Kanpur-Lucknow Traffic Alert: जाजमऊ पुराने गंगा पुल पर 3 महीने का डायवर्जन, 13 सितंबर दोपहर 12 बजे से भारी वाहनों की NO-Entry
जाजमऊ के पुराने गंगा पुल की मरम्मत के लिए 13 सितंबर से 3 महीने तक भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित ...और पढ़ें

जाजमऊ पुल मरम्मत कार्य के लिए तैयारी करता मजदूर। एनएचएआई
HighLights
आज दोपहर 12 बजे उन्नाव से कानपुर की ओर जाजमऊ गंगा पुल से नहीं जाएंगे भारी वाहन
उन्नाव जिलाधिकारी घनश्याम मीना ने डायवर्जन की दी अनुमति, एनएचएआइ को भेजा पत्र
13 सितंबर से दोपहर 12 बजे से 13 दिसंबर रात 12 बजे तक लागू रहेगा डायवर्जन
जागरण संवाददाता, कानपुर। Jajmau Ganga Bridge Diversion: जाजमऊ के पुराने गंगा पुल की मरम्मत के लिए तीन माह के लिए भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। लखनऊ से कानपुर की ओर आने वाले भारी वाहनों को बक्सर मोड़ से डायवर्ट करके फतेहपुर से होते हुए कानपुर,इटावा और प्रयागराज की ओर भेजा जाएगा।
वहीं कानपुर से लखनऊ की ओर जाने के लिए नए जाजमऊ गंगा पुल से वाहनों का आवागमन चलता रहेगा। करीब 70 वर्ष पुराने गंगा पुल की मरम्मत के लिए लंबे समय से लंबित डायवर्जन को लेकर शनिवार देर शाम उन्नाव जिलाधिकारी घनश्याम मीना के अनुमति पत्र के बाद स्पष्ट हो गई है।
उन्नाव के जिलाधिकारी ने डायवर्जन को मंजूरी देते हुए एसपी जयप्रकाश सिंह को पत्र भेज दिया है। वहीं एनएचएआइ के परियोजना निदेशक पंकज यादव को भी अनुमति पत्र मिल गया है। इसके बाद 13 सितंबर रविवार को दोपहर 12 बजे से डायवर्जन लागू कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था 13 दिसंबर की रात 12 बजे तक, यानी तीन माह तक प्रभावी रहेगी।
एनएचएआइ को पुराने जाजमऊ गंगा पुल के 28 बेयरिंग बदलने के साथ ही पुल के ऊपरी हिस्से की मरम्मत करनी है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से करीब 90 दिन तक पुल पर भारी वाहनों का यातायात प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि पांच टन तक के वाहन जैसे कार,बाइक के साथ ही अन्य छोटे वाहनों की निकलने की अनुमति रहेगी।
अप्रैल से चल रही थी अनुमति की कवायद
एनएचएआइ अप्रैल से ही पुल की मरम्मत के लिए डायवर्जन की अनुमति मांग रहा था। कानपुर और फतेहपुर प्रशासन ने एक सितंबर से डायवर्जन की अनुमति दे दी थी, लेकिन उन्नाव प्रशासन और पुलिस की आपत्तियों के कारण अंतिम सहमति नहीं बन पा रही थी। मार्ग और वैकल्पिक रास्तों को लेकर कई स्तर पर मंथन के बाद अब उन्नाव प्रशासन ने शनिवार देर शाम अनुमति दे दी।
कार और बाइक जैसे हल्के वाहनों का आवागमन जारी रहेगा
एनएचएआई(NHAI) के परियोजना निदेशक पंकज यादव के मुताबिक, पुल की मरम्मत जरूरी है। कार्य के दौरान यातायात को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित किया जाएगा। पुल के निचले हिस्से की मरम्मत के दौरान कार और बाइक जैसे हल्के वाहनों के आवागमन को जारी रखने का प्रयास रहेगा। ऊपरी सतह पर काम शुरू होने के बाद स्थिति के अनुसार पुल को पूरी तरह बंद किया जाएगा।
बक्सर पुल पर बढ़ेगा दबाव
डायवर्जन के बाद बक्सर गंगा पुल और फतेहपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ने की आशंका है। उन्नाव से आने वाले भारी वाहनों को बक्सर मोड़ से एनएच-19 के रास्ते फतेहपुर की ओर भेजा जाएगा। इससे पहले से व्यस्त मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। सबसे बड़ी चुनौती सरैया क्रासिंग के पास सामने आ सकती है। यहां रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है।
यहां होगी मुसीबत
रेलवे फाटक भी करीब हर आधे घंटे में 10 से 15 मिनट तक बंद रहता है। भारी वाहनों की संख्या बढ़ने पर फाटक के दोनों तरफ लंबी कतार लगने और जाम की स्थिति बनने की आशंका है। हालांकि उन्नाव प्रशासन की ओर से डायवर्जन को लेकर केवल बक्सर मोड़ से जाने की अनुमति प्रदान की गई है। इसके अलावा बक्सर गंगा पुल तथा रायबरेली के लालगंज स्थित गेगासो गंगा पुल पर भी वाहनों का दबाव बढ़ेगा।
इन मार्गों से भेजे जाएंगे वाहन
डायवर्जन व्यवस्था के तहत अलग-अलग गंतव्यों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं। उन्नाव से कानपुर जाने वाले वाहन एनएच-31 से बक्सर मोड़ और फिर एनएच-19 के रास्ते कानपुर पहुंचेंगे। उन्नाव से औरैया-इटावा जाने वाले वाहनों को गंगा एक्सप्रेसवे से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की ओर भेजा जाएगा। बांदा और महोबा जाने वाले वाहन एनएच-31 से लालगंज और फतेहपुर होते हुए आगे जाएंगे। हमीरपुर, झांसी और मुंबई की ओर जाने वाले वाहनों को एनएच-31, बक्सर मोड़, एनएच-19, चौड़गरा, एसएच-46 और घाटमपुर होते हुए एनएच-34 से भेजे जाएंगे।
रोडवेज बसों के संचालन पर असमंजस
डायवर्जन को लेकर सबसे बड़ी चिंता रोडवेज बसों के संचालन की है। उप्र सड़क राज्य परिवहन निगम के कानपुर परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक महेश कुमार ने बताया कि लखनऊ से कानपुर आने वाली बसों को पुराने गंगा पुल से रोकने संबंधी कोई आधिकारिक सूचना अभी निगम को नहीं मिली है। यदि प्रशासन बसों को भी पुराने पुल से आने की अनुमति नहीं देता है तो लखनऊ से कानपुर आने वाली बसों को उन्नाव और आसपास के क्षेत्रों से घूमकर आना पड़ेगा। इसको लेकर मुख्यालय को जानकारी भेजी जाएगी,जो मुख्यालय स्तर से निर्णय होगा उसका अनुपालन किया जाएगा।
