कानपुर हादसा : सुरक्षा के मानक पर कितनी खरी हैं ई-बस, हादसे से सामने आई चौंकाने वाली हकीकत
कानपुर में टाटमिल चौराहे के पास हुए हादसे की पड़ताल के साथ ई-बस संचालन में लापरवाही की भी परतें खुलने लगी हैं। जांच समिति ने ई-बस संचालन के लिए की गई व्यवस्थाओं में खामियां पकड़ी हैं। बस का पैनिक बटन ही काम नहीं कर रहा था।

कानपुर, जागरण संवाददाता। छह लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले ई-बस हादसे की वजह गंभीर लापरवाही थी। सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाता और अफसर-कर्मचारी सतर्क होते तो हादसे को टाला जा सकता था। हादसे की जांच कर रही समिति का निष्कर्ष है कि ई-बसों को बिना सुरक्षा मानकों को पूरे किए ही सड़कों पर उतार दिया गया था।
क्या हुई घटना : रविवार रात घंटाघर पुल से टाटमिल की ओर जा रही बेकाबू ई-बस ने कई वाहनों को कुचल दिया था, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और नौ गंभीर रूप से घायल हो गए। शराब के नशे में वाहन चलाने के आरोप में गिरफ्तार बस चालक सतेंद्र को हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज करके जेल भेजा जा चुका है। इस हादसे की जांच के लिए शासन ने नगर विकास अनुभाग के सचिव अनिल कुमार व एडीजी जोन कानपुर नगर भानु भाष्कर के नेतृत्व में एक जांच समिति का गठन किया है। हादसे के कारणों के अलावा जांच समिति को ई बसों के संचालन में कमियों और व्यवस्थागत खामियों के बारे में भी पड़ताल करनी है।
परिचालक ने दबाया था पैनिक बटन : जांच समिति के सदस्यों ने हादसाग्रस्त बस के परिचालक आलोक कुमार से लंबी पूछताछ की। जांच अधिकारियों ने आलोक कुमार से कई ऐसा बातें उगलवा लीं, जिससे ई-बसों का संचालन करने वाली एजेंसी पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। जांच समिति से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक आलोक ने बताया कि सतेंद्र भयंकर नशे में था। रात जब चालक सतेंद्र का नशा बढ़ा तो परिचालक आलोक ने बस में लगी पैनिक बटन दबा दी। यह बटन किसी भी आपात स्थिति की सूचना देने के लिए बस में लगाई गई है, लेकिन इस बटन ने काम नहीं किया।
अबतक नहीं बना कंट्रोल रूम : आलोक के इस कबूलनामे पर जब जांच अधिकारियों ने पैनिक बटन द्वारा काम न किए जाने की पड़ताल शुरू की तो बड़ी बात सामने आई। पता चला कि जिस साफ्टवेयर का प्रयोग करके ई-बसों में पैनिक बटन को क्रियाशील किया जाना था वह तो अभी अपलोड ही नहीं हुआ है। बात और आगे बढ़ी तो सामने आया कि ई बसों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए एक कंट्रोल रूम बनना है। कंट्रोल रूम निर्माणाधीन है और इसके 26 फरवरी से क्रियाशील होने की संभावना है। सवाल यह है कि जब सुरक्षा के मानक ही पूरे नहीं थे तो बसों का संचालन शुरू करने की क्या जल्दबाजी थी।
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