Kanpur Special Story: मसालों की खुशबू, भरोसे का कारोबार... डेढ़ सदी से कायम है नयागंज की पहचान
कानपुर का नयागंज बाजार डेढ़ सदी से मसालों और भरोसे के व्यापार का केंद्र रहा है, जिसने पारंपरिक तरीकों से ...और पढ़ें

नयागंज में लगी दुकानें। जागरण
HighLights
नयागंज कानपुर डेढ़ सदी पुराना मसालों का थोक बाजार
पारंपरिक व्यापार से आधुनिकता की ओर बढ़ा यह बाजार
अशोक और गोल्डी जैसे ब्रांडों की जड़ें यहीं से जुड़ीं
अखिलेश तिवारी, कानपुर। नयागंज की कहानी केवल दुकानों की बढ़ती संख्या या कारोबार के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि बदलती व्यापारिक संस्कृति का दस्तावेज भी है। साधन बदले, कारोबार की रफ्तार बदली और बाजार का भूगोल भी बदला, लेकिन पीढ़ियों से चली आ रही साख, गुणवत्ता और आपसी भरोसे की अहमियत आज भी बरकरार है।
मसालों की उठती खुशबू, दुकानों पर लगे बोरों के ढेर और व्यापारियों की आवाजाही के बीच नया गंज की गलियों में आज भी डेढ़ सदी पुराने कारोबार की धड़कन महसूस की जा सकती है। यह वह बाजार है, जहां कभी करोड़ों के सौदे कागज पर नहीं, व्यापारियों की जुबान पर होते थे। न मोबाइल था, न इंटरनेट और न ही हर पल भाव बताने वाले डिजिटल माध्यम।
लाल बहीखातों में हिसाब दर्ज होता था और व्यापारी की जुबान ही सबसे बड़ी गारंटी मानी जाती थी। समय बदला तो तौल के बाटों की जगह इलेक्ट्रानिक कांटों ने ले ली और तार-टेलीग्राम की जगह मोबाइल ने। लेकिन नया गंज की व्यापारिक पहचान आज भी देश के सर्वश्रेष्ठ मसालों की सुगंध और स्वाद में बसी हुई है।
नयागंज के सौ साल से अधिक पुराने कारोबारी घराने हरदेवदास सत्यनारायण के 87 वर्षीय वरिष्ठ व्यापारी सत्यनारायण के पास इस बदलाव की यादों का लंबा सिलसिला है। वर्ष 1954 में हाईस्कूल पास करने के बाद उन्होंने दुकान पर बैठना शुरू किया। तब से अब तक उन्होंने बाजार को छोटी मंडी से विशाल थोक व्यापारिक केंद्र बनते देखा है।
उनके मुताबिक 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जब कानपुर गंगा नदी और ईस्ट इंडियन रेलवे के जरिए एक बड़ा औद्योगिक केंद्र बनकर उभरा, तब नया गंज और उससे सटे जनरल गंज के इलाकों ने थोक व्यापार के केंद्र के रूप में आकार लिया।
पांचवीं पीढ़ी में हींग का कारोबार संभाल रहे मदन कपूर बताते हैं कि सात-आठ दशक पहले पूरे नया गंज में करीब 200 से 250 दुकानें थीं। आज यहां 1500 से अधिक दुकानें सक्रिय हैं। दुकानों की बढ़ती संख्या के साथ कारोबार का दायरा और स्वरूप भी पूरी तरह बदल चुका है।
घंटाघर के पास बसा नयागंज
सेंट्रल रेलवे स्टेशन के सामने मौजूद घंटाघर के बगल से निकलने वाली गली में बसा नयागंज किराना बाजार की कारोबारी विरासत ने देश के कई बड़े ब्रांड को शुरुआती आधार दिया। अशोक मसाले और गोल्डी मसाले जैसे ब्रांड की कारोबारी जड़ें इसी मंडी से जुड़ी हैं।
रेल नेटवर्क का मसाला कारोबार को विस्तार देने में अहम भूमिका
किराना व्यापारी विजय अग्रवाल के अनुसार देशभर से अच्छी गुणवत्ता का कच्चा माल मिलने और कानपुर के मजबूत रेल नेटवर्क ने मसाला कारोबार को विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ कारोबार आगे चलकर राष्ट्रीय पहचान तक पहुंचा और कानपुर के मसाला ब्रांडों ने विदेशी बाजारों तक अपनी पहुंच बनाई है।
बिहार, मध्यप्रदेश सहित कई जगहों से आते नयागंज
मेवा व्यापारी गिरीश भाटिया के मुताबिक आजादी से पहले और बाद में भी, बुंदेलखंड, पूर्वांचल, बिहार और मध्य प्रदेश तक के व्यापारी अपनी दुकानों के लिए मेवे, गरम मसाले, दलहन और किराना का सामान खरीदने नयागंज ही आते थे। बदलते समय के साथ नया गंज के सामने चुनौतियां भी बढ़ी हैं। संकरी गलियों में भारी ट्रकों की आवाजाही मुश्किल होने के कारण कई बड़े गोदाम ट्रांसपोर्ट नगर और हाईवे के आसपास स्थानांतरित हो रहे हैं।
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