कानपुर, [अम्बर बाजपेयी]। स्कूल टाइम से गीत-संगीत और डांस में खुद को साबित करने वाली देविका शर्मा अब टीवी इंडस्ट्री का उभरता हुआ चेहरा बन चुकी हैं। कानपुर की इस देविका ने सोनी टीवी पर प्रसारित क्राइम पेट्रोल के सौ से ज्यादा एपिसोड में मुख्य भूमिका निभाई है, वहीं सावधान इंडिया के साथ-साथ अक्षय कुमार की फिल्म शौकीन भी खाते में दर्ज है। करियर, संघर्ष, मुकाम और भविष्य की योजनाओं पर देविका से बातचीत के अंश...।

स्कूल टाइम से ही सोच रखा था

देविका बताती हैं कि बचपन से ही कला और साहित्य से जुड़ाव रहा। स्कूल टाइम से ही सोच रखा था कि टीवी और फिल्मों में नाम रोशन करना है। इसीलिए म्यूजिक और डांस सीखा। स्कूल के कार्यक्रमों में लगातार प्रस्तुतियां भी दीं। दिल्ली में मिरांडा हाउस कॉलेज से स्नातक करने के दौरान थिएटर से जुड़ी। अनगिनत थिएटर किए। इसी की बदौलत फिल्मों की राह आसान हो गई।

थिएटर ने आसान कर दी फिल्मों की राह

देविका बताती हैं कि बचपन से ही फिल्मों का हिस्सा बनने की ख्वाहिश थी। इसीलिए तीन साल लगातार थिएटर करने के बाद ही 2013 में मुंबई गई थी, जब वहां पहुंची तो फिल्म इंडस्ट्री के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। सिर्फ मेरे पास एक्टिंग, गायन और डांस का हुनर और मां का आशीर्वाद था। कई ऑडीशन देने के बाद मौका मिलना शुरू हुआ। पहला ब्रेक 2014 में अक्षय कुमार की फिल्म शौकीन से मिला। हालांकि उसमें रोल छोटा था, लेकिन लोगों ने पसंद किया।

क्राइम पेट्रोल के सौ से ज्यादा एपिसोड में निभाई भूमिका

सोनी टीवी पर प्रसारित सीआइडी और क्राइम पेट्रोल के कुछ एपिसोड में छोटी भूमिकाएं की। लोगों को काम पसंद आया तो फिर मुख्य भूमिकाएं मिलने लगीं। अब तक क्राइम पेट्रोल के 100 से ज्यादा एपिसोड में मुख्य भूमिका निभा चुकी हूं। सावधान इंडिया के भी कई शो किए। वह बताती हैं कि अब जल्द ही कलर्स चैनल पर प्रसारित होने वाले क्राइम थ्रिलर शो सनसनी में दिखाई दूंगी। भविष्य की अन्य योजनाओं पर देविका कहती हैं कि ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रसारित होने वाली वेबसीरिज के लिए लगातार ऑडीशन दे रही हूं। कुछ एक से बात भी चल रही है। इसके अलावा एक फिल्म भी साइन की है, जो अभी लिखी जा ही है।

बैंकर मां को देती हैं सफलता का श्रेय

देविका अपनी सफलता का श्रेय वह अपनी बैंकर मां ज्योति शर्मा को देती हैं। वह बताती हैं कि घर कानपुर के यशोदानगर क्षेत्र में है, मां वहीं रहती हैं। मुझे मिला मुकाम सिंगल मदर के रूप में किए गए उनके संघर्ष का ही परिणाम है। छावनी के मैथाडिस्ट स्कूल में पढ़ाई के बाद मुझे दिल्ली भेजना उनका ही निर्णय था। साल में दो बार होली और दीवाली पर घर जरूर आती हूं और मां के साथ घर के कामों में हाथ बंटाती हूं। कानपुर की भाषा मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। यहां का मिजाज और ठसक को मुंबई में बहुत मिस करती हूं। इसके अलावा यहां की आलू टिक्की, समौसे और जलेबी मेरी पसंदीदा डिश हैं। यहां आने के बाद सबसे पहले इन्हीं की फरमाइश होती है।

Posted By: Abhishek

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