कानपुर, [जागरण स्पेशल]। Internet Sensation ऐसा कहा जाता है कि...दूसरों को हंसाने वाले अक्सर खुद मुस्कुराने की वजह ढूंढ़ते हैं। यकीनन ये सिर्फ एक कलाकार ही कर सकता है। अपने किरदार और व्यंग्य शैली से दूसरों को हंसाना कला भी है और पुण्य भी, लेकिन जरा सोचिए! हुनर की चाशनी में दिलकश आवाज की भी थोड़ी सी मिठास घुल जाए तो वह व्यक्ति प्रतिभाओं का कितना धनी होगा। हम बात करने जा रहे हैं रेडियो सिटी, कानपुर के आरजे राघव द्विवेदी की, जिनके वीडियो इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर खूब तहलका मचा रहे हैं।

 कनपुरियों की मॉर्निंग को करते हैं गुड

104.8 एफएम पर सुबह सात बजे आरजे राघव के दिलकश अंदाज में गुड मॉर्निंग कानपुर कहते ही कनपुरियों की मॉर्निंग सच में गुड हो जाती है। शो के दौरान उनका 'रग-रग में रेडियो सिटी' कहना श्रोताओं (लिसनर्स/Listeners) को अगले गाने की प्रतीक्षा में उत्कंठित करता है। यहां पर मॉर्निंग शो, इवनिंग शो के अलावा स्टेज शो व सिने स्टार को भी ये होस्ट कर चुके हैं। आजकल राघव ने 'ये तूने क्या किया', 'ताल से ताल मिला', 'मेरी आशिकी क्या रंग लाई', 'बिल्लो रानी' जैसे हिट गीतों पर अपने अभिनय और लिप सिंक (Lip Sync)  के वीडियो बनाकर युवाओं के दिलों में खास जगह बनाई है। यही कारण है कि इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर उनके इन वीडियोज के व्यूअर्स (Viewers) की संख्या में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है। राघव के इन वीडियोज को देखकर अब तक छह करोड़ लोग उन्हें अपना प्यार दे चुके हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर उनके आठ लाख फॉलोअर हैं। शहर में होने वाले कई इवेंट्स में वे बतौर चीफ गेस्ट शरीक होते हैं और वहां भी अपने अंदाज से लोगों को दीवाना बना देते हैं। कॉलेज की फ्रेशर पार्टी हो या एनुअल फंक्शन (Annual Function) स्टूडेंट्स के साथ राघव प्राय: सेल्फी क्लिक कराते नजर आते हैं।

विषम परिस्थितियों से लड़कर बनाई अपनी पहचान

मूल रूप से इटावा के निवाड़ी कला निवासी व कानपुर दक्षिण क्षेत्र में रह रहे राघव ने बताया कि मुश्किलों ने राहों में बड़े कांटे बिछाए। वर्ष 2009 में पिता श्रवण कुमार द्विवेदी गुमशुदा हो गए थे। बड़ी तलाश के बाद भी वह नहीं मिले। उन दिनों वह अपनी मां सुषमा व बहन सोनाली के साथ ग्वालियर में रहते थे। पिता के बाद घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। बचपन से रेडियो सुनने के शौक के चलते आरजे बनने की ही ठानी। ग्वालियर में ही एक रेडियो स्टेशन से जुड़कर काम करने लगे। उसके बाद रायपुर में दूसरे रेडियो स्टेशन के लिए काम किया। वर्ष 2014 में ग्वालियर से कानपुर आए और 2016 में रेडियो सिटी से जुड़ गए।

कोरोना संकट से पहले चलाया था एक अभियान

आरजे राघव अपना काम केवल स्टूडियो तक ही सीमित नहीं रखते, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण 2019 में देखने को मिला था। जब रेडियो सिटी की टीम के साथ शहर में हादसों को दावत दे रहे गड्ढों को इन्होंने गड्ढा पहलवान का नाम दिया था। इतना ही नहीं उस पर मानवरूपी पेंटिंग बनाकर लोगों को सतर्क करने का काम किया था। हालांकि उनके इस प्रयास ने फेसबुक पर काफी वाहवाही लूटी थी।

 

कोरोना काल में सिखाया सकारात्मक रहें

उन्हें सबसे बड़ी प्रसिद्धि कोरोना काल में बनाए गए उन वीडियो से मिली, जिसमें वह सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ दिलकश गीतों पर झूमते नजर आ रहे हैं। उनके ये वीडियो कोरोना के डर से दूर खुलकर जीने का संदेश देते हैं। लोगों को उनका यह अंदाज बेहद पसंद आया। वह अपनी इस सफलता का श्रेय मां और बहन के अलावा अध्यात्म निकेतन आश्रम ग्वालियर के संत कृपाल जी महाराज को देते हैं।

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