कानपुर की पहली ग्रीन फील्ड डेयरी जो ध्वनि, वायु और जल प्रदूषण से होगी मुक्त
पराग डेयरी परिसर में इंडि़यन डेयरी मशीनरी कारपोरेशन करीब 160 करोड़़ रुपये की लागत से ग्रीन फील्ड़ डेयरी का निर्माण कराया है। जुलाई 2016 में प्लांट बनना शुरू हुआ था जो अब तैयार हो गया और मशीनें भी लग चुकी हैं।

कानपुर, जेएनएन। पराग ड़ेयरी परिसर में बनकर तैयार हुई ग्रीन फील्ड़ डे़यरी पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होगी। डेयरी चालू होने के बाद न तो इससे वायु प्रदूषण होगा और न ही जल प्रदूषण। यहां तक की ध्वनि प्रदूषण भी नहीं होगा। पराग अधिकारियों का कहना है कि डेयरी को इस तरह तैयार की गई है कि इससे किसी भी तरह का प्रदूषण न फैले। यह शत प्रतिशत प्रदूषण मुक्त हो।
पराग डेयरी परिसर में करीब 160 करोड़़ रुपये की लागत से ग्रीन फील्ड़ डे़यरी बनायी जा रही है। इंडि़यन डेयरी मशीनरी कारपोरेशन द्वारा इसका निर्माण किया गया है। जुलाई 2016 में प्लांट शुरू हुआ था। अब यह बनकर तैयार हो गया और मशीनें लग चुकी हैं, सिर्फ फिनिशिंग बाकी है। डे़यरी के पहले चरण में मिल्क प्लांट को चालू किया जाएगा‚ जहां पैकिंग में पराग दूध व उसके अन्य प्रोड़क्ट तैयार होंगे‚ वहीं दूसरे चरण में पाउड़र प्लांट चालू होने से गर्मी में दूध की किल्लत से छुटकारा मिलेगा। वहीं, शहर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए डेयरी को इस तरह से बनाया जा रहा है कि उससे किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले।
पराग डेयरी के अधिकारियों ने बताया कि डेयरी चालू होने के बाद यहां पर लगाये गए बॉयलर को पीएनजी से चलाया जायेगा। डेयरी से निकलने वाला पानी ट्रीटमेंट के बाद निकलेगा‚ इसके लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है। वहीं‚ मशीनों के चलने से किसी प्रकार का शोर भी नहीं होगा। उन्होंने बताया कि डेयरी से आसपास प्रदूषण न हो‚ इसका ख्याल रखकर प्रोजेक्ट तैयार हो।
उन्होंने बताया कि डेयरी परिसर में हरी घास व पेड़़–पौधे भी लगाये जायेंगे। यहीं कारण है कि इसका नाम ग्रीन फील्ड़ डे़यरी रखा गया है। पराग डेयरी के जीएम राजीव वाष्र्णेय ने बताया कि ग्रीन फील्ड डेयरी को पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त बनाया जा रहा है। इसके चालू होने के बाद जल‚ वायु व ध्वनि तीनों में से किसी भी प्रकार का प्रदूषण नहीं होगा।जल‚ वायु व ध्वनि तीनों प्रदूषण से मुक्त होगी।
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