कानपुर, जेएनएन। जेईई एडवांस्ड के मेधावियों की पहली पसंद कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग है। उसके लिए सफल छात्र-छात्राएं आइआइटी दिल्ली और बांबे में दाखिला लेना चाह रहे हैं। वहां एडमिशन न मिलने पर आइआइटी कानपुर से इंजीनियरिंग कर सकते हैं। ज्यादातर मेधावी साफ्टवेयर, माडलिंग, कोडिंग और हैकिंग में दक्ष होना चाहते हैं, जबकि कुछ स्टार्टअप करने का सपना देख रहे हैं। टापरों को कामयाबी पर स्वजन, रिश्तेदारों की ओर से बधाइयां मिल रही हैैं। आल इंडिया और कानपुर जोन के टापरों में शहर से तो किसी छात्र ने जगह नहीं बनाई लेकिन शहर की टापर सूची में कुशाग्र गुप्ता पहले पायदान पर हैं।

कुशाग्र ने किया शहर में टाप

जेईई एडवांस्ड में विकास नगर के कुशाग्र गुप्ता ने कानपुर शहर में टाप किया है्, उनकी आल इंडिया 109वीं रैंक है। कानपुर जोन में उनका पांचवां स्थान है। कुशाग्र गुप्ता आइआइटी दिल्ली या कानपुर से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग करना चाहते हैं। उनके 12वीं में 95.2 फीसद अंक आए थे। वह इंजीनियरिंग के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी कर सकते हैं। पिता शरद गुप्ता का स्वर्गवास हो चुका है। मां अंजू गुप्ता कानपुर पालीटेक्निक में लेक्चरार हैं। बड़ी बहन प्रबंधन की पढ़ाई कर रही हैं। कुशाग्र के मुताबिक उसकी कामयाबी में मां का बहुत बड़ा योगदान है। उनको देखकर बस मेहनत करने की सोची। शहर में टाप करने पर बेहद खुशी है। मां की झोली खुशियों से भरनी है।

दसवीं के बाद से छोड़ा इंटरनेट मीडिया

आर्य नगर के पंकज झमतानी की आल इंडिया 1251 रैंक आई है। वह कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग से बीटेक करना चाहते हैं। उनके मुताबिक दसवीं के बाद से इंटरनेट मीडिया को छोड़ दिया। 12वीं में 96.5 फीसद अंक मिले। पिता मुकेश झमतानी व्यापारी और मां नीता झमतानी गृहणी हैं।

कामयाबी के लिए मेहनत जरूरी

आर्य नगर के रचित गुप्ता की 1484 रैंक आई है। उनके मुताबिक कामयाबी के लिए मेहनत जरूरी है। उन्होंने सफलता हासिल करने के लिए प्रेक्टिस सेट लगाए। कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक करने की सोच रहे हैं। पिता तरुण गुप्ता सीए और मांग रेनू हाउस वाइफ हैं।

सही राह पर चलकर हुआ सफल

आजाद नगर निवासी संचित अवस्थी की 2122 रैंक आई है। वह साफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं। पिता धर्मेंद्र अवस्थी सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य और मां नीलम अवस्थी गृहणी हैं। 12वीं में 95.8 फीसद अंक हासिल किए। संचित के मुताबिक वह शिक्षकों के दिखाए मार्ग पर चलकर सफल हुआ है।

रोजाना सात से आठ घंटे की पढ़ाई

सिविल लाइंस के सचिन जालान ने 1368 रैंक हासिल की। वह कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग से बीटेक करने की सोच रहे हैं। रोजाना सात से आठ घंटे और परीक्षा के दौरान 10 घंटे तक पढ़ाई की। 12 वीं में 96 फीसद नंबर हासिल किए। पिता हेमंत कुमार जालान व्यापारी और मां रीता हाउस वाइफ हैं।

रिविजन और सेल्फ स्टडी से कामयाबी

सिविल लाइंस के अक्षत बाजपेई की 1602 रैंक आई है। उनके मुताबिक सेल्फ स्टडी और आनलाइन पाठ्यक्रमों से लगातार रिविजन करने से कामयाबी हासिल हुई। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग से बीटेक करना चाहते हैं। पिता अमित बाजपेई व्यापारी और मां पूनम हाउस वाइफ हैं। 12वीं की पढ़ाई 95 प्रतिशत अंकों के साथ पास की।

10वीं और 12वीं के टापर की 323 रैंक

शहर के विजय नगर निवासी गौतम रघुवंशी की अनुसूचित जाति वर्ग में 323 रैंक आई है। उन्होंने ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन से 92 फीसद अंकों के साथ शहर में टाप किया था। 10 वीं में भी सर्वाेच्च अंक आए थे। गौतम के मुताबिक वह बीटेक करने के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी करेगा। पिता धीरज रघुवंशी केडीए में हैं।

नियमित पढ़ाई से मिली सफलता

कैंट के यश चंद्रा की 1144 रैंक आई है। वह आइआइटी से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं। 12वीं में 98.2 फीसद अंक हासिल किए। पिता प्रवीण चंद्र आर्डनेंस फैक्ट्री और मां रीता चंद्रा गृहणी हैं। यश के मुताबिक उसे नियमित पढ़ाई से सफलता मिली।

Edited By: Abhishek Agnihotri