नीलामी में खरीदी खराब सीमेंट कानपुर एयरपोर्ट-CM ग्रिड में की सप्लाई; मेरठ से आरोपित गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला
कानपुर में एक्सपायरी सीमेंट को नई बोरियों में पैक कर सीएम ग्रिड और लखनऊ एयरपोर्ट जैसे निर्माण कार्यों में सप्लाई ...और पढ़ें

आरोपित निशांत मित्तल। पुलिस
HighLights
एयरपोर्ट-सीएम ग्रिड में एक्सपायरी सीमेंट सप्लाई करने वाले गिरोह का एक आरोपित मेरठ से गिरफ्तार
पुलिस को कोर्ट से नहीं मिला आरोपित का न्यायिक रिमांड, एक लाख का बांड भरवाकर रिहा किया
बोला- पानी पड़ने या बोरी फटने से खराब हुई सीमेंट नीलामी में खरीद फैक्ट्री संचालक को बेचता था
दिल्ली के प्रीतमपुरा के एक युवक का नाम कबूला, सोमवार रात पुलिस की दबिश से पहले ही भाग निकला
जागरण संवाददाता, कानपुर। एक्सपायरी सीमेंट को नई बोरियों में पैक कर बेचने वाले गिरोह के एक और आरोपित को पुलिस ने मेरठ से तो गिरफ्तार किया, लेकिन पुलिस की मेहनत पर पानी फिर गया। पुलिस आरोपित का न्यायिक रिमांड स्वीकृत नहीं किया। एक लाख रुपये का बांड भरवाकर उसे रिहा कर दिया।
वहीं, उसके पिता भी फरार हैं। वह और दिल्ली के प्रीतमपुरा का युवक पानी पड़ने या बोरी फटने से खराब हुई सीमेंट को नीलामी में खरीदकर फैक्ट्री संचालक भाइयों को बेचता था। दोनों भाई सीमेंट को रीसाइकिल (खराब माल को नए तरीके से बनाना) कर एसीसी-अंबुजा कंपनी की बोरी में पैककर विभिन्न जिलाें के निर्माण कार्यों में सप्लाई कराते थे। इसमें सीएम ग्रिड, लखनऊ एयरपोर्ट व समेत निर्माण कार्यों है।
पुलिस प्रीतमपुरा के युवक की तलाश में दिल्ली पहुंची पर वह पहले से ही भाग निकला। आरोपित ने पुलिस को गिरोह से जुड़े कई राज बताए हैं। पुलिस बरामद सीमेंट के नमूने ले चुकी है। उसे कंपनी के एसीसी- अंबुजा कंपनी के लैब और आइआइटी से जांच कराएगी।
अदाणी ग्रुप के कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक की शिकायत पर पुलिस ने इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में बुधवार को छापा मारा था, जहां अदाणी ग्रुप की एसीसी व अंबुजा कंपनी के नाम की बोरी में एक्सपायरी सीमेंट भरकर सप्लाई की जाती थी। पुलिस ने एक मुंशी राहुल को भी गिरफ्तार कर जेल भेला था।
मुंशी व दोनों भाई और साझेदार निशांत मित्तल और उसके पिता सुनील मित्तल के खिलाफ पनकी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि निशांत की लोकेशन मेरठ में मिलने पर सोमवार शाम पहुंची पुलिस ने उसे दबोच लिया था, जबकि उसके पिता फरार हो गए थे। निशांत से उन्होंने मंगलवार को पूछताछ की थी।
उसने बताया कि वह एमकाम पास है और पिता संग अपनी त्रिदेव इंटरप्राइजेज फर्म संचालित करता है, जिसके जरिए वह सीमेंट जिसमें बारिश का या अन्य पानी पड़ने व बोरियां फटने से खराब हो जाती हैं। उन्हें स्क्रैप के रूप में नीलामी में खरीदते हैं, जिसे अलग-अलग जिलों में गमले बनाने, इंटरलाकिंग सड़क के लिए ईंट बनाने समेत कार्याें में इस्तेमाल करने के लिए बेचते हैं।
कानपुर में लाल बंगला निवासी नीरज-धीरज को हर महीने 15 हजार बोरियां माल देता है। उसके मुताबिक, उसकी तरह दिल्ली के प्रीतमपुरा का पवन गोयल भी यही काम करता है। वह दिल्ली, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, रायबरेली समेत कई जिलों में नीलामी में खराब सीमेंट लेकर दोनों भाइयों को बेचते हैं। दोनों भाई अलग-अलग जगहों पर बोरियां एसीसी-अंबुजा नाम से छपाई कराते हैं।
निशांत ने बताया कि वह 30 रुपये लाभ कमा 120 रुपये में नीरज को नीलामी में खरीदी सीमेंट बेचता था, जबकि वह रीसाइकिल कर सीमेंट की प्रति बोरी 380 से 400 रुपये तक में सप्लाई करता था। पुलिस आयुक्त ने बताया कि फैक्ट्री संचालक भाइयों की गिरफ्तारी के बाद माल कहां-कहां सप्लाई होता और कब से सप्लाई हो रहा था समेत जानकारी मिल सकेगी।
