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    Kargil Vijay Diwas: न रुके न थके दुश्मन के छक्के छुड़ा टाइगर हिल पर जा डटे, महोबा के रविंद्र सिंह ने बताया कैसे फहराया तिरंगा

    By Abhishek VermaEdited By:
    Updated: Tue, 26 Jul 2022 09:23 AM (IST)

    Kargil Vijay Diwas महोबा के पैरामिलेट्री फोर्स के कमांडो रविंद्र सिंह ने टाइगर हिल पर तिरंगा फहराया था। रविंद्र ने बताया कि वह 12-12 कमांडो की टुकड़ी में आगे बढ़ रहे थे। महोबा के ही कमांडो जगदीश यादव दुश्मन को जवाब देते हुए बलिदान हो गए थे।

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    Kargil Vijay Diwas कारगिल युद्ध के समय अपने सैनिक साथियों के साथ रविंद्र सिंह (मध्य) में। फाइल फोटो- स्वयं

    महोबा, जागरण संवाददाता। वन टू वन करते हुए घुटना और कोहनी छिल चुकी थीं। सिर के पास से गोलियां निकल जातीं तो शरीर में सिहरन दौड़ जाती। इन हालातों में भी डिगे नहीं बल्कि और हौसले के साथ लेटे हुए रेंगते जा रहे थे। सीधी चढ़ाई के कारण दिक्कत तो थी पर न रुके न थके, दुश्मन की गोलियों का जवाब देते हुए आगे ही बढ़ते रहे, आखिर मिशन कंप्लीट कर टाइगर हिल पर तिरंगा फहरा दिया।

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    महोबा के कारगिल युद्ध के विजेता रविंद्र सिंह वह समय याद कर रोमांचित हो जाते हैं। उन्हीं की बटालियन के कमांडो महोबा के जगदीश यादव उन्हीं से आगे चल रहे थे जो दुश्मन को जवाब देते हुए बलिदान हो गए थे।

    एक अप्रैल 1977 को महोबा में जन्मे रविंद्र सिंह 1997 को 21 पैरामिलेट्री कमांडों फोर्स में भर्ती हुए थे। पहले उनका पांच फरवरी 1996 में राजपुताना रायफल में चयन हुआ था।

    आलमपुरा में पिता ज्ञान सिंह, मां अवध कुंवर, पत्नी आशा, एक बेटा दो बेटियों के साथ रह रहे रविंद्र सिंह फरवरी 2012 में सेवानिवृत्त होकर स्टेट बैंक के सुरक्षा दस्ते में हैं। बताते हैं कि हम लोग आसाम जोराहट में तैनात थे। निर्देश मिले कि कारगिल ढाई सौ कमांडो जाना हैं। अप्रैल 1999 में प्लेन से श्रीनगर, फिर कारगिल और वहां से द्रास सेक्टर पहुंचे। 

    सिर उठा कि गोली लगी: हम लोगों को निर्देश दिए गए कि 12-12 कमांडों की टुकड़ी में आगे बढ़ें। इसमें भी छह आगे जाते, छह कमांडो उनके थकने पर फिर आगे का मोर्चा संभालते थे। जून माह 1999 में कार्रवाई करते हुए आगे-पीछे कर रेकी करते चल रहे थे। दुश्मन को हर गतिविधि पता चल रही थी। हम लोग पहाड़ियों से चिपक कर चल रहे थे।  असावधानी से सिर उठ जाता तो तुरंत गोली का निशाना बन जाते।

    जानकारी मिली कि दुश्मन टाइगर हिल पर कब्जा जमाए है। ऊपर पहुंचने में ढाई दिन लगे। दिन में पत्थरों के बीच छिप जाते, रात को मैप के अनुसार बढ़ते। इस बीच कई साथी बलिदान हो गए। हम 24 कमांडो ऊपर पहुंचे थे। जुलाई माह में मिशन कंपलीट कर लिया था। टाइगर हिल पर झंडा फहराने के दौरान कमांडो सत्ते सिंह विष्ट, सुरेंद्र सिंह, ओमवीर सिंह,  महावीर व अन्य थे।

    आज होंगे आयोजन: कारगिल विजय दिवस पर महोबा में आज बलिदानी राकेश चौरसिया को याद कर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए जाएंगे।