मेट्रो केबिन में अकेला चालक बार बार छूता है मास्टर बटन, सेंसर से रखी जाएगी नजर
दीपावली त्योहार के बाद रिसर्च एंड डिजाइन स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन की टीम कानपुर शहर आकर मेट्रो ट्रेन में सेंसर लगाए जाने के लिए प्वाइंट चह्नित करेगी ताकि पता चल सके चालक कितने अंतराल में मास्टर बटन टच करता है।

कानपुर, जागरण संवाददाता। शहर में मेट्रो ट्रेन के संचालन जल्द से जल्द शुरू करने के लिए यूपीएमआरसी काफी तेजी से काम कर रही है। मेट्रो ट्रेन को मेन ट्रैक पर चलाकर परखने के बाद अब सेंसर लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए रिसर्च एंड डिजाइन स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) की टीम दीपावली के बाद कानपुर आएगी और ट्रेन में सेंसर लगाने के अलग अलग प्वाइंट चिह्नित करेगी। इसमें डेड मैन आपरेशन टेस्ट भी होगा, जिसके आधार पर यह पता चलेगा कि चालक कितने अंतराल में मास्टर बटन को टच कर रहा है या उसके ना छूने पर कितनी देर में ट्रेन रुक रही है।
क्या होता है मास्टर बटन
मेट्रो के केबिन में चालक के अलावा कोई नहीं रह सकता। ऐसे में कभी चालक बेहोश हो जाए या वह इस लायक ना रह जाए कि ट्रेन को संचालित कर सके तो ट्रेन कुछ सेकेंड में खुद ही रुक जाती है। ट्रेन के कुछ सेकेंड में रुकने का कारण यह होता है कि केबिन में लगे मास्टर बटन को कुछ देर भी अगर चालक ना छुए तो ट्रेन रुक जाती है। सामान्य तौर पर यह स्थिति 10 से 15 सेकेंड रहती है। इसलिए केबिन में मौजूद चालक को हर कुछ सेकेंड में मास्टर बटन को छूना पड़ता है। यह कितने सेकेंड का अंतराल होगा, इसे निदेशक आपरेशन तय करते हैं।
टीम बताएगी कहां लगेंगे सेंसर
अब आरडीएसओ की टीम ट्रेन की टेस्टिंग के दौरान इसका परीक्षण करेगी कि जब मास्टर बटन नहीं छुआ जाता है कि ट्रेन कितनी देर में रुक रही है। इसके अलावा चलते समय ट्रेन का कंपन कितना हो रहा है। ब्रेक का इस्तेमाल करने के बाद ब्रेक देर से तो नहीं लग रहा है। कितना समय लग रहा है। वह तुरंत लग रहा है या नहीं। इसके अलावा कर्व पर ट्रेन की बोगी और उसके ऊपर बनी बोगी में किस तरह की स्थिति पैदा हो रही है। दीपावली के बाद जब आरडीएसओ की टीम आएगी तो वह इन सभी सेंसर टेस्ट के लिए व्यवस्था में जुट जाएगी। ट्रेन में भी इन सेंसर को खास जगह लगाया जाएगा।
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