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कानपुर नकली सीमेंट मामले पर पुलिस कमिश्नर का सख्त आदेश; घरों में दबिश दो और मेरठ टीम भेजो, आरोपितों को गिरफ्तार करो

Published: Sat, 17 Oct 2026 09:33 PM (IST)

कानपुर के पनकी में नकली सीमेंट फैक्ट्री मामले में पुलिस अब तक मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। ...और पढ़ें

नकली सीमेंट। जागरण अर्काइव

नकली सीमेंट। जागरण अर्काइव

HighLights

  1. पनकी स्थित फैक्ट्री में बनती थी नकली सीमेंट, तीन साल में 10 लाख से ज्यादा बाेरियां खपा चुके आरोपित

  2. फैक्ट्री के संचालक दो भाई व मेरठ के दो साझेदार छापेमारी के बाद से भागे, अरेस्ट स्टे लेने की फिराक में

जागरण संवाददाता, कानपुर। पनकी के इस्पात नगर में एसीसी व अंबुजा के नाम पर नकली सीमेंट बनाने वाली फैक्ट्री के संचालक दो भाई व मेरठ के रहने वाले उनके दो साझेदारों का पुलिस अब तक पता नहीं कर सकी। जबकि इस गिरोह ने तीन साल में 10 लाख से ज्यादा नकली सीमेंट की बोरियां कई बड़ी इमारतों के निर्माण, सीएम ग्रिड, लखनऊ एयरपोर्ट निर्माण समेत जगहों पर खपा चुका है।

चार दिन बाद भी आरोपित संचालकों व उनके साझेदारों का पता न चलने पर पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने शनिवार को पनकी इंस्पेक्टर दिनेश सिंह बिष्ट को फोन कर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आरोपिताें के घरों में दबिश दो। मेरठ टीम भेजा, लेकिन उन्हें गिरफ्तार करो। इंस्पेक्टर ने भी जल्द आरोपितों की गिरफ्तारी करने की बात कही।

अदाणी ग्रुप के कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक की शिकायत पर पुलिस ने पनकी के इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में बुधवार को छापा मारा था, जहां अदाणी ग्रुप की एसीसी व अंबुजा कंपनी के नाम की नकली सीमेंट बन रह थी। फैक्ट्री से 1000 से अधिक सीमेंट की भरी व 3000 हजार से अधिक खाली बोरियां व काफी मात्रा में खुली नकली सीमेंट बरामद हुई थी।

पुलिस ने एक मुंशी राहुल को भी गिरफ्तार किया था। उसने बताया कि फैक्ट्री लालबंगला निवासी नीरज गुप्ता और उसके भाई धीरज गुप्ता की, जिसमें साझेदार मेरठ के सुनील मित्तल व निशांत मित्तल हैं। सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस आयुक्त ने बताया कि प्राथमिक जांच में फैक्ट्री के संचालक व उनके साझेदार एसीसी व अंबुजा सीमेंट की तीन साल से डीलरशिप है।

उसकी आड़ में वह नकली सीमेंट की फैक्ट्री खोलकर हर महीने 30 हजार से अधिक नकली सीमेंट की बोरियां शहर और आसपास जिलों की बड़ी इमारतों के निर्माण, सीएम ग्रिड और एयरपोर्ट निर्माण व अन्य कई बड़े ठेकेदारों के माध्यम से सप्लाई करता है। इस हिसाब से तीन साल में वह करीब 10.08 लाख सीमेंट की बाेरियां सप्लाई कर चुका है।

पुलिस आयुक्त ने शनिवार को पनकी इंस्पेक्टर को फोन कर नाराजगी जताई। उनसे पूछा कि अब तक आरोपितों को क्यों पकड़े गए।क्या आरोपित खुद तुम्हारे पास आएंगे। उनके घर दबिश दो, मेरठ में टीम भेजा, पर उनकी गिरफ्तारी जरूर होनी है।

250 से 280 रुपये तक बेचते थे नकली सीमेंट, 10 जिलों में खपाते थे बोरियां

जेल भेजे गए मुंशी ने पुलिस को बताया था कि फैक्ट्री में विभिन्न कंपनियों की एक्सपायरी सीमेंट झांसी और ललितपुर समेत आसपास के सीमेंट के गोदामों से नीलामी में काफी कम दामों पर खरीदी जाती है। हर बोरी 10 से 20 रुपये के हिसाब से मिल जाती थी, जिसे लाकर मिक्सर मशीन में पिसवाते हैं और फिर बोरियों में भरकर आठ से 10 जिलों में खपाते हैं। नामचीन कंपनियों की सीमेंट की बोरियो की प्रिंटिंग शहर के ही एक प्रिंटिंग प्रेस से कराई जाती थी। एक सादी बोरी की खरीद और प्रिंटिंग में करीब छह रुपये खर्च आता है, जबकि एक तैयार सीमेंट की बोरी 250 से लेकर 280 रुपये तक बेच दी जाती है।

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