CSJMU Kanpur के डिग्री कालेजों में नहीं भर रहीं सीटें, डीएवी, डीबीएस और बीएनडी में बड़ी संख्या में सीटें खाली
सीएसजेएमयू से संबद्ध कानपुर के प्रतिष्ठित डीएवी, डीबीएस और बीएनडी जैसे डिग्री कॉलेजों में स्नातक व परास्नातक की बड़ी संख्या ...और पढ़ें

HighLights
कानपुर के प्रतिष्ठित कॉलेजों में स्नातक, परास्नातक की सीटें खाली
सीयूईटी की लंबी प्रक्रिया, रोजगारपरक कोर्स की कमी प्रमुख वजह
विश्वविद्यालय के प्रयासों के बावजूद प्रवेश प्रक्रिया में संकट बरकरार
जागरण संवाददाता, कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) से संबद्ध डिग्री कालेजों में प्रवेश की रफ्तार इस बार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। स्थिति यह है कि शहर के प्रतिष्ठित डीएवी, डीबीएस और बीएनडी जैसे महाविद्यालयों में भी स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों की बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं।
प्रवेश प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंचने के बावजूद सीटें न भरने से कालेजों के सामने विद्यार्थियों को आकर्षित करने की चुनौती खड़ी हो गई है। विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश प्रक्रिया को गति देने और विद्यार्थियों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए, लेकिन इसका अपेक्षित असर नहीं दिखा।
सीयूईटी की लंबी प्रक्रिया का भी असर
कालेजों के प्राचार्यों के मुताबिक इस बार सीयूईटी की प्रक्रिया लंबी खिंचने का असर भी स्थानीय डिग्री कालेजों के प्रवेश पर पड़ा है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करते रहे। इसके अलावा विद्यार्थियों का रुझान बीटेक, मैनेजमेंट, कंप्यूटर, फार्मेसी सहित रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ा है। पारंपरिक बीए, बीएससी और बीकाम पाठ्यक्रमों में रुचि पहले की तुलना में कम हुई है।
इन पाठ्यक्रम में छात्रों की प्राथमिकता
पीपीएन कालेज के प्राचार्य प्रो. अनुप कुमार सिंह के मुताबिक विद्यार्थियों की पहली प्राथमिकता अब ऐसे पाठ्यक्रम हैं, जिनमें उन्हें पढ़ाई के साथ रोजगार के अवसर भी दिखाई दें। डिग्री कालेजों को भी समय के साथ पाठ्यक्रमों में बदलाव और नए रोजगारपरक कोर्स शुरू करने की दिशा में काम करना होगा।
अंतिम समय तक विकल्प तलाशते छात्र
डीबीएस कालेज के प्राचार्य प्रो. एके मिश्रा ने बताया कि सीयूईटी सहित विभिन्न प्रवेश प्रक्रियाओं के कारण विद्यार्थी अंतिम समय तक विकल्प तलाशते हैं। इसके साथ ही पारंपरिक पाठ्यक्रमों के प्रति रुझान कम होना भी प्रवेश कम होने की प्रमुख वजह है।
विश्वविद्यालय ने किए प्रयास, फिर भी संकट बरकरार
राजभवन की ओर से इस वर्ष डिग्री कालेजों में प्रवेश की स्थिति को सुधारने के लिए विश्वविद्यालय को अपनी निगरानी में प्रवेश प्रक्रिया कराने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद विश्वविद्यालय ने सभी राजकीय व एडेड डिग्री कालेजों में प्रवेश बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार कराने के साथ ही शिक्षकों को कालेज के आसपास के क्षेत्रों में प्रभात फेरी व सम्पर्क के माध्यम से प्रवेश बढ़ाने के प्रयास शुरू किए थे। इसके साथ ही विश्वविद्यालय डिग्री कालेजों के प्रवेश की हर सप्ताह समीक्षा भी करता रहा। इसके बावजूद प्रवेश प्रक्रिया लगभग समाप्ति की ओर पहुंचने पर भी तीनों बड़े कालेजों में सीटों का बड़ा हिस्सा खाली है। ऐसे में अब कालेजों को खाली सीटें भरने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। यदि अंतिम दौर में भी पर्याप्त प्रवेश नहीं हुए तो इन सीटों के रिक्त रह जाने की आशंका बढ़ गई है।
केस 1
डीबीएस कालेज में स्नातक की 3900 सीटों में 902 प्रवेश हुए हैं। यहां 2998 सीटें खाली हैं। परास्नातक की 2653 सीटों में 601 प्रवेश हुए हैं और 2052 सीटों पर प्रवेश होना बाकी है।
केस 2
डीएवी कालेज में स्नातक की 4180 सीटों के सापेक्ष अब तक 1894 प्रवेश हुए हैं। यानी करीब 45 प्रतिशत सीटें ही भर सकी हैं और 2286 सीटें खाली हैं। परास्नातक में 3533 सीटों में 702 प्रवेश हुए हैं, जबकि 2831 सीटें रिक्त हैं।
केस 3
बीएनडी कालेज में स्नातक की 1400 सीटों में महज 400 प्रवेश हुए हैं। यानी 1000 सीटें खाली हैं। परास्नातक में 700 सीटों के मुकाबले 100 प्रवेश हुए हैं और 600 सीटें रिक्त हैं।
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