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कानपुर लूट मामले में इंस्पेक्टर निलंबित, भाजपा नेता ने कर्मियों के बयान से किया इनकार

Published: Wed, 14 Oct 2026 11:21 PM (IST)

कानपुर में भाजपा नेता रमेश सिंह यादव से 34 लाख की लूट के मामले में इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को लापरवाही ...और पढ़ें

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HighLights

  1. लापरवाही पर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह निलंबित किए गए

  2. भाजपा नेता ने कर्मचारियों से पूछताछ से मना किया

  3. पुलिस ने 18 संदिग्धों से पूछताछ की, पूर्व पीएसओ भी

संवाद सहयोगी, बिधनू(कानपुर)। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश मंत्री व बिधनू के पूर्व ब्लाक प्रमुख रमेश सिंह यादव से 34 लाख की लूट के मामले में पुलिस अधिकारी ने सेन पश्चिम पारा के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह की लापरवाही मानी है। जांच में हीलाहवाली करने और लोगों से सही व्यवहार न रखने पर पुलिस आयुक्त बुधवार को निलंबित कर दिया गया।

वहीं, पुलिस अब तक 18 संदिग्धों को पूछताछ के लिए थाने ला चुकी है, जिसमें दो पीड़ित भाजपा नेता के पूर्व पीएसओ भी शामिल हैं। वारदात के समय उनके मोबाइल फोन बंद थे। जांच के दौरान कई सवाल के जवाब पुलिस नहीं खोज पा रही है। फार्म हाउस में 30 कैमरे लगे हैं, लेकिन सिर्फ एक कैमरे में बदमाश अंदर आते और भागते हुए दिखे।

मामले में पुलिस आयुक्त ने बताया कि रमेश यादव कर्मचारियों के बयान लेने से मना कर रहे हैं। उनसे जांच में सहयोग करने के लिए कहा जा रहा है।


सेन पश्चिम पारा के न्यूरी स्थित फार्म हाउस में घुसे नकाबपोश दो बदामश भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश मंत्री रमेश सिंह यादव को तमंचे के बल पर उन्हें बंधक बनाकर 34 लाख के जेवर और नकदी लूट ले गए थे। वारदात के 45 घंटे से अधिक हो गए हैं, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल मंगलवार शाम जब रमेश सिंह यादव के फार्म हाउस पहुंचे तो इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह को देख उनसे टीम के साथ बदमाशों की तलाश करने भेजा, पर वह आसपास रहे। करीब एक घंटे तक पुलिस आयुक्त ने बंद कमरे में रमेश यादव से घटना जानी। उनसे पूछा कि जब बदमाशों ने उनके हाथ-पैर बांधकर मुंह में कपड़ा ठूंसकर टेप लगा दिया तो फिर वह खुद को कैसे खोलकर फोन कर सके।

जिस बाथरूम में उन्हें छोड़ा गया था तो वहां से चार कमरों के दरवाजों से बाहर कैसे निकले। सूचना के लिए फोन किसे और कैसे किया। इस तरह से कई सवाल उनसे पूछे। रमेश यादव ने बताया कि बदमाशों के जाने के बाद उन्होंने बंधे हुए हाथ से मुंह का टेप हटाया था। इसके बाद कपड़ा निकाल। दांतों से बंधे कपड़े से हाथ खोलकर प्रधान को फोन मिला घटना बताई थी।

पुलिस आयुक्त ने घटनास्थल पर जांच की तो फार्म हाउस में लगे कैमरों में मात्र एक कैमरा ही चालू मिला, जहां से बदमाशों के भागते हुए परछाई सी दिखी। जबकि हाल में कैमरा तो लगा मिला, पर 20 दिन से वह खराब था। पुलिस ने 18 संदिग्धों से पूछताछ की। इनमें छह से अधिक लोगों को थाने में भी बैठाया गया। इसमें कई रमेश यादव के कर्मचारी हैं।

इस दौरान पुलिस ने मंगलवार देर रात रमेश यादव के दो पूर्व पीएसओ को भी उठा लिया। बताया गया कि दोनों ने वर्ष 2023 में डेढ़ लाख की चोरी की थी, लेकिन उनके स्वजन के माफी मांगने पर रुपये वापस लेकर उन्हें काम से निकाल दिया था। पुलिस कार्रवाई नहीं की गई थी। दोनों ने पुलिस को बताया कि निकाले जाने के बाद वह दोबारा वहां नहीं गए।

दोनों के मोबाइल की लेकेशन पांच और छह अक्टूबर को फार्म हाउस के आसपास मिली। वहीं घटना के दिन से उनके मोबाइल बंद मिले थे। हालांकि दाेनों ने बताया कि मोबाइल फोन जुआ में हारने पर गिरवी रखा था। इसलिए नंबर बंद था। मामले में पुलिस ने घटनास्थल के आसपास सक्रिय मोबाइल फोन नंंबरों का मोबाइल टावर डाटा डंप कराया है, जबकि 16 लोगों के मोबाइल फोन की काल डिटेल निकलवा रही है।

पुलिस रमेश यादव के कर्मचारियों के बयान लेने के लिए पूछताछ कर रही है, लेकिन रमेश यादव ने बयान देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को लगातार उठाकर पूछताछ की जा रही है, जिससे कर्मचारियों के स्वजन परेशान होकर उनके पास आ रहे हैं।


भाजपा नेता से लूटपाट के मामले की जांच में इंस्पेक्टर की लापरवाही मिलने पर उन्हें निलंबित किया गया है। टीमें घटना के राजफाश में लगी है। घटना काे लेकर कई अनसुलझे सवालों के जवाब के लिए जांच की जा रही है। सभी कर्मियों की भूमिका की जांच के लिए उनके बयान दर्ज करने को बुलाया जा रहा है।
- रघुबीर लाल, पुलिस आयुक्त

 

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