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बधाई हो... Kanpur चिड़ियाघर में दुर्लभ 'साल' प्रजाति के कछुओं के 25 बच्चों का जन्म, मादा ने रेत में छिपाकर रखे थे अंडे

Published: Tue, 22 Sep 2026 08:23 PM (IST)

कानपुर चिड़ियाघर में दुर्लभ 'साल' (बटागुर) प्रजाति के 25 कछुओं का जन्म हुआ है, जिससे इनकी संख्या 18 से बढ़कर ...और पढ़ें

चिड़ियाघर में साल (बटागुर) कछुए व उनके बच्चे। चिड़ियाघर

चिड़ियाघर में साल (बटागुर) कछुए व उनके बच्चे। चिड़ियाघर

HighLights

  1. कानपुर चिड़ियाघर में 25 दुर्लभ बटागुर कछुओं का जन्म हुआ

  2. इन अत्यंत संकटग्रस्त कछुओं की संख्या अब 18 से 43 हुई

  3. नौ वर्षों बाद चिड़ियाघर में कछुओं का सफल प्रजनन हुआ

जागरण संवाददाता, कानपुर। चिड़ियाघर दुलर्भ प्रजाति के साल यानी बटागुर कछुओं के 25 बच्चों को जन्म हुआ है। अंडों से बच्चे निकलने के बाद चिड़ियाघर में उत्साह का माहौल है। इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। बच्चों की निगरानी की जा रही है। यहां पर नौ वर्ष में पहली बार साल कछुओं का जन्म हुआ है।

चिड़ियाघर में वर्ष 2017 में चंबल से बटागर कछुओं को लाया गया था। इनमें दो नर व 17 मादा थी। इनमें से एक नर को दूसरे चिड़ियाघर भेज दिया गया था। चिड़ियाघर के निदेशक डा. कन्हैया पटेल के निर्देश पर कछुओं के बाड़ों मे रेत की मोटी परत बिछाई गई थी। लगभग दो महीने पहले साल कछुओं के अंडे हुए तो इनकी निगरानी शुरू कर दी गई।

मोटी रेत में मादा ने अंडों को दबा दिया। अंडे सुरक्षित रहे, इसके लिए विशेष रूप से सतर्कता बरती गई। चिड़ियाघर के निदेशक डा. कन्हैया पटेल ने बताया कि बटागुर कछुए अत्यंत संकट ग्रस्त श्रेणी में आते हैं। चिड़ियाघर में इनकी संख्या 18 से बढ़कर 43 हो गई है। यह अपने आप में किसी उपलब्धि से कम नहीं है। कछुओं के बच्चों की निगरानी के लिए जू कीपर की ड्यूटी लगाई गई है। 

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