छात्र मांग रहे संसाधन; कानपुर के स्कूलों में चमका दी गईं दीवारें और जमीन, फर्नीचर उपलब्ध नहीं कराए गए
कानपुर के 1059 परिषदीय स्कूलों में 'ऑपरेशन कायाकल्प' के बावजूद फर्नीचर नहीं है, जिससे 58,735 बच्चे फर्श पर पढ़ने को ...और पढ़ें

प्राथमिक विद्यालय सीतारामपुरवा। जागरण
HighLights
1059 कानपुर स्कूलों में 58,735 बच्चे फर्श पर बैठते हैं
ऑपरेशन कायाकल्प ने दीवारें सुधारीं, पर फर्नीचर नहीं मिला
फर्श पर बैठने से बच्चों को स्वास्थ्य समस्याएँ हो रही हैं
जागरण टीम, कानपुर। आपरेशन कायाकल्प ने स्कूलों की दीवारों पर रंग-रोगन तो कर दिया, पर बच्चों की किस्मत नहीं बदली। जिले के 1059 परिषदीय स्कूलों में आज भी बेंच-डेस्क नसीब नहीं है। पढ़ाई फर्श पर हो रही और सपने अर्श के हैं। सुबह-शाम गुलाबी सर्दी ने दस्तक दे दी है।
दिसंबर-जनवरी की कड़कड़ाती ठंड में यही फर्श बर्फ जैसी लगेगी लेकिन 58,735 नौनिहालों को उसी पर बैठकर अपना भविष्य गढ़ना है। फर्श पर बैठने से बच्चों में पीठ दर्द, पैरों में जकड़न आने के साथ ही लिखावट बिगड़ रही है। फर्नीचर के लिए शासन से बजट जारी होने का इंतजार है। आगे पड़ने वाली सर्दी में बीमार पड़ने का खतरा है।
दैनिक जागरण टीम ने सोमवार को सरसौल, बिधनू, कल्याणपुर, बिल्हौर, किदवई नगर, लाजपत नगर के स्कूलों की पड़ताल की तो सिस्टम की पोल खुल गई। फर्श पर बिछी दरी पर बच्चे पढ़ते मिले। बच्चों की समस्याओं को लेकर तीन दिवसीय समाचारीय अभियान शुरू किया है। इसमें पहले दिन जागरण संवाददाता विवेक मिश्र, बिधनू से सर्वेश पांडेय, महाराजपुर से शैलेन्द्र त्रिपाठी, बिल्हौर से अरुण पांडेय, बिठूर से प्रदीप तिवारी की पड़ताल करती रिपोर्ट...

प्राथमिक विद्यालय, बाजपुर (बिधनू)। जागरण
जमीन पर चटाई बिछाकर पढ़ाई कर रहे 101 छात्र-छात्राएं
बिधनू के बाजपुर में संचालित प्राथमिक विद्यालय में बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ रहे हैं। स्कूल प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुशील साहू ने बताया कि वर्ष 1990 में बने भवन में वर्तमान में 101 छात्र संख्या पंजीकृत हैं। डेस्क व बेंच की कमी है। पांच कमरों के स्कूल में केवल तीन में कक्षाएं संचालित हैं। दो कमरे जर्जर हैं। प्रधानाध्यापक अनुज गुप्ता ने कमियों को छिपाने का प्रयास किया और अधिकारियों के आदेश के बिना कोई जानकारी देने से इन्कार किया।
स्कूल में फर्नीचर न होने से बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं। बारिश में तो स्कूल में जलभराव हो जाता है। इससे कई दिन तक जमीन में नमी रहती है। स्कूल में जहरीले कीड़े घूमने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है।
पप्पी, अभिभावक।
सरसौल में कहीं दरी, कहीं चटाई पर हो रही पढ़ाई
सरसौल ब्लाक के महुआ गांव में संचालित प्राथमिक स्कूल में बच्चे कक्षा में जमीन पर बिछी दरी में बैठकर छोटी मेज पर कापी-किताबें रखकर पढ़ते मिले। प्रधानाध्यापिका मीरा गुप्ता ने कहा कि फर्नीचर के लिए मांग पत्र भेजा है। सरसौल ब्लाक के ही सुन्धैला गांव के प्राथमिक स्कूल में भी कमोबेश यही नजारा दिखा। बच्चे जमीन पर बिछी चटाई पर बैठकर पढ़ रहे थे। प्रधानाध्यापिका संगीता शर्मा ने कहा कि फर्नीचर की मांग बेसिक शिक्षा के संबंधित पोर्टल पर भेज दी है।
सरसौल ब्लाक का प्राथमिक स्कूल महुआगांव। जागरण
बिल्हौर में शिक्षिका नहीं बता सकीं कितने फर्नीचर की है जरूरत
बिल्हौर के प्राथमिक विद्यालय, सीतारामपुरवा में फर्नीचर न होने से बच्चे चटाई पर बैठकर पढ़ते मिले। सहायक अध्यापिका अल्पा फर्नीचर की उपलब्धता के बारे में जानकारी नहीं दे सकीं। खंड शिक्षा अधिकारी रवि कुमार सिंह ने बताया कि स्कूलों में फर्नीचर न होने की सूचना उच्चाधिकारियों के पास है।
विद्यालय में पढ़ाई और अन्य सुविधाएं तो ठीक हैं लेकिन फर्नीचर की कमी है। हर साल सर्दी के मौसम में फर्श ठंडी होने के कारण बच्चों को पढ़ाई में परेशानी होती है। स्कूल में जल्दी फर्नीचर आना चाहिए।
चंद्रपाल, ग्रामीण।
बिठूर में बोरे पर बैठ रहे बच्चे
बिठूर के ग्राम पंचायत बरहट बांगर के टिक्कनपुरवा स्थित प्राथमिक और जूनियर विद्यालय में कुल 56 बच्चे पंजीकृत हैं। प्राथमिक विद्यालय में 36 और जूनियर विद्यालय में 20 बच्चे हैं। प्रधानाध्यापिका गायत्री सैनी समेत शिक्षामित्र समेत सात लोग पदस्थ हैं। बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। संविलियन विद्यालय मंधना प्रथम में 135 बच्चे पंजीकृत हैं। प्राथमिक में 62 और जूनियर स्तर पर 73 बच्चे पढ़ रहे हैं। प्राथमिक स्तर के 62 बच्चों के बैठने के लिए बेंच या डेस्क उपलब्ध नहीं हैं। प्रधानाध्यापिका शर्मिला अवस्थी ने कहा कि फर्नीचर के लिए विभाग को कई बार मांग पत्र भेज चुके हैं।
जिले में 1059 स्कूल ऐसे हैं जिनमें 58,735 विद्यार्थियों के लिए 20,801 फर्नीचर की जरूरत है। ब्लाकवार मांग पत्र लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। बजट मिलते ही जिलास्तरीय समिति फर्नीचर खरीदने की प्रक्रिया पूरी करेगी।
हरिओम सिंह, बीएसए।
लगातार पालथी मारकर या पीठ को झुकाकर बैठने से स्पाइनल कार्ड (रीढ़ की हड्डी) पर असमान दबाव पड़ता है। इससे बच्चों में पीठ के निचले हिस्से में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और भविष्य में बैठने की गलत आदत संबंधी स्थायी विकार पैदा हो सकते हैं।
प्रो. मनीष सिंह, न्यूरो सर्जन, जीएसवीएम मेडिकल कालेज।
जमीन पर कापी रखकर लिखने या पढ़ने के दौरान बच्चों को अपनी गर्दन बहुत ज्यादा झुकानी पड़ती है और आंखों के बहुत नजदीक आ जाती है। इससे आंखों की मांसपेशियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है, जिससे सिरदर्द, धुंधलापन और निकट दृष्टता (मायोपिया) का खतरा बढ़ जाता है।
प्रो. शालिनी मोहन, नेत्र रोग विशेषज्ञ, जीएसवीएम मेडिकल कालेज।
कक्षा वार छात्र संख्या और फर्नीचर की जरूरत
| कक्षा | कुल छात्र संख्या | असंतृप्त छात्र | फर्नीचर की जरूरत |
|---|---|---|---|
| 1–2 | 31,599 | 23,241 | 7,964 |
| 3–5 | 48,587 | 35,494 | 12,837 |
| कुल | 80,186 | 58,735 | 20,801 |

