ट्रंप के फैसले से कानपुर के निर्यातकों को मिली बड़ी राहत, 2500 करोड़ के आर्डर का रास्ता साफ
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ पर अस्थायी रोक से कानपुर के निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। इससे ...और पढ़ें

यह एक प्रतीकात्मक फोटो है। इंटरनेट मीडिया
HighLights
ट्रंप ने अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ पर अस्थायी रोक लगाई
कानपुर के 2500 करोड़ रुपये के निर्यात को राहत मिली
लेदर, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सेक्टर को फायदा होगा
जागरण संवाददाता, कानपुर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ के क्रियान्वयन पर अस्थायी रोक लगाने के फैसले से कानपुर के निर्यातकों ने राहत की उम्मीद जताई है। अमेरिका को होने वाले करीब 2500 करोड़ रुपये के सालाना निर्यात पर टैरिफ बढ़ने की आशंका से बना दबाव फिलहाल कम होने की उम्मीद है। इससे लेदर, सैडलरी, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर के रुके हुए आर्डर भेजे जा सकेंगे वहीं कारोबारियों को नए आर्डर मिलने की भी उम्मीद है।
निर्यात-आयात विशेषज्ञ जफर फिरोज के मुताबिक, कानपुर के कुल सालाना निर्यात कारोबार में अमेरिकी बाजार की हिस्सेदारी करीब 22 से 25 प्रतिशत है। शहर से प्रतिवर्ष 10,500 से 11,000 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ नीति में स्थिरता से निर्यातकों को आर्डर, कीमत और शिपमेंट की योजना बनाने में सहूलियत मिल सकती है।
कानपुर से अमेरिका को होने वाले निर्यात में लेदर और सैडलरी की प्रमुख हिस्सेदारी है। फिनिश्ड लेदर, सेफ्टी शूज, लेदर बैग, हार्नेस और घुड़सवारी उपकरणों का सालाना निर्यात करीब 1500 से 1700 करोड़ रुपये का है। टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र से 450 से 550 करोड़ रुपये के काटन फैब्रिक, वर्कवियर, होजरी और होम फर्निशिंग उत्पाद भेजे जाते हैं। वहीं, इंजीनियरिंग गुड्स का निर्यात करीब 200 से 250 करोड़ रुपये है।
सैडलरी निर्यातक आदित्य गुप्ता के अनुसार, अतिरिक्त टैरिफ की आशंका से अमेरिकी आयातक भारतीय निर्यातकों पर कीमतें घटाने का दबाव बना रहे थे। इससे पुराने आर्डर भी रुक गए थे। अब पुराने आर्डर भी जल्दी भेजे जा सकेंगे और नए आर्डर पर भी बात होगी। नार्दर्न इंडिया होजरी एवं मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के महामंत्री प्रमोद सुराणा के अनुसार होजरी एवं गारमेंट एक्सपोर्टर्स को भी इससे राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश के निर्यातकों ने अमेरिका से अपनी उम्मीदें लगभग खत्म कर दी थीं लेकिन अब नए सिरे से संभावना बनी है। हालांकि ट्रंप के फैसलों पर ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसलिए भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और आगे की नीतिगत घोषणाओं पर निर्यातकों को नजर रखनी होगी।
