ता निकालें। उन्होंने कहा था कि वह अपने स्तर से भी शासन एवं उद्यमियों से मदद दिलाने का प्रयास करेंगे।

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    खान-पान व इलाज के लिए आठ करोड़ की दरकार

    चिड़ियाघर के सहायक निदेशक ने बताया कि चिड़ियाघर में 1487 वन्यजीव हैं। पिछले वर्ष तक तीन करोड़ 10 लाख रुपये का रेवेन्यू टिकट, खानपान स्टॉल व साइकिल स्टैंड के ठेके से मिलता था, जबकि दो करोड़ 35 लाख रुपये शासन व एक करोड़ रुपये की सहायता राशि अन्य स्त्रोतों से मिली थी। इस बार यह रेवेन्यू नहीं मिल पाया है जिसके कारण मांसाहारी व शाकाहारी वन्य जीवों के खान-पान व इलाज के लिए आठ करोड़ रुपये की जरूरत होगी। पिछले वर्ष मीट के दाम 161 रुपये किलो थे जो बढ़कर 178 रुपये किलो पहुंच गए हैं। चिड़ियाघर में शेर, चीता, तेंदुआ व लकड़बग्घा मिलाकर कैट प्रजाति के वन्यजीवों का खर्च सर्वाधिक होता है।