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    उद्योगों को सुरक्षित रखने के लिए आइआइटी तैयार करेगा साइबर सैनिक, दूसरे बैच के लिए 12 नवंबर तक कर सकते है आवेदन

    By Jagran NewsEdited By: Abhishek Agnihotri
    Updated: Thu, 03 Nov 2022 03:33 PM (IST)

    इंटरनेट का विकास तेजी से दुनिया में बदलाव ला रहा है। पहले के उद्योग और अब के उद्योगों में कई अंतर हैं। ऐसे में इन उद्योगों को साइबर हमलों से बचाने के लिए कानपुर आइआइटी ने नया मास्टर्स प्रोग्राम शुरु किया है।

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    कानपुर आइआइटी ने ई-मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम किया शुरु।

    कानपुर, जागरण संवाददाता। इंटरनेट के तेजी से विकास के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव के फायदों के साथ-साथ साइबर खतरे भी बढ़ रहे हैं। डिजिटल युग में उद्योगों को साइबर हमले से बचाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) साइबर सैनिक तैयार करेगा। इस संभावित खतरे निपटने के लिए आइआइटी के विशेषज्ञ युवाओं को बारीकियां सिखाएंगे।

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    ई- मास्टर्स प्रोग्राम किया गया शुरु

    इसके लिए साइबर सुरक्षा में ई-मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम शुरू किया है। इस डिग्री की पढ़ाई करके युवा भविष्य में उद्योगों को साइबर हमलों से बचाने में सक्षम होंगे। जनवरी 2023 से शुरू होने वाले दूसरे बैच के लिए 12 नवंबर तक आवेदन की अंतिम तारीख निर्धारित की गई है।

    आइआइटी कानपुर के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डा. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि इस प्रोग्राम में विश्वस्तरीय संकाय और शोधकर्ताओं की टीम प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा की पढ़ाई कराती है। एक से तीन वर्षों की अवधि का प्रोग्राम 12 माड्यूल पर आधारित उद्योग-केंद्रित पाठ्यक्रम है। इसमें क्रिप्टोग्राफी, मशीन लर्निंग सुरक्षा पर शुरुआत से लेकर उन्नत चरणों तक का मसौदा शामिल है।

    उन्होंने आगे  कहा कि पहले बैच के 85 से अधिक प्रतिभागी इस ई-मास्टर्स कार्यक्रम का लाभ उठा रहे हैं। यह प्रोग्राम एक क्रेडिट ट्रांसफर सुविधा के तहत उच्च शिक्षा (एमटेक व पीएचडी) के लिए 60 क्रेडिट तक की छूट हस्तांतरित की जा सकती है। इससे प्रतिभागियों को आइआइटी कानपुर प्लेसमेंट सेल, इनक्यूबेशन सेल और पूर्व छात्रों के नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त होती है।

    बैंकिंग, संचार, बिजली क्षेत्र में दर्ज हुए थे 14 लाख साइबर हमले  

    पिछले साल भारत की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) ने 14 लाख से अधिक साइबर हमले की घटनाएं दर्ज की थीं। इसमें बैंकिंग सिस्टम, संचार, रेलवे, सशस्त्र बल, बिजली क्षेत्र कुछ महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे शामिल हैं। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसी तकनीक आने से रैंसमवेयर के खतरे बढ़े हैं। पिछले साल, भारत में रैंसमवेयर हमलों में अनुमानित 120 प्रतिशत का इजाफा हुआ। हालांकि उनमें से ज्यादातर तीसरे पक्ष के हमलावरों से हैं।

    साइबर सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ेंगी रिक्तियां  

    गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक 45 प्रतिशत संगठनों को अपनी साफ्टवेयर आपूर्ति शृंखलाओं पर हमलों का सामना करना पड़ सकता है। भारत में 2025 तक साइबर सुरक्षा क्षेत्र में 1.5 मिलियन से अधिक रिक्तियां होने वाली हैं। इस आगामी प्रतिभा की कमी को पूरा करने और भारत को बदलते साइबर सुरक्षा परिदृश्य के लिए एक अच्छी तरह से सुसज्जित और कुशल कार्यबल की आवश्यकता है, जिसे इस प्रोग्राम के जरिये दूर किया जा सकता है।