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    World Environment Day: कानपुर प्लागर्स की अनोखी पहल ने पालीथिन को बनाया पर्यावरण संरक्षण का विकल्प

    By Amit SinghEdited By:
    Updated: Sat, 04 Jun 2022 04:02 PM (IST)

    World Environment Day कानपुर प्लागर्स की टीम गंगा के किनारों और घरों से प्लास्टिक एकत्र कर उसे रीसाइकिल करा ट्री गार्ड बनवाती है। एक ट्री गार्ड में तकरीबन चार हजार पॉलिथिन खप जाती है। खास बात ये है कि प्लास्टिक के ये ट्री गार्ड कई वर्षों तक चलते हैं।

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    World Environment Day: पालीथिन से बने प्लास्टिक के ट्री गार्ड। फोटो - दैनिक जागरण

    अंकुश शुक्ल, कानपुर। पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हो रही पालीथिन और प्लास्टिक की थैलियों से शहर को निजात दिलाने का अनोखा रास्ता कानपुर प्लागर्स की टीम ने खोज निकाला है। टीम के सदस्य प्रतिदिन गंगा के किनारों और घरों से प्लास्टिक को एकत्र कर उन्हें स्वयं के खर्च पर रीसाइकिल कराकर ट्री गार्ड बनवा रहे हैं। उस ट्री गार्ड में पौधों को सुरक्षित रखकर पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा बनने वाली प्लास्टिक और पालीथिन का सदुपयोग कर रहे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर टीम की ओर से ऐसे 101 ट्री गार्ड के माध्यम से शहर के विभिन्न स्थानों पर पौधों को संरक्षित करने की पहल की जाएगी। टीम इस अभियान से नगर निगम व जिला प्रशासन को जोड़कर बड़े स्तर पर इस प्रकार के ट्री गार्ड से शहर को हरियाली प्रदान करने की योजना पर कार्य कर रही है।

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    प्लास्टिक मुक्त समाज की परिकल्पना को साकार करने के लिए लखनपुर निवासी डा. संजीवनी शर्मा और इशान की टीम कानपुर प्लागर्स युवाओं, पूर्व सैनिक व ग्रामीणों के सहयोग से गंगा घाटों के किनारे से पालीथिन व प्लास्टिक के पैकेज को एकत्र कर उसको रीसाइकिल कराते हैं। टीम के सदस्य लगभग 500 से ज्यादा घरों से भी सप्ताह भर में एकत्र पैकेट को लेकर रनियां स्थित प्लांट में भेजते हैं। जहां पर इनसे ट्री गार्ड बनाए जाते हैं।

    दुकानों व घरों से किया संपर्क

    कानपुर प्लागर्स की टीम गंगा बैराज स्थित खान-पान व अन्य दुकानों के साथ कई रिहायशी सोसायटी से वाट्सएप के जरिए जुड़ी है। सप्ताह में एक बार टीम के सदस्य अपने वाहन से सभी जगहों से प्लास्टिक एकत्र करते हैं। एक ट्री गार्ड को बनाने में 3,800 से चार हजार प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग किया जाता है। इसमें छह दिन का समय और लगभग दो हजार रुपये खर्च आता है। यह सारा खर्च टीम ही वहन करती है।

    प्रियजनों के नाम से लगवाएं पौधे, टीम करेगी देखरेख

    टीम के सदस्य ट्री गार्ड में लगाए गए पौधों की देखकर भी स्वयं करेंगे। शहरवासी अपने प्रियजन के नाम से इस ट्री गार्ड में सहयोग राशि देकर पौध लगवा सकते हैं जिसकी देखभाल प्रतिदिन टीम के सदस्य प्लागिंग ड्राइव के दौरान करते रहेंगे। टीम का दावा है कि देश में पहली बार प्लास्टिक व पालीथिन को रीसाइकिल कर इस प्रकार के ट्री गार्ड बनाए गए हैं जो कई वर्ष तक उपयोग किए जाएंगे।

    यह है प्रक्रिया

    रीसाइकलर जय किशन ढांढनिया ने बताया कि सबसे पहले टीम घर व दुकानों से एकत्र पालीथिन और पैकेट को उनकी गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग करती है। फिर प्लांट में सभी पैकेट को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। जो एग्लोमशीन के जरिये टुकड़ों को उच्च तापमान पर प्लास्टिक के छोटे-छोटे दानों में परिवर्तित करता है। अंत में प्लास्टिक एक्सट्रूडर मशीन से दानों में केमिकल्स का उपयोग कर उनको प्लास्टिक की पट्टियों के आकार में ढाला जाता है। इसके बाद फैबिग्रेशन सेंटर में पट्टियों को काटकर इस प्रकार ट्री गार्ड बनाते हैं कि पेड़ के बड़े होने पर उसको निकालकर दूसरे स्थान पर लगा सकें।